सकारात्मक हूँ, अपने दोस्त गोविंद के साथ हुई दुर्घटना के बाद – 4 मार्च 13

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

मैं आगरा जाने के लिए तैयार हो रहा हूं। पिछले छह दिनों से मैं यही कर रहा हूं। मैं रोज सुबह उठता हूं, दैनिक काम निपटाता हूं और चल पड़ता हूं अस्पताल की तरफ अपने दोस्त गोविंद से मिलने।

गोविंद मेरा सबसे पुराना दोस्त है। हम दोनों नर्सरी स्कूल में साथ पढ़ने गए और चार साल की उम्र से लेकर आज तक यह दोस्ती कायम है। पिछले हफ्ते मंगलवार को उसका फोन पूर्णेंदु के पास आया तो मुझे धक्का सा लगा। रात को करीब आठ बजे के आसपास उसने फोन पर बताया कि दफ्तर से घर लौटते हुए उसके साथ दुर्घटना हो गई है। उसने कहा कि उसे अस्पताल ले जाने के लिए कार लेकर आ जाओ। हम लोग तुरंत घर से निकल पड़े। लेकिन जब पूर्णेंदु ने बताया कि गोविंद स्वयं फोन पर बात कर रहा था तो मेरी चिंता कुछ कम हो गई क्योंकि इसका मतलब था कि वह होश में था और बातचीत कर रहा था। पूर्णेंदु बता रहा था कि चोट लगने के तुरंत बाद ही गोविंद को पता चल गया था कि उसकी टांग की हड्डी टूट गई है।

उसने पूर्णेंदु को बता दिया था कि वह कहां पर है। अतः हम वहां पहुंचे। उसे उठाकर गाडी में डाला तो वह दर्द के मारे चीख पड़ा। हम उसे सीधे नज़दीक के अस्पताल ले गए। गोविंद ने बताया कि जिस टेंपो में वह सफर कर रहा था, उसे एक कार ने टक्कर मार दी। वह उछलकर टेंपो से बाहर जा पड़ा। ज़मीन पर गिरते ही उसे अहसास हो गया था कि उसके पैर की हड्डी टूट गई है। अस्पताल में हुए एक्स रे ने इस बात की पुष्टि कर दी कि उसके पैर की दो हडिडयां – टिबिआ और फिब्युला, पूरी तरह टूट गई हैं।

रात भर वह उसी पास के अस्पताल में रहा लेकिन अगले दिन हम उसे आगरा के एक बड़े अस्पताल में ले गए जहां अब उसकी सर्जरी होगी। डॉक्टर उसके पैर की सूजन उतरने का इंतज़ार कर रहे हैं। तब तक उसे दर्दनिवारक दवाएं दी जा रही हैं। इन दवाओं से कभी तो दर्द कम हो जाता है और कभी नहीं। जब दवा असर नहीं करती उस वक्त गोविद बहुत कराहता है।

तो यह कारण था कि मैं पिछले हफ्ते रोज आगरा जाता रहा। अमूमन मैं आश्रम से बाहर नहीं जाता हूं। इसी कारण सबको मेरा रोज बाहर जाना अजीब सा लग रहा था। लेकिन मुझे अपने प्रिय मित्र के लिए यह सब करना अच्छा लग रहा था। मुझे अच्छा लग रहा था कि ऐसे कष्ट के समय में मैं उसके साथ हूं, उसका ध्यान बदलने की कोशिश कर रहा हूं और लतीफे सुनाकर उसे हंसा रहा हूं।

यह एक बड़ी दुखद बात है कि गोविंद एक दुर्घटना का शिकार हुआ। लेकिन जो होना था, वह हो गया। अब हमें इस स्थिति का सामना करना है तो बेहतर होगा कि हम इसमें भी कुछ सकारात्मक देखने की कोशिश करें। हो सकता था कि कुछ इससे भी ज्यादा बुरा हो जाता!

वह यहां बिस्तर पर लेटा हुआ है, मैं इसमें भी कुछ फायदे देख रहा हूं: वह काम पर न जाकर आराम कर रहा है और आखिरकार हम दोनों को बतकही करने का कुछ तो वक़्त मिला। हालांकि वह हम दोनों वृंदावन में ही रहते हैं और वह काम पर बहुत दूर भी नहीं जाता, फिर भी हम दोनों बहुत कम समय के लिए मिल पाते हैं। वह सप्ताहांत में आता है तो बहुत सारे काम साथ में लाता है और कई बार बस थोड़ी देर बैठकर चला जाता है। लेकिन अब हम दुनिया जहान की बातें कर रहे हैं क्योंकि उसे कहीं जाना नहीं है।

दूसरा एक बड़ा फायदा जो हुआ है वह यह कि अब उसे पढ़ने के लिए थोड़ा वक़्त मिला है। गोविंद को पुस्तकें पढ़ने का बहुत शौक है लेकिन कभी इतना समय ही नहीं मिल पाया कि एक किताब में पूरी तरह डूब जाए। लेकिन अब जब तक वह अस्पताल में है और सर्जरी के बाद घर लौटने पर भी वह तुरंत काम पर नहीं जा पाएगा, तब उसके पास भरपूर समय होगा, किताबों को पूरी तरह चाटने का!

रोजाना आगरा जाना मेरे लिए भी फायदेमंद साबित हुआः घर से निकलने के थोड़ी देर बाद ही मुझे अपरा की याद सताने लगती है। साथ ही यह सोचकर अच्छा लगता है कि हमारे रहने और काम करने की स्थितियां कितनी अनुकूल और अद्भुत हैं! सामान्यतः मैं पूरे दिन आश्रम में रहता हूं और जब जी चाहे तब उसे देख सकता हूं। जब भी मन करता है, मैं अपनी डेस्क से उठकर जा सकता हूं अपने बच्चे के साथ खेलने के लिए। खुद को धन्य मानता हूं कि अपनी बेटी के साथ इतना वक़्त बिता पाता हूं! अकसर पूरे दिन मैं रमोना के साथ ही काम करता रहता हूं। जब मैं बाहर चला जाता हूं तो उसे भी मेरी अनुपस्थिति खलती है। लेकिन. . . . . इसका मतलब यह भी है कि जब मैं लौटकर वापिस घर आता हूं तो बहुत स्नेह और उल्लास के साथ मेरा स्वागत होता है!

एक दुर्घटना घटी, गोविंद अस्पताल में है, वह बड़ी परेशानी में है और सब यह कामना कर रहे हैं कि वह जल्दी स्वस्थ होकर घर वापिस आ जाए। लेकिन अच्छा तो ये हो कि हम इस नकारात्मक घटना के भी कुछ सकारात्मक परिणाम देखें तो अंततः हम कह सकें कि सब कुछ ठीक है|