जब अपरा एक दुकान में ख़रीदारी करने गई! 18 फरवरी 2014

आज के ब्लॉग को समझने के लिए आपका यह जानना आवश्यक है कि मैं स्वयं आश्रम के बाहर बहुत नहीं निकलता। मैं आश्रम में ही अच्छा महसूस करता हूँ, मुझे काम के लिए या किराने का सामान खरीदने बाहर नहीं निकलना पड़ता और वास्तव में ख़रीदारी करने का शौक मुझे बिल्कुल नहीं है, न ही सिनेमा देखने का या और भी कई बातों का, जिसका शौक ज़्यादातर लोगों को होता है मगर मुझे नहीं है। मैं आम तौर पर जहां रहता हूँ वहीं खुश रहता हूँ, घर में और अपने परिवार के साथ।

यही कारण है कि मेरी पत्नी ही अधिकतर ख़रीदारी करने अकेले या मेरे किसी भाई के साथ बाहर निकलती है। क्योंकि हम सभी वृन्दावन में जाने-पहचाने लोग हैं इसलिए अगर वह अकेले भी जाती है तो उसे भी ज़्यादातर लोग जानते ही हैं। और जब वह पूर्णेन्दु के साथ जाती है तो वह उसे उन दुकानदारों के यहाँ ले जाता है, जहां वह दुकानदार को जानता है क्योंकि वे उसके सहपाठी मित्र होते हैं और जब तक रमोना ख़रीदारी करती है यह अपने मित्र के साथ गपशप करता रहता है।

एक और बात जो आपके लिए जानना ज़रूरी है वह यह है कि अपरा का एक पा है और एक पापा है। मैं पा हूँ। पापा अशोक है, जो आश्रम का कर्मचारी है और अपरा के सबसे अच्छे दोस्त, ऋषि का पिता है। ऋषि अपरा से छः माह बड़ा है और वे दोनों दिन का ज़्यादातर वक़्त साथ गुज़ारते हैं। या फिर रमोना और मेरे साथ। या फिर ऋषि के माता-पिता विमलेश और अशोक के साथ। यही कारण है कि दोनों बच्चों ने हम दोनों अभिभावकों के एक जैसे नाम रख लिए हैं: जैसे ऋषि मुझे पा कहता है और रमोना को माँ, वैसे ही जैसे अपरा विमलेश को मम्मी और अशोक को पापा कहती है। इस तरह दोनों बच्चों के पास एक माँ और एक मम्मी है तथा एक पा और एक पापा हैं।

और अब कहानी सुनिए:

पिछले सप्ताह रमोना आइरिस के साथ बाज़ार गई थी। उसने तय किया कि उसी दुकान में जाए जहां पूर्णेन्दु के साथ वह अक्सर जाती रहती है। पूर्णेन्दु का सहपाठी, जो रमोना को जानता है, आज दुकान पर नहीं था इसलिए उसके सेल्समैन उनकी सेवा में हाजिर हुए। वे अपरा को जानते थे क्योंकि वह भी अक्सर रमोना और पूर्णेन्दु के साथ वहाँ आती रहती है। तो वे रमोना और आइरिस को कपड़े दिखाते हुए अपरा के साथ चुहलबाजी भी करने लगे।

कुछ देर बाद सेल्समैन ने पूछा: "आज तुम्हारे पापा नहीं आए?"

अपरा ने जवाब दिया: "नहीं, पापा नहीं आए!"

सेल्समैन पूर्णेदु के बारे में पूछ रहा था, अपरा अशोक के बारे में बता रही थी। और रमोना मेरे बारे में सोचते हुए मुस्कुरा उठी। 🙂

Related posts

जब एक परिचयात्मक शब्द सब कुछ बदलकर रख देता है! 4 फरवरी 2015

जब एक परिचयात्मक शब्द सब कुछ बदलकर रख देता है! 4 फरवरी 2015

स्वामी बालेंदु शिक्षक की नौकरी के एक साक्षात्कार का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि किस तरह वह उनकी ...
सिर्फ सेक्स करते समय ही मैं दरवाजे पर 'डू नॉट डिस्टर्ब' का सूचना पट्ट लगाता हूँ! 30 दिसंबर 2014

सिर्फ सेक्स करते समय ही मैं दरवाजे पर ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ का सूचना पट्ट लगाता हूँ! 30 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु जीवन के एक महत्वपूर्ण प्रश्न से दो चार हो रहे हैं। क्या आप इस विषय में उनकी मदद ...
कुत्ते चॉकलेट के साथ ही योनि पसंद करते हैं! 11 अगस्त 2014

कुत्ते चॉकलेट के साथ ही योनि पसंद करते हैं! 11 अगस्त 2014

स्वामी बालेंदु एक मज़ेदार कहानी लिख रहे हैं, जिस पर वे और उनके मित्र कई साल से बार-बार हँसते रहे ...
जब हम भोजन के बाद खाई जाने वाली मिठाई अकेले ही खा गए! 21 जुलाई 2014

जब हम भोजन के बाद खाई जाने वाली मिठाई अकेले ही खा गए! 21 जुलाई 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे एक बार उन्हें एक जन्मदिन की पार्टी में आमंत्रित किया गया और उन्होंने ...
कभी-कभी गप्पबाजी करते हुए अचानक आपके मुंह से शब्द नहीं निकलते! 4 दिसंबर 2013

कभी-कभी गप्पबाजी करते हुए अचानक आपके मुंह से शब्द नहीं निकलते! 4 दिसंबर 2013

स्वामी बालेंदु एक मज़ेदार घटना का वर्णन कर रहे हैं, जब एक भारतीय महिला की स्पष्टवादिता के सामने रमोना निर्वाक ...
क्या धरती के मनुष्य एलिएन्स के लिए आकर्षक सेक्स-पार्टनर हैं? - 3 जून 2013

क्या धरती के मनुष्य एलिएन्स के लिए आकर्षक सेक्स-पार्टनर हैं? – 3 जून 2013

स्वामी बालेन्दु एक महिला के टीवी इंटरव्यू के बारे में बता रहे हैं जिसमें वह महिला यह दावा करती है ...
इस्तीफ़े के बाद सोलहवें पोप बेनेडिक्ट के लिए 4 रिटायरमेंट प्लान - 15 फरवरी 2013

इस्तीफ़े के बाद सोलहवें पोप बेनेडिक्ट के लिए 4 रिटायरमेंट प्लान – 15 फरवरी 2013

अवकाश ग्रहण करने के बाद सोलहवें पोप बेनेडिक्ट क्या-क्या कर सकते है इस बारे में काफी सोच-विचार करने के बाद ...

Leave a Reply