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क्या आप ईश्वर में विश्वास करते हैं?

स्वामी बालेन्दु के लिए प्रेम ही ईश्वर है और वो प्रेम और उसकी शक्तियों के अतिरिक्त अब किसी अन्य ईश्वर पर विश्वास नहीं करते!

पढ़ें और जानें कि कैसे एक अध्यात्मिक गुरु नास्तिक में बदल गया और कैसे उसकी मान्यताएं बदलीं!

बेतुका और हास्यास्पद विश्वास कि ईश्वर ने मंदिर तो बचा लिया जबकि हजारों लोगों की जान ले ली – 5 मई 2015

ईश्वर

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उनके मुताबिक काठमांडू का मुख्य मंदिर तहस-नहस नहीं हुआ, यह ईश्वर का प्रताप नहीं है!

अगर आप ईश्वर या धर्म पर कोई आस्था नहीं रखते तो फिर अपनी शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ क्यों कहते हैं? 30 अप्रैल 2015

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स्वामी बालेंदु उन लोगों की बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, जो कहते हैं कि वे ईश्वर या धर्म पर तो कोई आस्था नहीं रखते मगर प्रार्थना करते हैं। वे बता रहे हैं कि क्यों इन शुभकामनाओं को ‘प्रार्थना’ नहीं कहा जाना चाहिए!

"’ईश्वर महज अपना काम कर रहा है" – धार्मिक आस्थावानों का नेपाल के भूकंप पर स्पष्टीकरण – 28 अप्रैल 2015

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प्रार्थनाओं पर लिखे गए अपने ब्लॉग पर आई टिप्पणी पर स्वामी बालेन्दु प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। टिप्पणी करने वाले ने कहा कि ईश्वर अच्छी तरह जानता है कि वह क्या कर रहा है!

नेपाल के भूकंप पीड़ितों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं? किसके सामने? उसके, जिसने यह हादसा बरपाया है? 27 अप्रैल, 2015

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि उनकी नज़र में भूकंप पीड़ितों के लिए की जाने वाली प्रार्थनाएँ व्यर्थ हैं। जिसका या तो अस्तित्व ही नहीं है या है, तो जिसने यह कहर ढाया है, ऐसे ईश्वर के सामने भजन-कीर्तन नहीं बल्कि सदिच्छा से की गई सेवा ही पीड़ितों के काम आएगी!

संदेहवाद अथवा अज्ञेयवाद एक पड़ाव है, अंतिम लक्ष्य नहीं – 16 जनवरी 2014

ईश्वर

स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि क्यों वे संदेहवादियों को भ्रमित समझते हैं और मानते हैं कि जल्द से जल्द उन्हें अपने संदेह दूर कर लेने चाहिए।

गणेश और स्पाइडरमैन – बच्चों के लिए दो एक जैसे सुपरहीरो!- 17 सितंबर 2013

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स्वामी बालेंदु बच्चों की इस दुविधा का वर्णन कर रहे हैं, जिसमें उन्हें हिन्दू देवी-देवता और स्पाइडरमैन जैसे सुपरहीरो एक जैसे नज़र आते हैं!

अगर मैं, आप और हम सब ईश्वर हैं तो आप ये उपदेश किसे दे रहे हैं? – 21 जून 2013

ईश्वर

स्वामी बालेंदु वेदान्त के दर्शन के बारे में विचार करते हुए कहते हैं कि क्यों एक नास्तिक के रूप में अब उन्हें इस दर्शन में कोई अर्थ नज़र नहीं आता।

आस्तिक स्वयं को धोखा देते हैं यह कहकर कि हर बुरी घटना के पीछे ईश्वर का विधान है – 20 जून 2013

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नास्तिकों की सबसे बड़ी शंका यह होती है कि ईश्वर धरती पर बुरी बातों को होने ही क्यों देता है? इस बहुचर्चित विषय पर एक अलग नज़रिये से विचार कर रहे हैं बालेंदु स्वामी! पढिए।

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि….. 19 जून 2013

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स्वामी बालेंदु कहते हैं की कुछ बातों का खुलासा हो जाए तो उन्हें ईश्वर से कोई शिकायत नहीं होगी। किन बातों को वे ठीक नहीं समझते, पढ़िए।

ईश्वर से डरकर आपको क्या मिलता है? अच्छे नैतिक विचार या दिमागी बीमारियाँ? – 18 जून 2013

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स्वामी बालेंदु पूछ रहे हैं कि ईश्वर के डर से अच्छे नैतिक विचार प्राप्त होते हैं या उससे लोगों के दिमागों में नकारात्मक विचार पैदा होते हैं?

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