ग्रान कनारिया में सुखद पारिवारिक जीवन – 1 जुलाई 2014

परिवार

मैंने आपको ग्राम कनारिया और यूरोप की मुख्य भूमि पर लोगों के जीवन के बीच मौजूद उन भिन्नताओं के बारे में बताना शुरू किया था, जिन्हें मैंने वहाँ रहते हुए नोटिस किया। छुट्टियाँ बिताने के तरीकों के अतिरिक्त जीवन के एक और पहलू पर कनारियावासी अलग तरह का नजरिया रखते हैं: उनका परिवार- एक तरफ यूरोप के अधिकतर इलाकों में जब परिवार के बारे में बात की जाती है तो लोग उसमें माँ, बाप और उनके बच्चों को शामिल करते हैं जबकि ग्रान कनारिया इस मामले में भारत के सम्मिलित परिवारों के ज़्यादा नजदीक है। कुल मिलाकर वहाँ लोग आपस में ज़्यादा जुड़े नज़र आते हैं और व्यक्तियों पर ज़्यादा केन्द्रित नहीं रहते।

इसका सबसे पहला प्रमाण तो मुझे मेरी मित्र बेट्टी की तरफ से ही मिला। लेकिन नहीं, मैं सिर्फ इतना जानता था कि वह एक फ़्लैट में रहती है, जो उसकी माँ के घर का ही हिस्सा है और उसके दादा-दादी पड़ोस में ही रहते हैं। यह अपने आप में ज़ाहिर कर देता था कि उसका परिवार आपस में एक-दूसरे से काफी जुड़ा हुआ है। हालांकि पश्चिमी देशों में यह सामान्य बात नहीं है, फिर भी मेरे कुछ मित्र हैं, जो अपने माता-पिता और परिवार के साथ नजदीकी को तरजीह देते हैं। लेकिन इसे मैंने सदा एक अपवाद की तरह समझा है और जब हम ग्रान कनारिया आए, लोगों से बात की, उनकी आपसी बातें सुनी और देखा कि परिवार में उनका जीवन कैसा है तो मैंने जाना कि इस छोटे से द्वीप के लोगों ने उन परंपराओं को जतन से संभाले रखा है, जिसे मैं बहुत महत्व देता हूँ: अर्थात, यह संभावना कि परिवार के सदस्यों के बीच आज भी आपसी निकटता कायम रखी जा सकती है! वे सभी अपने चाचा-चाचिओं और चचेरे भाई-बहनों को जानते हैं, वे अपने माता-पिता और दादा-दादी से अक्सर मिलते-जुलते रहते हैं और सबसे बढ़कर, वे एक-दूसरे की परवाह करते हैं। और यह औपचारिकता के कारण नहीं बल्कि उनके मन में परिवार की महत्ता के एहसास के चलते है!

अपने तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए हम टेनेरिफ गए थे। एक रात को ‘सान जुआन’ नामक त्योहार पर एक तरह का समारोह आयोजित किया गया था और जिस व्यक्ति ने टेनेरिफ में हमारा कार्यक्रम आयोजित किया था उसने हमें अपने गाँव आने का न्योता दिया। परंपरा यह है कि लोग समुद्र किनारे बहुत बड़ी आग जलाते हैं मगर शायद इससे होने वाले नुकसान और जोखिम को देखते हुए अब इस पर रोक लगा दी गई है। लेकिन गाँव वाले इसकी ज़्यादा परवाह नहीं करते। हम लोग समुद्र किनारे आए, जहां काली चट्टानें समुद्र तक चली गई हैं और देखा कि कुछ लोग पानी में उतरकर देर रात की तैराकी का मज़ा ले रहे हैं और कुछ लोग आग जलाकर उसके चारों ओर बैठे हैं। वैसे तो वह एक जलती हुई आलमारी थी मगर बेट्टी ने बताया कि बचपन में वे लोग घर-घर जाकर लकड़ी का कबाड़ इकट्ठा किया करते थे, जिसे लाकर इस आग में जलाया जाता था। तो यहाँ आग जलाकर बहुत से लोग बैठे हैं, जवान और बूढ़े सभी। इस सारे माहौल को बहुत आत्मीय और सुंदर कहा जा सकता था: एक द्वीपीय गाँव, समुद्र किनारे बैठे कई परिवार और समुद्र में तैरते लोग, आपस में गपशप करते, खाते-पीते, हँसते-खेलते!

यह आपसी मेल-मिलाप, प्रेम और भाईचारे का एहसास कराता है और आप यह देखकर खुश होते हैं कि यहाँ लोग आज भी कितना मिलजुलकर रहते हैं। कि पारिवारिक बंधनों को आज भी महत्व दिया जा रहा है और बहुत से पश्चिमी देशों की तुलना में यहाँ इन सम्बन्धों को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मैं स्पैनिश बिल्कुल नहीं जानता मगर रमोना जानती है और उसने बताया कि इन तीन हफ्तों में शुरू में तो उसे यह सब बड़ा अजीबोगरीब लगता रहा लेकिन फिर जब वह पास के बाज़ार में फल खरीदने जाती और वहाँ का बुजुर्ग दुकानदार उसे ‘माई नीना’ कहकर संबोधित करता तो वह बड़ी खुश होती। ‘माई नीना’ का अर्थ होता है ‘मेरी बेटी’- क्या आपको नहीं लगता कि इतने स्नेहिल सम्बोधन को अजनबियों के लिए इस्तेमाल करके वे उन्हें पूरी तरह अपना बना लेते हैं? लेकिन यह तो भारत से मिलता-जुलता है- यही तो हम करते हैं जब किसी अजनबी से मिलते हैं और उसकी उम्र के हिसाब से या जिस हैसियत से हम उससे मिल रहे हैं, उस लिहाज से उसे संबोधित करते हैं। इस तरह कोई भी आपका भाई, चाचा, बेटी या माँ बन जाता है। इन संबोधनों से हम ज़ाहिर करते हैं कि हमें सामने वाले की उतनी ही परवाह है, जितनी हम अपने परिवार के इन सदस्यों की करते हैं!

तो मुझसे यह न कहें कि यह कोई ऐसी बात है, जो सिर्फ इस द्वीप पर ही संभव है। हम दूसरों की परवाह कर सकते हैं। हमें करना चाहिए। और अगर हम ऐसा करेंगे तो बदले में हमारा प्रेम और हमारी खुशी हज़ार गुना बढ़कर हमें प्राप्त होगी।

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