श्री श्री रविशंकर कहते हैं मोबाइल फोन चार्ज करें उनकी तस्वीर के सामने रखकर – 18 फरवरी 13

मिथ्या

हाल ही में मैंने इंटरनेट पर एक लेख पढ़ा। इस लेख पर अपने विचार आज की डायरी में लिख रहा हूं। यह लेख भारत के सर्वाधिक चर्चित धर्मगुरुओं में से एक श्री श्री रविशंकर के साथ साक्षात्कार की शक्ल में हैं। श्री श्री रविशंकर ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन‘ के संस्थापक और प्रमुख हैं। मैं समझता हूं कि मेरे अधिकांश पाठकों ने उनके विषय में सुन रखा होगा। यदि नहीं तो ‘गूगल’ करें और उनके बारे में सारी जानकारी आपको मिल जाएगी। उन्हें प्रसिद्धि मिली एक प्रकार के प्राणायाम की शिक्षा देकर जिसे उन्होंने ‘सुदर्शन क्रिया‘ का नाम दिया है। उनका संस्थान योग और ध्यान की शिक्षा भी देता है। दुनियाभर में उनके केंद्र हैं और वह अपने अनुयायियों के परम पूज्य गुरु हैं।

जो लेख मैंने उनकी वेबसाइट पर पढ़ा उसकी शुरुआत होती है उनके ही एक अनुयायी के इस प्रश्न से :

“अनेकों घटनाएं इस बात की साक्षी हैं कि आप सर्वव्यापी और सर्वज्ञ हैं। मुझे डर लगता है कि आप मेरी सभी ग़लतियों के बारे में जानते हैं।मेरी ग़लतियों के बारे में आपका क्या कहना है? क्या आप नाराज़ होते हैं जब मैं वही ग़लतियां बार – बार दोहराता हूं?”

आपने सुना होगा कि किसी भी पंथ या संप्रदाय के अंधे अनुयायी कुछ इसी प्रकार के प्रश्न अपने गुरुओं से पूछते हैं। वे इन सर्वज्ञ गुरु से किस कदर खौफ खाते हैं, यह उपरोक्त प्रश्न में साफ – साफ दिखाई देता है। सोचिए , गुरु का उत्तर क्या होगा? गुरु परले दरजे का बेवकूफ तो है नहीं जो यह कहेगा वह ‘सर्वव्यापी और सर्वज्ञ‘ नहीं है। आखिरकार भक्तों के दिलों में उसकी नकली और ओढ़ी हुई क्षमताओं का यह खौफ और विस्मय ही तो गुरु को शक्तिशाली बनाता है और उनके जीवन में कदम – कदम पर गुरु की उपस्थिति को अपरिहार्य बना देता है। गुरु जानता है कि कि भक्तों के दिलों में यह भ्रम बना रहना चाहिए कि गुरुजी सर्वज्ञ है और सब कुछ करने में सक्षम हैं। गुरु की महिमा में चार चांद लग जाएं यदि गुरु की करामाती शक्तियों की मनगढ़ंत कहानियों से यह खौफ और अधिक पुख्ता हो जाए ! बस , यही काम श्री श्री रविशंकर कर रहे हैं।

श्री श्री कहते हैं कि वह भक्तों की ग़लतियों की तरफ ध्यान नहीं देते हैं। वे तो यहां तक कहते हैं कि उनके भक्त उनसे ज्यादा शक्तिशाली हैं। एक बार वह एक ऐसे गांव में जा रहे थे जहां वह पहले कभी नहीं गए थे। उन्हें महसूस हुआ कि वहां मौजूद तीन लोगों के मोबाइल फोन खो गए हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान पूछा किस किस के मोबाइल फोन खो गए हैं। ठीक तीन लोग खड़े हो गए और उन्होंने उन तीनों को तीन मोबाइल फोन प्रदान किए, जो ‘अंतर्यामी‘ गुरुजी अपने साथ लाए थे। वह यह भी जानते थे कि एक महिला कल रातभर उनकी तस्वीर के सामने बैठकर रोती रही थी।

