भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं के काल्पनिक डर से कैसे निपटें! 17 फरवरी 2014

भय

पिछले सप्ताह कार्पोरेट दुनिया से जुड़े लोगों में पाए जाने वाले तनावों और परेशानियों का ज़िक्र करते हुए मुझे हाल ही में आश्रम आए एक मेहमान से हुई चर्चा का स्मरण हो आया। उसने मुझे बताया कि वह न सिर्फ अपने काम को लेकर बहुत तनाव और परेशानी महसूस करने लगा था बल्कि यह सोचकर भी कि उसका यह काम कभी भी छूट सकता है। दरअसल उसकी सबसे बड़ी परेशानी तो यह आशंका ही थी कि कल को अगर उसे नौकरी से निकाल दिया जाए तो क्या होगा? अगर मेरा काम छूट जाए तो मैं क्या करूंगा?

इस व्यक्ति के पास एक बहुत अच्छी नौकरी है, अच्छा वेतन है, उस नौकरी के साथ उपलब्ध हर तरह की सुविधाएं भी हैं और सब कुछ बढ़िया चल रहा है। कोई स्पष्ट कारण नहीं है कि उसे किसी तरह की आशंका हो, उसके बॉस की तरफ से कोई इशारा नहीं है, सहकर्मियों की ओर से कोई खबर या अफवाह नहीं है। हर चीज़ सुचारु रूप से चलती दिखाई दे रही है लेकिन फिर भी एक विचार है, एक आशंका और डर है कि कुछ भी हो सकता है, कि अचानक वह अपने रोजगार से हाथ धो सकता है!

उन्हें मेरा जवाब यह था कि यह बात ठीक है कि कभी भी, कुछ भी हो सकता है। आप भविष्य के बारे में कुछ भी नहीं जान सकते और इस तरह जिन घटनाओं के होने का आप अनुमान लगाते हैं वह आपके मन का फितूर होता है, महज एक काल्पनिक कहानी! वह हो नहीं रहा है, होने नहीं जा रहा है लेकिन आप कुछ भी बुरा होने की छोटी से छोटी संभावना के विषय में सोचते भर रहते हैं।

यह एक पुरानी सलाह है, जो मैं आपको देना चाहता हूँ लेकिन यह बहुत कारगर है: भविष्य के बारे में सोच-सोचकर परेशान होने के स्थान पर वर्तमान में रहिए। भविष्य अभी आपके सामने उपस्थित नहीं हुआ है!

भविष्य के बारे में परेशान होते रहने के कारण वर्तमान जीवन आपसे छूटा जा रहा है। नौकरी में अपना सर्वोत्तम देने की जगह आप उसमें गलतियाँ भी कर सकते हैं क्योंकि भविष्य को लेकर आप इतने बेचैन और चिंतित हैं! आप अपने काम में सम्पूर्ण एकाग्र नहीं हो पाते और इस तरह जितना काम आप कर सकते हैं, जितना काम आपको करना चाहिए उतना आप कर ही नहीं पा रहे हैं।

मान लीजिए ऐसा कुछ हो ही जाता है और आप अपनी नौकरी खो बैठते हैं तो भी आप यह क्यों नहीं सोचते कि शायद इसमें भी कुछ अच्छा ही छिपा हो? आप यह क्यों नहीं सोचते कि ऐसा होने पर हो सकता है, आपको कुछ बड़ा और इससे बेहतर करने का मौका मिल जाए? आप भविष्य के विषय में ही क्यों सोचते हैं और जब सोचते हैं तो सिर्फ नकारात्मक ही क्यों सोचते हैं? इस बात को समझिए कि वह परिदृश्य सिर्फ आपकी कल्पना मात्र है, एक कहानी, जो आपने अपने लिए गढ़ ली है!

मैं इससे मिलता-जुलता और ‘भावी काल्पनिक डर’ से सम्बद्ध एक और प्रकरण आपके सामने रखता हूँ: एक आदमी कहता है कि उसके पास कई साल से एक मोटर साइकल है और उसे चलाने में उसे हमेशा बड़ा आनंद आता रहा है मगर पिछले कुछ सप्ताह से अचानक उसके मन में यह डर बैठ गया है कि इस मोटर साइकल की सवारी करने पर उसके साथ कोई दुर्घटना हो सकती है! अतीत में मोटर साइकल से कोई दुर्घटना नहीं हुई है, आज तक वह उस पर से फिसला तक नहीं है लेकिन अब वह उस पर सवारी करते हुए यह सोच-सोचकर बेचैनी से भर उठता है कि कुछ न कुछ बुरा हो सकता है।

यह सब काल्पनिक बातें हैं लेकिन फिर भी मैं आपको यह सलाह नहीं दूंगा कि मोटर साइकल की सवारी के डर के बावजूद आप उसकी सवारी करें ही लेकिन इतना अवश्य कहूँगा कि अपने भीतरी के संतुलन पर तवज्जो दें, उसे बेहतर बनाएँ और आत्मविश्वास प्राप्त करें और उसके बाद पुनः सामान्य हो जाएँ।

वर्तमान में जियें, इस क्षण का पूरा आनंद उठाएँ और प्रसन्न रहें। शारीरिक व्यायाम करें, स्वास्थ्यवर्धक भोजन करें और अपने मस्तिष्क को शांति और खुशी प्राप्त करने का मौका दें। एक बार आप मानसिक शांति की उस अवस्था को पा लेंगे तो फिर ये काल्पनिक डर अपनी दहशत खो देंगे। आप ऐसी कल्पनाओं को हंसी में उड़ा सकेंगे क्योंकि आप जान चुके होंगे कि इस वक़्त आप पूरी तरह सुरक्षित हैं।

आशंकाओं को अपने ऊपर हावी न होने दें बल्कि जितना इस क्षण आप स्थिर, शांत और प्रसन्न हैं उससे अधिक मानसिक स्थिरता, शांति और प्रसन्नता प्राप्त करने में उन आशंकाओं का उपयोग करें!

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