श्री श्री रविशंकर ने बिना समय गंवाए हटा दी अपनी चमत्कारी शक्तियों की कहानी – 19 फरवरी 13

मिथ्या

आज फिर एक नया दिन, डायरी के एक नए पन्ने के साथ। साथ ही प्रस्तुत है कल की डायरी में श्री श्री रविशंकर के पाखंड को बेपर्दा करने की मेरी मुहिम से पैदा हुई हलचल की रिपोर्ट। कल मैंने अपनी डायरी में लिखा था कि मैंने श्री श्री की फाउंडेशन ‘आर्ट ऑफ लिविंग‘ की अधिकारिक वेबसाइट पर एक स्टोरी पढ़ी थी जिसमें वे यह दावा कर रहे थे कि उनके भक्त, मात्र उनकी तस्वीर के सामने अपना मोबाइल रखकर उसे चार्ज कर लेते हैं। आज मेरे ब्राउज़र ने स्वतः उसी पेज को खोला क्योंकि मैंने उसे कल इसी सैटिंग में रख छोड़ा था। देखा तो पाया कि उन्होंने उस पूरे पेज को ही मिटा दिया है। अब वहां यह संदेश लिखा हुआ है ‘आप इस पेज पर जाने के लिए अधिकृत नहीं हैं|‘

आप लोगों में से जो कोई भी इस पेज को नहीं पढ़ पाए थे उनकी सुविधा के लिए बता दूं कि हमने इसका एक स्क्रीन शॉट ले लिया था। निम्नलिखित लिंक पर क्लिक करेंगें तो जो नई विंडो खुलेगी उसमें आप सारी कहानी स्वयं पढ़ सकते हैं :

http://www.jaisiyaram.com/ravishankar-web.htm

यदि एक बार कोई विषयसामग्री इंटरनेट पर आ जाती है तो उसे वहां से हटा पाना मुश्किल होता है, खासकर तब जबकि हजारों लोगों का ध्यान इसकी तरफ आकर्षित हो चुका हो। हमेशा की तरह मैंने कल दोपहर भी अपनी डायरी पोस्ट की और फेसबुक पर अपने पेज पर भी इसे साझा किया। देखते ही देखते यह बात इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गई। जाहिर था श्री श्री रविशंकर तक भी जा पहुंची। उन्होंने ने बिना वक़्त गंवाए उस स्टोरी को वहां से मिटा दिया। मेरी कही हुई बातों के सुबूत मिटाने के लिए उन्होंन यह सब किया। ऑनलाइन हुए किसी भी घटनाक्रम का सुबूत आधुनिक संचार माध्यम बड़ी आसानी से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं। और सुबूत के तौर पर उपरोक्त लिंक आप देख सकते हैं।

सच तो यह है कि मुझे श्री श्री रविशंकर की वेबसाइट पर अंधविश्वास फैलाने वाला ऐसा लेख मिलने की उम्मीद नहीं थी क्योंकि अब तक मेरे दिमाग पर यह छाप थी कि वह अपनी एक अलग छवि प्रस्तुत करना चाहते थे। मुझे यह भी लगता था कि वह दुनिया को यह बताना चाहते थे वह अन्य गुरुओं की तरह पाखंडी नहीं है जो भक्तों को लुभाने के लिए चमत्कार दिखाते हैं और दावा करते हैं कि वह “सर्वज्ञ और सर्वव्यापी“ हैं। मेरे पर्दाफाश करने के बाद श्री श्री और उनकी टीम ने उस लेख को मिटाने का जो फैसला लिया उसके पीछे सच्चाई यह है कि वे यह जानते हैं कि यह कहानी ग़लत है। वे जानते हैं कि यह बात संभव नहीं है, महज़ एक कल्पना है, लोगों को प्रभावित करने के लिए रची गई मनगढ़ंत कहानी है।

वह स्वयं कहते हैं कि यह भारत के एक ग्रामीण हिस्से की कहानी है जहां लोग निहायत अंधविश्वासी हैं, जहां लोगों की सोच वैज्ञानिक नहीं है जो कहानी को तर्क की कसौटी पर कस सके। गांवों के लोग इतने भोले – भाले और धार्मिक हैं कि बिना सोचे – समझे ऐसे पाखंडी गुरुओं का अनुसरण करने लगते हैं जो उन्हें अपनी तथाकथित चमत्कारी शक्तियों का प्रदर्शन करके बरगलाते हैं। भक्तों को अपने से ज्यादा शक्तिसम्पन्न बताकर दरअसल वह उन्हें एक तरह का प्रलोभन दे रहे हैं ताकि उनके दिलों में भी ऐसी शक्तियां अर्जित करने का लालच पैदा हो।

अपनी शक्तियों का झूठा प्रचार करके न जाने अब तक वह कितने लोगों को अपने जाल में फंसा चुके होंगें, उन्हें धोखा दे चुके होंगें। इससे पहले कि लोग उनकी बताई हुई योग क्रियाओं के हुए फायदों को गिनाते हुए मुझे अपने कॉमेंट्स भेजने लगें, मैं आपको एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि योग, ध्यान और प्राणायाम के फायदों के बारे में मुझे किसी प्रकार का कोई शुबहा नहीं है। हां, मैं इस बात में विश्वास नहीं करता हूं कि कोई पाखंडी गुरु लोगों को अपनी शक्तियों की झूठी कहानियां सुनाकर उनका का भला कर सकता है या लोग उसके भक्त बनकर चमत्कारी शक्तियों को प्राप्त कर सकते हैं।

मेरी डायरी को पढ़ने वाले सभी से मैं यह अपील करना चाहता हूं कि इस एक उदाहरण से आप यह समझ सकते हैं कि इस जैसे गुरु अपने कहे शब्दों को वापिस लेने में एक सेकंड भी नहीं लगाते। आज एक बात कहते हैं तो कल दूसरी। वे ईमानदार नहीं हैं, किसी प्रकार की चमत्कारी शक्तियां उनके पास नहीं हैं और न ही ये कोई प्रबुद्ध आत्माएं हैं। ये आपकी सहायता नहीं करना चाहते। ये आपका पैसा हथियाना चाहते हैं, आपको बेवकूफ बनाना चाहते हैं और चाहते हैं कि आप सदा के लिए उन पर आश्रित हो जाएं। इनके जाल में न फंसें। अपने जीवन की जिम्मेदारी स्वयं संभालें और इस तरह के पाखंडी गुरुओं से दूरी बनाए रखकर अपना जीवन खुशहाल बनाएं।

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