यहाँ सब कुछ आभासी नहीं है: जब सोशल मीडिया मित्रों को वास्तविक जीवन में एक-दूसरे से मिलवाता है! 16 दिसंबर 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत
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मेरे कल और परसों के ब्लॉगों की ध्वनि से कुछ लोगों को यह प्रतीत हो सकता है कि मैं सोशल मीडिया को कतई पसंद नहीं करता। लेकिन यह सही नहीं है। सोशल मीडिया दुनिया में बहुत सारे सकारात्मक परिवर्तन लेकर आया है और एक आधुनिक व्यक्ति के नाते मैं उससे होने वाले लाभों के प्रति सजग हूँ। लेकिन फिर भी मैं उसकी तुलना में वास्तविक जीवन को विशेष तरज़ीह देता हूँ।

मैं तकनीकी प्रगति पसंद करता हूँ। मैं शुरू से ही नई-नई मशीनों, जैसे कैमेरा, के प्रति आकर्षित होता रहा हूँ। अपने शहर में मैं कुछ पहले लोगों में से था, जिन्होंने पहले पहल डिजिटल कैमेरा खरीदा था और जब फोन आया तो बहुत से पड़ोसी फोन करने हमारे घर आते थे, पहला मोबाइल, जो मैंने खरीदा था वह एक बड़ी सी ईंट जैसा था क्योंकि तब मोबाइल फोन अभी आए ही आए थे और उस समय ऐसे ही होते थे! मेरा विश्वास है कि तकनीकी खोजें हमारी बहुत अधिक मदद कर सकती हैं। इंटरनेट मैं काफी समय से इस्तेमाल करता रहा था और स्वाभाविक ही एक दिन सोशल मीडिया नेटवर्क से भी जुड़ गया।

मैं यह कहना चाहता हूँ कि आज के दिन यह लोगों के साथ जुड़ने का एक प्रमुख तरीका है और इसकी तुलना किसी भी पुराने तरीके से नहीं की जा सकती! बहुत से मेरे परिचित, जिनसे मैं वास्तविक दुनिया में पहले से जुड़ा हुआ हूँ, अब नेट के ज़रिए भी मेरे साथ जुड़े हुए हैं और मैं नेट-संदेशों के माध्यम से उनसे एक साथ बातचीत कर सकता हूँ। इसी के साथ, उनके अलावा भी बहुत से दूसरे लोग हैं, जिन्हें मैं बिल्कुल नहीं जानता और जो मुझसे कभी रूबरू नहीं मिले हैं-जो मेरे शब्दों को पढ़कर, शायद उन्हें पसंद करके मेरे बारे में और भी अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।

मैं एक ही समय में बहुत सारे लोगों से जुड़ सकता हूँ और उनमें से हर व्यक्ति इस बात का चुनाव कर सकता है कि वह और आगे पढ़ना चाहता है या नहीं! वे अपनी कंप्यूटर सेटिंग इस तरह रख सकते हैं कि जब भी मैं कुछ लिखूँ, वे पढ़ सकें या वह उनके स्क्रीन पर ही ना आए! मेरी नज़र में वह लोगों को चुनने का बहुत शानदार अवसर प्रदान करता है कि वे क्या करना चाहते हैं।

यह तो हुई लोगों से जुड़ने की बात। लेकिन उसके बाद, मुझे लगता है, एक कदम और रखने की ज़रूरत है। उन आभासी लोगों को वास्तविक जीवन में लेकर आने की। जब आपको लगता है कि आप किसी से ऑनलाइन जुड़े हैं तो वास्तव में वह बहुत एकतरफा एहसास होता है! सामने वाले के लिखे शब्द आप अक्सर पढ़ते हैं। आप उसके पोस्ट किए हुए चित्र देखते हैं और फेसबुक पर उन्हें ‘लाइक’ भी कर देते हैं। लेकिन संभव है, सामने वाला इस बात को नोटिस ही न करे कि इस तरह आप उसके कितने करीब हैं। वह नोटिस करे, इसके लिए आपको सीधे संदेश भेजना होगा, ईमेल करना होगा या फोन करना होगा या फिर रूबरू जाकर मिलना होगा।

और हमने इसे संभव किया है: मेरे कई ऑनलाइन मित्र मुझसे मिलने यहाँ आए हैं। भारतीय, जो जीवन के प्रति अलग नज़रिए को और सोचने के भिन्न तरीके को पसंद करते हैं, एक दिन के लिए या सप्ताहांत में यहाँ आते रहे हैं। दुनिया भर के लोग कुछ हफ़्तों या महीनों के लिए हमारी योग और आयुर्वेद की कार्यशालाओं में या विश्रांति शिविरों में शामिल होने आश्रम आते हैं।

इसी परिप्रेक्ष्य में मैं समझता हूँ कि वास्तव में सोशल मीडिया वास्तविक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है: जब कोई बताता है कि उन्होंने मेरे बारे में कहीं ऑनलाइन पढ़ा और फिर मेरे ब्लॉग पढ़ने लगे और उनसे उन्हें सहायता प्राप्त हुई। जब किसी ने मुझे ऑनलाइन देखा, वेबसाइट पर जाकर हमारे चैरिटी कार्यों के बारे में पढ़ा और किसी बच्चे के प्रायोजक बने। जब किसी ने मेरी ऑनलाइन टिप्पणियों को पढ़ा और मुझसे रूबरू बातचीत करने लंबी यात्रा करके भारत आ गए। जब किसी ने हमारे विश्रांति शिविरों के फोटो देखे और हमारे योग अवकाश शिविर में शामिल होने का निर्णय लिया।

मैं वास्तविक संपर्क में विश्वास करता हूँ और सोशल मीडिया महज इसका एक साधन है, उस दिशा में आगे बढ़ने का एक माध्यम। ऑनलाइन हो या ऑफ़लाइन, मैं उसकी वास्तविकता कायम रखना चाहता हूँ।

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