मैं सिर्फ आसपास के लोगों को और बच्चों के प्रति उनके व्यवहार को ही देखना पसंद नहीं करता बल्कि खुद बच्चों को भी देखना पसंद करता हूँ। जर्मनी और भारत में, दोनों जगह, मेरे कई बाल-बच्चेदार मित्र हैं और बहुत से बच्चे हमारे यहाँ भी रहते हैं इसलिए बच्चों के बारे में मुझे खासा अनुभव है। बच्चों के इस विशाल दायरे में मैंने कुछ बातों को कई बार नोटिस किया है: भारतीय बच्चे, ईश्वर के बारे में सचेत देश में रहते हुए, सोचते हैं कि ईश्वर एक तरह का सुपर हीरो होता है। मुझे लगता है कि इस बात की विवेचना की जानी चाहिए।
इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप घर में धर्म-कर्म करते हैं या नहीं, आपका बच्चा नहीं जानता कि जिसे लोग ‘ईश्वर’ या ‘भगवान’ कहते हैं, वह क्या और कैसा होता है, जब तक कि आप उसे नहीं बताते। ईश्वर की अवधारणा भूख जैसी सहज, स्वाभाविक नहीं है जिसे एक बच्चा शुरू से समझता है। यह ऐसी अवधारणा है जिसे मनुष्य ने प्रतिपादित किया है और बच्चे के मस्तिष्क में उसकी क्या रूपरेखा बनती है यह उस माहौल पर निर्भर करता है जिसमें वह रह रहा है। अगर आप छोटे से बच्चे से कहेंगे कि एक मूर्ति भगवान होती है और वह आपको उस मूर्ति की पूजा करते हुए रोज़ देखता है तो जब भी आप भगवान का ज़िक्र करेंगे इसी मूर्ति की छवि उसके मस्तिष्क में आएगी। आप उसे धार्मिक कथाएँ सुनाएँगे तो वह उस उसी भगवान का इतिहास सीखेगा।
हिन्दू धर्म में, जैसा कि आप जानते होंगे, कई तरह के भगवान होते हैं और उनमें से कुछ बच्चों को बड़ा आकर्षित करते हैं। उदाहरण के लिए एक वानर रूपी भगवान है, हनुमान या फिर गणेश है, जिसका सिर हाथी का होता है। ये भगवान काफी विज्ञापित हैं! आजकल के जमाने में सिर्फ धर्म-ग्रंथ ही नहीं हैं बल्कि कॉमिक्स हैं, छोटी छोटी चित्रकथाएँ हैं और सबसे खास, कार्टून फिल्में हैं, जिनमें ये भगवान मुख्य पात्र होते हैं और जिन्हें आजकल टीवी पर दिखाया जाता है।
तो, आजकल अभिभावक बच्चों के लिए टीवी चालू कर देते हैं और वहाँ बच्चे देखते रहते हैं कि कैसे कृष्ण और उसके मित्रों ने पृथ्वी को विनाश से बचाया या कैसे हनुमान अपनी अतिमानवीय शक्ति से हवा में उड़ता हुआ दुनिया भर में घूमता है, कैसे न्याय के लिए लड़ता है और दुष्टों पर विजय प्राप्त करता है। उसी चैनल पर अगला कार्यक्रम सुपरमैन या बैटमैन का होता है और बच्चा देखता है कि कैसे ये हीरो भी ठीक वही काम करते हैं! वे भी दुष्ट शक्तियों से दुनिया को बचाने के लिए और मासूमों की सुरक्षा करने हेतु निकल पड़े हैं। वे भी वही सब करते हैं जो कोई साधारण मनुष्य नहीं कर सकता। वे सभी अपराजेय हैं, उन सभी के बड़े विश्वासपात्र मित्र हैं और वे हमेशा सफल होते हैं और सबका बहुत भला करते हैं।
बच्चे का मस्तिष्क आपके ईश्वर को उसी धरातल पर स्थापित कर देता है, जहां सुपरमैन, स्पाइडरमैन या कैटवूमैन भी आसपास मौजूद हैं! मुझे यह कहना है कि मुझे यह सब देखकर हंसी आती है। जहां तक मेरा सवाल है, मेरे लिए ये सारे चरित्र और आपके सभी भगवान कहानियों के पात्र हैं। लेकिन अब आप बच्चे से कहते हैं कि सुपरमैन जैसी कोई चीज़ नहीं होती, जबकि हनुमान या गणेश का अस्तित्व है! नहीं! कोई भी अपने आपको साधारण मनुष्य से एक स्पाइडर जैसे अर्धमानवीय जन्तु में तब्दील नहीं कर सकता, लेकिन हाँ, एक कटे हुए सिर वाले व्यक्ति के गले पर हाथी का सिर रख दो तो वह जीवित होकर उठ बैठता है, जैसे गणेश!
आजकल कार्टून चरित्रों ने धर्म में इतनी घुसपैठ कर ली है कि रक्षाबंधन के अवसर पर बहने न सिर्फ गणेश वाली राखी खरीद सकती हैं बल्कि मिकी माउस और डोनाल्ड डक वाली राखियाँ भी बाज़ार में उपलब्ध होती हैं।
मगर मुझे यह अच्छा लगता है। आधुनिक समाज में धार्मिक लोगों के लिए यह अधिकाधिक मुश्किल होता जा रहा है कि वे अपने भ्रांत मिथकों और काल्पनिक कहानियों को वास्तविक बताकर लोगों पर थोप सकें। हिन्दू धर्म और डिस्नेलैंड, ईश्वर और कार्टून हीरो, सब कुछ एक-मेक होकर बच्चों के दिमाग में पहुँच रहे हैं।
दुर्भाग्य से, अभी तक धार्मिक अभिभावक और उनके आसपास के लोग भगवान की मिथकीय कहानियों और भगवान की ताकत को सच्चा सिद्ध करने की कठोर से कठोर कोशिश करते देखे जाते हैं। फिलहाल, उन्हें कुछ सफलता मिल रही है मगर इस पीढ़ी के बड़े और जिम्मेदार होने का इंतज़ार कीजिए, देखते हैं कि क्या वे समझ पाते हैं कि गणेश भी उतने ही वास्तविक हैं जितने सांता क्लाज और मिनी माउस!
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