जब हम भोजन के बाद खाई जाने वाली मिठाई अकेले ही खा गए! 21 जुलाई 2014

आनन्द

पिछले हफ्ते जब हम थॉमस और आयरिस के साथ बैठे हुए थे, हमारी बातों का रुख कुछ समय पहले हुई एक मज़ेदार घटना की ओर मुड़ गया, जिसमें हम सभी साझेदार थे। उसे शुरू से बताता हूँ, मज़ा आएगा!

थॉमस के एक मित्र ने एक बार हम सबको आमंत्रित किया। वह मित्र हमसे पहले मिल चुका था लिहाजा अपने जन्मदिन की पार्टी में उसने हमें भी बुला लिया था। पार्टी उसके घर पर ही थी और जब हम उसके घर पहुँचे, वहाँ करीब 15 से 20 लोग होंगे। कुछ हाल में बैठे बातचीत में मगन थे और कुछ बाहर लान में खुली हवा का मज़ा ले रहे थे।

कुछ देर हम लोग घर का मुआयना करते रहे फिर खाने की तलाश में लग गए क्योंकि हमें जमकर भूख लगी थी। भोजन का आयोजन बुफे तरीके से किया गया था और सबको अपना मनपसंद खाना निकालकर खुद लेना था। हम लोग दिन में सिर्फ दो बार खाना खाते हैं और उस दिन हमने नाश्ते के बाद कुछ नहीं खाया था! हमने अपने मेज़बान से सुनिश्चित कर लिया कि खाना शाकाहारी है और हमने तीन लोगों के लिए दो प्लेटों में तरह-तरह की चीजें निकाल लीं और खाना शुरू कर दिया। खाना बढ़िया था और हमने उसका भरपूर लुत्फ़ उठाया। हम लोग खाते वक़्त बात नहीं करते लिहाजा जबकि दूसरे लोग दो वाक्यों के बीच एकाध कौर मुँह में रख रहे थे, हम लोग पूरी तरह अपना ध्यान भोजन पर केन्द्रित किए हुए थे। और जब हमारा खाना पूरा भी हो गया, अधिकांश मेहमान मुश्किल से अपना खाना शुरू कर पाए थे!

हमारा मेज़बान, जो हम जैसे दो विदेशियों को आया जानकर बड़ा खुश दिखाई दे रहा था, हमारे पास आया और हमारे सामने टेबल पर दो बड़े-बड़े कटोरों में कुछ रख गया और कहा, इसका भी मज़ा लीजिए। वह खाना खाने के बाद खाई जाने वाली मिठाइयाँ और फल आदि थे, जिसमें दही के साथ बेरी मिलाकर बनाया जाने वाला व्यंजन भी था। उसे चखने के बाद हमें लगा, वह कुछ कम मीठा है और हम शक्कर लेने के लिए बढ़े-यह हमारे साथ जर्मनी में अक्सर होता है क्योंकि यहाँ लोग मीठा कम खाते हैं। थोड़ी सी शक्कर मिलाने के बाद हमें उसका स्वाद जबर्दस्त लगा!

एक तरफ अभी दूसरे सभी अपना मुख्य खाना ही खा रहे थे, हमने अपनी-अपनी दूसरी प्लेटें पुनः भर लीं। फिर एक बार और। इस तरह कई बार हमने उस पर हाथ साफ़ किया। हमें लग रहा था कि इतना सा रायता 15-20 लोगों के लिए तो होगा नहीं इसलिए ये दो कटोरे सिर्फ हमारे लिए हैं और दूसरों के लिए मुख्य खाने की मेज़ पर और भी रखे होंगे!

हमने थोड़ा-बहुत थॉमस, आयरिस और रमोना को भी दिया और बाकी हम दोनों चट कर गए!

अपने आखिरी कौर के साथ भोजन पर केन्द्रित अपने ध्यान-योग से हम बाहर आए और इधर-उधर ताकना शुरू किया। धीरे-धीरे, घूम-घूमकर हर तरफ देख लिया: दही और बेरी का वह अतुलनीय खाद्य कहीं नज़र नहीं आया!

हमें झटका सा लगा-कहीं सबका डेज़र्ट अकेले हम दो तो नहीं चट कर गए? जी हाँ, यही हुआ था! तब अचानक हमें ज़ोर-ज़ोर से हँसने की इच्छा हो आई! इसके सिवा और कर ही क्या सकते थे, थी ही हँसी की बात, हँसी रोकना मुश्किल हो गया! एक भले आदमी ने हमें आमंत्रित किया, उसे हम ठीक तरह से जानते तक नहीं, हम उसके घर में बैठे हैं, उसके जन्मदिन की पार्टी में आए हैं और पंद्रह-बीस मेहमानों के लिए तैयार डेज़र्ट हम दो, अकेले खा गए! है न मज़ेदार बात!

कुछ देर हम हँसते रहे, थॉमस, आइरिस और रमोना ने भी हँसी में हमारा साथ दिया। लेकिन बावजूद इस हादसे के सब कुछ ठीक-ठाक, हँसी-खुशी निपट गया। दरअसल दो मिनट बाद जब हमने देखा कि हमारे मेजबान की पत्नी एक बड़ा सा केक लेकर हाल में अवतरित हुईं हैं तो हमने राहत की साँस ली: दूसरों को भी अब कुछ न कुछ मीठा मिल ही जाएगा!

जब भी हम इस घटना के बारे में सोचते हैं तो हमारी हँसी रुक नही पाती। लेकिन एक बात हम अच्छी तरह जान गए हैं-या तो आगे वह कभी भी हमें आमंत्रित नहीं करेगा या अगर करेगा तो फिर बाल्टी भर डेज़र्ट का इंतज़ाम करके रखेगा! हा हा… और हाँ, पतेला भर शक्कर का भी!

Leave a Comment