कैसे? केवल परिचित ही नहीं बल्कि मित्र बनायें! 16 सितम्बर 2014

रविवार की पार्टी पर लिखे ब्लॉग में कल मैंने आपको बताया था कि माइकल के जन्मदिन पर आयोजित समारोह में इतने लोगों को आया देखकर हम बड़े खुश और प्रभावित हुए थे। कल मैं और रमोना अपने मित्रों के बारे में बात करते रहे और एक बार फिर मुझे एहसास हुआ कि जीवन में इन मित्रों को पाकर मैं कितना भाग्यशाली महसूस करता हूँ। मुझे लगता है कि जीवन में मित्रता का बड़ा महत्व है- पैसा, सफलता और दूसरी सभी चीजों से भी कहीं ज़्यादा, जो कभी-कभी बहुत महत्वपूर्ण जान पड़ती हैं।

लुनेबर्ग में माइकल और आंद्रिया और वीज़बादेन में थॉमस और आयरिस के साथ बहुमूल्य समय बिताने के बाद मैं महसूस कर रहा हूँ कि हम एक-दूसरे कि दिलों में किस कदर समाए हुए हैं। पार्टी में माइकल के मित्रों से बात करते हुए मुझे लगा कि मैं उसकी भीतरी दुनिया को भी कितनी अच्छी तरह जानता हूँ क्योंकि उसके मित्रों के चरित्रों की कुछ खूबियों को देखकर मुझे लगा कि उन्हें वह पसंद करता होगा और इसीलिए इन मित्रों के वह इतना करीब है। यह आपसी समझ तभी पैदा होती है जब आप एक दूसरे से गहराई के साथ जुड़े होते हैं।

याद रखें, मित्रता तभी जीवित रहती है जब आप दूसरे के सामने अपना दिल खोलकर रख देते हैं। आपको अपना भीतरी रहस्य उसके सामने खोल देना होता है कि मित्र उसकी गहराइयों तक देख सकें। आपकी आशाओं, स्वप्नों को जान सकें और आपके भय, दुखों और निराशाओं की पड़ताल कर सकें। उन लोगों से, जिनके साथ ऐसी कोई बातचीत नहीं होती और न ही एक-दूसरे को नजदीक लाने वाला ऐसा कोई निजी अनुभव साझा किया जाता है, उनके साथ समय-समय पर ऐसी बातें होती रहनी चाहिए और अपने निजी अनुभव भी साझा किए जाने चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते, अगर आप दूसरों से नहीं खुलते तो फिर एक न एक दिन आपके पास सिर्फ परिचित लोग ही रह जाएँगे, मित्र नहीं।

जीवन में आने वाले व्यवधानों के कारण हो सकता है कि अपने बहुत करीबी मित्रों से आपका सम्पर्क टूट जाए। या जिनसे अब आपका सम्पर्क कम रह गया हो और सिर्फ कभी-कभी फोन पर या समय मिलने पर या जन्मदिन आदि समारोहों पर ही हो पाता हो। हो सकता है आप जीवन के किसी अन्य क्षेत्र में बहुत व्यस्त हो गए हों, आपके अनजाने ही यह दूरी पैदा हो गई हो।

समय निकालकर ऐसे लोगों से पुनः जुड़ने का प्रयास कीजिए, जिनके बारे में आप समझते हैं कि वे आपके करीबी मित्र थे और जिनकी निकटता की कमी आपको आज भी खलती है। अगर ऐसा न करने का कोई कारण दिखाई न दे और आप समझते हों कि उनके साथ अपने दिल की कई बातें साझा की जा सकती हैं, तो ऐसा अवश्य करें! उन लोगों के साथ मित्रता को गहरा करने की कोशिश कीजिए, जिनके साथ आपने ऐसा अनुभव नहीं किया है! कोशिश कीजिए, दिल खोलकर उनसे संपर्क बढ़ाइए। बस, शुरू कर दीजिए!

यह ज़रूरी है और हमें इसकी आवश्यकता है। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। गपशप और व्यर्थ चर्चाओं की तुलना में हम संपर्क की, गहरे समा जाने वाले प्रेम के स्पर्श की ज़रूरत को अनदेखा नहीं कर सकते। आप किसी भी गतिविधि में लगे हों, कोई भी व्यवसाय कर रहे हों या ज़्यादा से ज़्यादा काम करते हुए कितना भी पैसा कमाने की आप कोशिश कर रहे हों, आपको अन्य मनुष्यों से गहरे संपर्क की जरूरत पड़ती ही है।

अगर आपके वास्तविक मित्र हैं-भले ही वे बहुत थोड़े से हों- तो किसी भी दूसरी बात का उनसे ज़्यादा महत्व नहीं है। काम का नहीं, किसी भौतिक सुविधा का नहीं, पैसे का नहीं।