एक दिन एक लड़के ने श्री श्री को अपनी कहानी सुनाई। कहानी यूं थी कि उस लड़के का मोबाइल फोन खो गया था करीब डेढ़ साल पहले। तो उसने अपने फोन को बैटरी सहित गुरुजी की फोटो के सामने रख दिया – आश्चर्यजनक रुप से फोन रात भर में चार्ज हो गया! अब आगे सुनिए :

“ इस लड़के ने मुझे अपना फोन दिखाया और बोला, “देखिए , डेढ़ साल से मैंने चार्जर फेंक दिया है और अब मैं अपना फोन आपकी तस्वीर के सामने रख देता हूं और यह चार्ज हो जाता है। ‘ उस लड़के ने अपना चार्जर फेंक दिया ! मैंने कहा, “ वास्तव में कोई बात तो है। मुझे भी अपना फोन चार्ज करने के लिए चार्जर की ज़रूरत पड़ती है और मेरा भक्त मेरी तस्वीर के सामने रखकर अपना फोन चार्ज कर लेता है। ‘ देखिए कितने शक्तिसंपन्न हैं मेरे भक्त “

अपने भक्त की शक्ति से खुद सर्वज्ञ गुरु भी हैरान हैं!

इस कहानी में श्री श्री रविशंकर अपने भक्त का मखौल नहीं उड़ा रहे है। वह बड़ी चतुराई से भक्तों को यह महसूस करा रहे हैं कि भक्त शक्तिसंपन्न हैं जबकि सच्चाई यह है कि वे सब पूरी तरह गुरुजी के अधीन हैं। गुरु को चार्जर चाहिए फोन चार्ज करने के लिए और चेलों का चार्जर है गुरु की तस्वीर ! वाह , क्या जादुई शक्ति है!

अब मुझे बताइए कि श्री श्री उन नकली गुरुओं से किस प्रकार भिन्न हैं जो चमत्कारी शक्तियों से संपन्न होने का दिखावा करके लोगों को ठगते हैं? एक निर्मल बाबा हैं जो अपनी ‘किरपा‘ बरसाने का दावा करते हैं लेकिन तब जब आप समोसे खाएंगें, सत्य साईं बाबा शून्य में से सोने के अंडे पैदा किया करते थे, श्री श्री रविशंकर के अपने गुरु महर्षि महेश योगी लोगों से कहा करते थे कि यदि वे उनके बताए हुए तरीके से ध्यान करें तो वे हवा में उड़ सकते हैं। जनता का बेवकूफ बनाने के लिए ये सभी जादूगरी का सहारा लेते थे। मज़े की बात तो यह है कि श्री श्री रविशंकर कभी यह नहीं बताते कि वह स्वयं महर्षि महेश योगी के शिष्य हैं – वह खुद को अपने गुरु की ‘उड़ने वाली ध्यान पद्धति‘ से संबद्ध नहीं करना चाहते शायद।

श्री श्री रविशंकर अन्य गुरुओं से किसी भी मायने में भिन्न नहीं हैं। लोग उनकी लुभावनी बातों से, गुरुजी के अन्य अंधभक्तों की मनघड़ंत कहानियों और श्री श्री के विशाल संगठन तथा उसकी सफलता के झांसे में आ जाते हैं।

अगर आपको मेरी बातों पर विश्वास नहीं है तो उनकी तस्वीर का एक प्रिंट आउट निकालिए और अपना फोन उसके सामने चार्ज होने के लिए रख दीजिए। चार्ज हुआ क्या आपका फोन?

हम इस ‘नकली गुरु’ की वेबसाइट से लिंक नहीं होना चाहते परंतु यदि आप इनकी कहानी स्वयं पढ़ना चाहते हैं तो निम्न URL को कॉपी करके अपने ब्राउज़र में पेस्ट करे : http://www.artofliving.org/love-can-even-make-stones-melt

अपडेट:  इस लेख के बाद रविशंकर और उनकी संस्था ने ऊपर दिए गए URL में से इस लेख को हटा दिया, हमें ये पता था, परन्तु हमारे पास उसका स्क्रीनशॉट मौजूद है, और आप उसे नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर के पढ़ सकते हैं|

http://www.jaisiyaram.com/ravishankar-web.htm

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