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गुरुओं के साथ आप अक्सर देखोगे कि बड़े या छोटे समूहों में लोग बैठे हैं इस आस में कि हमें कुछ वचनामृत सुनने को मिलेंगे और आशीर्वाद मिलेगा. इसी प्रकार के अनुयायी और शिष्यों के विषय में स्वामी बालेन्दु यहाँ अपने ब्लॉग में लिखते हैं

भारत की प्राचीन गुरु परम्परा के आधुनिक संस्करण के विषय में यहाँ आप स्वामी बालेन्दु की मजाकिया और आलोचनात्मक दृष्टि को आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

उनका सन्देश यह है कि आप अपनी जिम्मेदारी स्वयं लें और किसी के हाथ की कठपुतली न बनें, और भेड़ की तरह किसी के पीछे न लगें.

भक्तों की दुविधा: गुरु के अपराधों को जानते हैं मगर मानते नहीं- 11 सितंबर 2013

अनुयायी

स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि जब किसी गुरु के गुनाहों की पोल खुल जाती है तब उसके चेलों की क्या हालत होती है: जानते हैं कि गुरु दोषी है मगर मान नहीं पाते!

गुरु की वासना-शांति के लिए लड़कियां मुहैया कराना, आँख मूंदकर उसके अपराध के भागीदार बनना-10 सितंबर 2013

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स्वामी बालेंदु आसाराम के कट्टर अनुयायियों के बारे में बता रहे हैं जो अपने गुरु को खुश करने के लिए बड़ा से बड़ा अपराध करने से भी नहीं झिझकते।

आसाराम द्वारा प्रताड़ित लड़की के पिता को रिश्वत का प्रयास, मारने की धमकी के बावजूद सराहनीय है मजबूती-9 सितंबर 13

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स्वामी बालेंदु आसाराम द्वारा प्रताड़ित लड़की के पिता की स्थिति की विवेचना कर रहे हैं। वे किसी पर भी विश्वास करने के काबिल नहीं रह गए हैं

आपने समय व्यर्थ नहीं किया भले ही आप फ़र्जी गुरुओं में विश्वास करते थे – 13 Oct 11

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स्वामी बालेन्दु उन भूतपूर्व शिष्यों के विषय में लिखते हैं जो यह सोचते हैं कि हमने फर्जी गुरुओं या मान्यताओं के पीछे अपना बहुत समय बर्बाद किया|

आस्था समाप्त होने पर धर्म का व्यवसाय मत करो – ईमानदार बनो – 12 अक्तूबर 2011

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स्वामी बालेन्दु उन लोगों की बात लिखते हैं जो कि विश्वास समाप्त हो जाने पर भी धर्म का धंधा नहीं छोड़ते क्योंकि उससे उन्हें लाभ हो रहा है|

सेलिब्रिटी अनुयायी – अपने गुरु के लिये मुफ़्त का विज्ञापन और लोकप्रियता – 15 जून 2011

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स्वामी बालेन्दु उन सेलिब्रिटी शिष्यों के विषय में लिखते हैं जो अपने गुरु की प्रसिद्धी का कारण बनते हैं|