इसीलिए मैं अपने सभी मित्रों का आभारी हूँ। वे, जो मेरे दिल के करीब हैं, जिनके साथ मैं कभी-कभी संपर्क कर पाता हूँ और वे भी, जो अक्सर मेरे संपर्क में आते रहते हैं। जिनसे मैं बात करता हूँ भले ही इस देश में मुझे सिर्फ एक सप्ताह ही हुआ होता है और बात करने का ज़्यादा समय नहीं होता। जिनका घर हमारे आपसी प्रेम के लिए लिए हर वक़्त खुला हुआ है। और वे भी, जिनके लिए मैं हजारों मील उड़कर पहुँच जाना चाहता हूँ, सिर्फ उनके साथ कुछ समय बिताने के लिए।

Related posts

सोशल मीडिया मित्रों को वास्तविक जीवन में एक-दूसरे से मिलवाता है

यहाँ सब कुछ आभासी नहीं है: जब सोशल मीडिया मित्रों को वास्तविक जीवन में एक-दूसरे से मिलवाता है! 16 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे सोशल मीडिया के ज़रिए उन्हें अपने जीवन में कई तरह के लाभ प्राप्त ...
बात करने के लिए कभी-कभी आपको किसी दूरस्थ मित्र की ज़रूरत पड़ती है - 8 सितंबर 2015

बात करने के लिए कभी-कभी आपको किसी दूरस्थ मित्र की ज़रूरत पड़ती है – 8 सितंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने एक मित्र का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसने बात करने के लिए उन्हें फोन किया क्योंकि अपने ...
आप बिकनी पहनना ठीक नहीं समझते? मेरी पत्नी उन्हें बीच पर पहनती हैं! क्या हम अब भी दोस्त बने रह सकते हैं? 9 जून 2015

आप बिकनी पहनना ठीक नहीं समझते? मेरी पत्नी उन्हें बीच पर पहनती हैं! क्या हम अब भी दोस्त बने रह सकते हैं? 9 जून 2015

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि क्यों उन्हें उन लोगों के साथ घनिष्ठ होना कठिन लगता है, जो भारतीय संस्कृति ...
जब परिवर्तन मित्रों के बीच नज़दीकियाँ कम कर देते हैं - 8 जून 2015

जब परिवर्तन मित्रों के बीच नज़दीकियाँ कम कर देते हैं – 8 जून 2015

स्वामी बालेंदु अपने एक मित्र का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि कैसे उन्होंने महसूस किया कि मित्रता कम ...
अच्छे और बुरे, दोनों वक़्तों में, दोस्त दोस्त होते हैं - 4 दिसंबर 2014

अच्छे और बुरे, दोनों वक़्तों में, दोस्त दोस्त होते हैं – 4 दिसंबर 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे वे आजकल आश्रम आए हुए अपने दोस्तों के साथ बहुत व्यस्त हैं। ...
अलग-अलग आस्था रखने वाले मित्र - यह मित्रता कैसे निभ सकती है! 4 नवंबर 2014

अलग-अलग आस्था रखने वाले मित्र – यह मित्रता कैसे निभ सकती है! 4 नवंबर 2014

स्वामी बालेंदु विस्तार से बता रहे हैं कि वे कैसे धार्मिक मित्रों के साथ पटरी बिठा पाते हैं। सीधी सी ...
मैं जर्मनी क्यों आया? 10 सितंबर 2014

मैं जर्मनी क्यों आया? 10 सितंबर 2014

स्वामी बालेंदु इतने कम अंतराल के बाद ही परिवार सहित अपने जर्मनी प्रवास के कारणों पर प्रकाश डाल रहे हैं! ...
ज़ोर-ज़बरदस्ती मत कीजिए, परिवर्तन तभी होता है जब वह भीतर से निसृत होता है! 29 मई 2014

ज़ोर-ज़बरदस्ती मत कीजिए, परिवर्तन तभी होता है जब वह भीतर से निसृत होता है! 29 मई 2014

स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि क्यों अपने मित्र को न तो बदलने का प्रयास करना चाहिए और न ही ...
जब औपचारिकताओं की मित्रता बनाए रखना ठीक होता है! 28 मई 2014

जब औपचारिकताओं की मित्रता बनाए रखना ठीक होता है! 28 मई 2014

स्वामी बालेन्दु ऐसी मित्रता का वर्णन कर रहे हैं, जिसमें प्रेम को एक सीमा तक बनाए रखने के लिए औपचारिकता ...
जिन मित्रों से आप बिल्कुल सहमत नहीं हैं, उनके साथ प्रेम करना! 27 मई 2014

जिन मित्रों से आप बिल्कुल सहमत नहीं हैं, उनके साथ प्रेम करना! 27 मई 2014

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उन मित्रों के बीच भी आपस में प्रेम हो सकता है, जो बहुत ...

Leave a Reply