उस मित्रता का अंत कर दें, जो आपको सिर्फ थकाने का काम करती है- 26 सितंबर 2013

मित्र

जैसा कि मैंने कल लिखा था, आप अक्सर पाएंगे की आपकी मित्रताएँ जैसी हैं, वैसी ही ठीक हैं, भले ही वे वैसी नज़र नहीं आतीं, जैसी मुख्य धारा का मीडिया अच्छी मित्रता के बारे में प्रचारित करता है। लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि आपको लगे कि आपकी मित्रता गलत दिशा में जा रही है, कि आपका मित्र आपका अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, या कोई और मामला, जो आपके मन में उस मित्र के प्रति संदेह पैदा कर दे और आप सोचने लगें कि उसके साथ आगे मित्रता जारी रखना ठीक नहीं होगा। ऐसे मामलों में अक्सर हम मित्रता समाप्त करने में हिचकिचाते हैं। लेकिन अगर वह आपको तकलीफ दे रही है तो आपको समझना चाहिए कि उसे समाप्त करना उचित ही होगा!

मित्रता समाप्त करने का निर्णय लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब ज़ाहिरा तौर पर आपकी उस मित्र के साथ कोई लड़ाई न हुई हो या कोई ऐसा बिन्दु न हो, जिससे आपको लगे कि मित्रता तोड़ना ही ठीक है। इस बात का ध्यान रखें कि मैं जहां तक हो सके, मित्रता जारी रखने का पक्षधर रहा हूँ लेकिन ऐसा करते हुए एक बात लोग अक्सर भूल जाते हैं: मित्रता हमेशा दोनों के लिए पुष्टिकारक और मजबूती प्रदान करने वाली होनी चाहिए, थका देने वाली नहीं। न ही ऐसी कि आपका मन इस बात से परेशान हो जाए कि मित्र आपका लाभ उठा रहा है। अगर उसके साथ होने वाली हर मुलाक़ात के बाद आप ठगा सा महसूस करते हैं या आपके मन में यह बात आती है कि आप हर बार देते ही चले आ रहे हैं और बदले में आपको कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है तो निश्चित समझिए कि कुछ न कुछ गलत हो रहा है।

ऐसे वक़्त मैं हमेशा अपनी भावनाओं को मित्र के साथ साझा करके, मित्रता को बचाने की कोशिश करने की सलाह देता हूँ। अगर आपको लग रहा है कि आपका मित्र आपसे हमेशा कोई न कोई लाभ प्राप्त करता रहता है तो शालीनता के साथ, सीधे उससे बात करके, मामले को सुलझाने का प्रयास करें। अगर बात न बने और समस्या बनी ही रहती है तो उसे ओढ़े रहना व्यर्थ है। आपने सुलझाने का प्रयास किया लेकिन वह आपकी ऊर्जा और शक्ति नष्ट ही कर रही है, न कि उसमें इजाफा कर रही है, तो फिर उसे छोड़ देना ही उचित है।

लेकिन मित्रता तोड़ना एक चुनौती है! खासकर अगर वह लंबे समय से चली आ रही मित्रता है, साथ बिताए समय की बहुत सी सुखद स्मृतियाँ हैं और आप दोनों एक-दूसरे को बहुत करीब से जानते हैं। लेकिन अगर एक बार आपने मित्रता खत्म करने का निर्णय ले लिया है तो उसे परिणति तक पहुंचाएँ क्योंकि आपने अच्छी तरह से समझ लिया है कि वह आपके लिए लाभकारी नहीं है। आपको लगेगा कि इससे आपको बहुत दुख होगा लेकिन अक्सर आप पाएंगे कि अनुचित व्यवहार काफी समय चला और अच्छा हुआ कि अब मुक्ति मिल गई। शायद आप उन मित्रों के लिए पुलकित हो रहे थे, जो शुरू में थे न कि उनके लिए, जो अब आपके साथ हैं। इस दिशा में सोचने पर आप, इस घटना से अप्रभावित रहते हुए, बेहतर महसूस करेंगे।

जब मैं ऐसी मित्रता को समाप्त करने की बात करता हूँ तब मेरा मतलब यह नहीं होता कि आप वाद-विवाद शुरू कर दें या उसके साथ लड़े-झगड़ें या उसे इतना बड़ा मामला बना डालें कि ऐसा लगे जैसे आपके बीच कोई तीखा संघर्ष शुरू हो गया हो। यह आवश्यक नहीं है! मामले को बहुत तूल देने की ज़रूरत नहीं है-सिर्फ उस मित्र के साथ बिताए जाने वाले समय में धीरे-धीरे कटौती करते चले जाएँ और दूसरों के साथ ज़्यादा समय बिताएँ और अपने लिए भी अतिरिक्त समय निकालें। अपने आपको मुक्त छोड़ दें, कहीं जाकर पार्टी करें, थोड़ा सा अपने आप में रहें और महसूस करें कि उसके बगैर आपको कैसा लग रहा है-आप महसूस करेंगे कि दरअसल अच्छा ही लग रहा है।

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