भरोसा करना अच्छी बात है – मगर अपने शक पर भी भरोसा करें – 16 नवंबर 2015

अक्सर मैं लोगों से कहता हूँ कि उन्हें दूसरों पर भरोसा करने की क्षमता बढ़ानी चाहिए। लोगों से मिलते समय शुरू से उनके प्रति नकारात्मक रवैया रखना ठीक नहीं। लेकिन कुछ परिस्थितियों में समुचित जाँच किए बगैर कि सामने वाला झूठा इंसान या फ्रॉड तो नहीं, भरोसा नहीं करना चाहिए। अधिकतर मामलों में ऐसी स्थिति पैसों के संबंध में पेश आती है। अगर आपके सामने ऐसी परिस्थितियाँ आती रहती हैं, जहाँ आपको सामने वाले पर शक होता है कि वह भला व्यक्ति है या चालबाज़ (फ्रॉड) तो आज का ब्लॉग पढ़ना आपके लिए उपयोगी होगा।

सर्वप्रथम, इस बात का ध्यान रखें कि सामने वाले के पहनावे, चाल-ढाल और रहन-सहन से कतई प्रभावित न हों। हो सकता है कि वह बड़ी सी कार में घूमता-फिरता हो, डिज़ाइनर कपड़े पहनता हो और नवीनतम आईफोन लेकर चलता हो-लेकिन ये बातें उसे ईमानदार या भला व्यक्ति सिद्ध नहीं करतीं! कोई व्यक्ति जितना बड़ा चालबाज़ (फ्रॉड) होगा उतना ही उसका पहनावा, एक्सेसरीज़ और रहन-सहन भड़कीला होगा। पहुँचे हुए चालबाज़, छलछद्मी और धोखेबाज़ लोग प्रभावित करने वाले हर तरह के औज़ारों से लैस होते हैं और अक्सर यह सिद्ध करने में कामयाब हो जाते हैं कि वे वास्तव में बड़े भले और सत्यनिष्ठ व्यक्ति हैं।

दूसरा बिंदु है: झूठे और बेईमान लोग लगभग हमेशा ज़्यादा बोलते हैं। और इसी एक बात से आप अक्सर समझ सकते हैं कि वे और कुछ भी हो सकते हैं मगर ईमानदार नहीं! सिर्फ उस व्यक्ति की बातें ध्यान से सुनें: अगर झूठा इंसान होगा तो वह दो मिनट पहले कही अपनी ही बात भूल चुका होगा। बस वह लगातार बात करता रहेगा और अपनी ही पिछली बात का खंडन करती हुई बात कहेगा-ज़ाहिर है, बार-बार आपसे कोई न कोई झूठी बात कह रहा होगा। आदतन झूठ बोलने वालों को इस बात का एहसास ही नहीं होता कि अभी-अभी वे क्या कह चुके हैं क्योंकि वे इतना अधिक झूठ बोलते हैं कि वे अपने सारे झूठे वचनों को याद ही नहीं रख सकते। इसलिए अगर आप कुछ देर शान्त बैठे रहें तो उसी वक़्त आपको पता चल जाएगा कि वह झूठ बोल रहा है।

अंत में, इन बातों का यह अर्थ नहीं है कि आप जिस मामले में चर्चा कर रहे हैं, अनिवार्य रूप से उस मामले में भी वह चालबाज़ी कर रहा हो। लेकिन अब हम उस बिंदु पर बात करते हैं, जहाँ मामला पैसे से संबंधित होता है: उस व्यक्ति पर कतई भरोसा न करें, जो कहे- 'तुम मुझ पर भरोसा कर सकते हो, मुझे पैसे दे दो'। उसके बाद अगर आप साफ़ शब्दों में यह कह दें कि आप उसे नहीं जानते और इसलिए उस पर भरोसा नहीं कर सकते तो जवाब में वह कह सकता है, 'अगर आप मुझ पर भरोसा नहीं कर सकते तो हम साथ में काम नहीं कर सकते!' बस, इसी बिंदु पर वह धोखेबाज़ रफूचक्कर हो जाएगा।

इससे हमें यह शिक्षा मिलती है: कभी-कभी शक सही निकलते हैं। अगर आपके मन में किसी व्यक्ति के प्रति किसी प्रकार का शकोशुबहा है तो उसे व्यक्त करने में कतई संकोच न करें! अगर वह गंभीर है, ईमानदार है तो हर तरह के प्रयास करके अपनी नेकनीयती सिद्ध करेगा और अंततः आपका विश्वास हासिल कर लेगा। सिर्फ चालबाज़ और मक्कार ही भाग जाएँगे!

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