जब आपके दो मित्र लड़ बैठें तो आपको क्या करना चाहिए?- 24 सितंबर 2013

कल मैंने कुछ मित्रों के बारे में लिखा था और बताया था कि ऐसी मित्रता होना कितनी शानदार बात है जिसमें सबको वैसा ही आपसी साहचर्य प्राप्त होता है जैसा संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों को एक दूसरे से प्राप्त होता है। लेकिन, दोस्तों के बीच कई बार बड़ी जटिल परिस्थितियाँ भी पैदा हो जाती हैं। जैसे मान लीजिए, आपके दो मित्र अचानक झगड़ने लगें और आप दोनों के बीच फंस गए हों। आपको क्या करना चाहिए?

मैं समझता हूँ, ऐसी स्थिति, कभी न कभी, हर एक के जीवन में आती है जब आपके दो नजदीकी व्यक्ति विचारों की विभिन्नता के चलते, बहस में उलझ जाते हैं। या उनमें से एक कोई ऐसी बात कर बैठता है जो दूसरे को निराश या दुखी कर देती है। कुछ भी हो, आप सीधे-सीधे इस समस्या से जुड़े नहीं हैं इसलिए दो ऐसे दोस्तों के बीच चुपचाप खड़े हैं जो भविष्य में एक दूसरे के साथ कोई संबंध नहीं रखना चाहते लेकिन आपके साथ दोस्ती कायम रखना चाहते हैं। आप भीतर से इस दुविधा में हैं कि इनके बीच हस्तक्षेप किया जाए या नहीं जिससे दोनों के बीच कोई समझौता कराया जा सके। आपको किसी एक का पक्ष भी लेना पड़ सकता है और इसके नतीजे में दूसरे को खोना भी पड़ सकता है। क्या तटस्थ रहना ठीक होगा या क्या तटस्थ रहना संभव होगा?

तटस्थ रहना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है क्योंकि आपको उनके वाद-विवाद से कोई मतलब तो था नहीं और आप उसमें उलझना भी नहीं चाहते। आप सिर्फ यह चाहते हैं कि दोनों आपके दोस्त बने रहें। बात तो बहुत अच्छी है लेकिन उसे कार्यरूप में परिणत करना बहुत मुश्किल है!

आप ऐसी हालत में क्या करेंगे जब दोनों मित्रों ने वाद-विवाद में बराबरी के साथ भागीदारी की हो? उदाहरण के लिए, क्या आप किसी एक के साथ फिल्म देखने जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि दूसरे के साथ भी जल्द ही कोई दूसरी फिल्म ज़रूर देखेंगे? ऐसी जगह जहां दोनों उपस्थित हों, आप किसके साथ खड़े होंगे? क्या आप अपना समय दोनों के बीच बराबर-बराबर बाँट सकेंगे और क्या आपको इधर से उधर पाला बदलते हुए अटपटा नहीं लगेगा? और, जब आपके यहाँ किसी उत्सव का कोई आयोजन होगा, तब? क्या आप दोनों को बुलाएँगे? जी हाँ, और, तब आप उनसे अपेक्षा करेंगे कि जिम्मेदार वयस्कों की तरह व्यवहार करें और एक दूसरे के साथ शालीनता के साथ पेश आएँ या कम से कम एक दूसरे को नज़रअंदाज़ करें-लेकिन क्या इससे आपके आयोजन का माहौल ठंडा और नीरस नहीं पड़ जाएगा? क्या वह सभी मेहमानों के लिए बोझिल नहीं हो जाएगा?

आपको अपनी भावनाओं के अतिरिक्त, दो और लोगों की भावनाओं का खयाल भी रखना है। क्या दोनों में से एक आपसे उसका पक्ष लेने की अपेक्षा करता है और चाहता है कि आप दूसरे का साथ छोड़ दें? अगर आप किसी एक का पक्ष लेते हैं तो क्या दूसरा यह समझेगा कि आपने उसकी दोस्ती के साथ विश्वासघात किया है, अगर आप इस मामले में उसके पक्ष में प्रतिक्रिया नहीं देते?

ऐसी परिस्थिति में आपके मन में सैकड़ों सवाल आएंगे। मुझे लगता है कि इस समस्या के हल का कोई एक सही रास्ता उपलब्ध नहीं है और आप तटस्थ रहें या किसी एक का पक्ष लें, दोनों में से कुछ भी निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है। यह विभिन्न स्थितियों पर निर्भर करेगा और कोई भी आपको ऐसी उचित सलाह नहीं दे सकता, जो सभी स्थितियों पर लागू हो सके। फिर भी एक बात मैं ज़रूर कहना चाहूँगा: यह देखिये कि आप इस बारे में क्या महसूस कर रहे हैं। आप उनके बीच हुए विवाद का कारण जानते हैं- क्या दोनों में से एक ने कोई अवांछनीय बात कह दी है या ऐसी बात दोनों ओर से कही गई है? क्या आप किसी एक के तुलनात्मक रूप से ज़्यादा नजदीक हैं और उसके साथ अपने सम्बन्धों को खतरे में डालने से अधिक दूसरे की दोस्ती छोडना ज़्यादा बेहतर समझेंगे? क्या आप समझते हैं कि आप दोनों के बीच मध्यस्थ हो सकते हैं और उससे इस मामले में कोई लाभ हो सकता है या उससे स्थिति और बिगड़ सकती है?

ये सारे सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब किसी दूसरे के पास हो ही नहीं सकता। मैंने अपने कुछ विचार आपके सामने रखे हैं, उन पर आप स्वयं विचार करें: अंततः आपको ही इस स्थिति से निपटना है और निश्चय करना है कि क्या किया जाना उचित होगा। एक बात गांठ बांध लें: जो भी आप करें, अपनी भावनाओं के साथ ईमानदार रहें और उन्हीं के आधार पर कोई कार्रवाई करें। तभी आप अपने निर्णय के प्रति आश्वस्त हो सकेंगे और भविष्य में किसी पछतावे से बच सकेंगे।

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