बात करने के लिए कभी-कभी आपको किसी दूरस्थ मित्र की ज़रूरत पड़ती है – 8 सितंबर 2015

मित्र

हाल ही में मैं अपने एक मित्र से बात कर रहा था। वह आस्ट्रिया में रहता है और उससे मेरी मुलाक़ात छह साल पहले अपने आस्ट्रिया दौरे के समय हुई थी। इस बीच हम लोग कभी-कभार बात करके एक-दूसरे के हालचाल ले लिया लिया करते थे, एक दूसरे की गतिविधियों के बारे में पूछ-ताछ कर लेते थे। पिछले हफ्ते उसका फोन आया, सिर्फ मौसम का हाल जानने के लिए नहीं बल्कि एक मित्र के रूप में, मुझसे मदद चाहता था।

हर व्यक्ति जानता है कि मित्र होते ही इसलिए हैं कि ज़रूरत पड़ने पर उनकी मदद ली जा सके। लेकिन ऐसे मौके भी आते हैं, जब आप अपनी कुछ बातें अपने करीबी मित्रों को नहीं बता सकते, आप कुछ बातें उनके साथ साझा करने में संकोच करते हैं। ऐसे वक़्त, आपका कोई ऐसा दूर रहने वाला मित्र हो, जो सारी परिस्थिति को कुछ दूर से देख-समझ सके, तो अच्छा होता है। मेरे आस्ट्रियाई मित्र के साथ कुछ ऐसा ही था।

जब पहले-पहल मेरा उससे परिचय हुआ था, तब, हाल ही में अपनी पत्नी और दो छोटे-छोटे बेटों के साथ वह अपने नए घर में रहने आया था। नई जगह में नए जीवन की शुरुआत करते हुए वे बहुत उल्लसित थे। उनका बड़ा बेटा उसी साल स्कूल जाना शुरू करने वाला था और सब कुछ बढ़िया चल रहा था।

फोन पर उसने मुझे बताया कि परिस्थितियों में बहुत सारी तब्दीलियाँ आ चुकी हैं। उसे पता चला है कि सालों से उसकी पत्नी उसके साथ छल कर रही थी और उनके साझा दोस्त के साथ उसके संबंध थे। इसलिए वह उससे अलग होकर तलाक लेना चाहता था। उसका दिल टूट चुका था और वह यह निर्णय ले भी चुका था: अर्थात, वह उसे भूल भी नहीं पा रहा था और उससे संबंध भी तोड़ना चाहता था।

यह समझने के लिए कि वह अपने स्थानीय मित्रों से इस बारे में बात क्यों नहीं कर सकता था, आपको दो और बातें जाननी आवश्यक हैं। मेरा दोस्त बहुत छोटे से गाँव में रहता था, जहाँ हर कोई अक्षरशः एक-दूसरे को जानता है। संबंध टूटने या संबंध में तनाव होने जैसी कोई भी खबर वहाँ छिपी नहीं रह सकती थी- बाज़ार-मुहल्लों में इसकी चर्चा होनी शुरू हो जाती और तुरंत हर कोई इसे जान सकता था।

दूसरा कारण यह था कि उसकी पत्नी कुछ समय से शराब की आदी हो चुकी थी। मेरे मित्र ने पत्नी की मदद की लेकिन इस बात का भी भरसक प्रयास किया कि गाँव में यह बात न फैले। वह अपनी पत्नी को, परिवार की प्रतिष्ठा को और बच्चों को इन सब परेशानियों से दूर रखना चाहता था और उन्हें बदनामी से बचाना चाहता था।

और अभी भी वह यही कर रहा था। वह अपना सिरदर्द अपने दोस्तों के साथ साझा नहीं करना चाहता था-वह अपनी वैवाहिक समस्याओं के बारे में उनसे कहना नहीं चाहता था सिर्फ इसलिए कि सारा गाँव तुरंत इस बात को जान जाएगा। दूसरी समस्या यह थी कि पत्नी की शराब की लत की वजह से वह अपने बेटों को उसके पास छोडना नहीं चाहता था! बिना पत्नी को तकलीफ पहुँचाए यह बात भी वह किसी से नहीं कह सकता था- कम से कम वह ऐसा समझता था! क्योंकि, हर कोई वह बात जान जाएगा, जिसे वह इतने समय से छिपाने की कोशिश कर रहा था!

तो इस तरह उसने मुझे यह पूछने के लिए फोन किया था कि क्या किया जाए।

सबसे पहले तो मैंने उससे कहा कि उसके और शीघ्र ही भूतपूर्व हो जाने वाली पत्नी के विषय में लोग क्या सोचेंगे, उसे इस बात की चिंता छोड़ देनी चाहिए! उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उसके दिल में मची हलचल, उसकी भावनाएँ और उसके बच्चे अधिक महत्वपूर्ण हैं! इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या सोचते हैं और दूसरे क्या कहेंगे- उसके बच्चों को सुरक्षित होना चाहिए! उसे चिंता न करने की सलाह देने के अलावा मैंने उससे कहा कि किसी अच्छे वकील से मिलकर उससे सारी बातों की चर्चा करे।

फिर अपने दोस्त से मिले और बात करे। आपको चाहिए कि अपने अंदर की बात किसी न किसी को अवश्य बताएँ! उसकी पत्नी को शराब की लत के संबंध में मदद की ज़रूरत है और यह बात छिपाकर कोई लाभ नहीं है, उससे यह लत छूटने वाली नहीं है। उसे दबाने की कोशिश करके वह उसकी कोई मदद नहीं कर रहा होगा-और अंत में मैंने उससे कहा कि अब तुम्हारे बेटों को तुम्हारी ज़रूरत है!

मैंने उसे उससे कहा कि कैसे गाँव छोड़कर किसी दूसरे शहर में रहना भी एक विकल्प हो सकता है, फिर से एक नया जीवन शुरू करना- लोगों की बेकार चर्चाओं से, अफवाहों, कानाफूसियों से दूर किसी शांत जगह में। इस बीच एक दिन सब ठंडा पड़ जाएगा और सिर्फ वही, जो उसके सच्चे मित्र हैं, उसके साथ खड़े रहेंगे!

वह खुश हुआ, मुख्य रूप से इसलिए कि वह किसी से अपनी बात साझा कर सका। और मैं खुश हूँ कि मेरे ऐसे मित्र भी हैं, जो आवश्यकता पड़ने पर मुझे, इतनी दूरी के बावजूद, याद कर लेते हैं!

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