ऑनलाइन संसार – कितना झूठा, कितना सच्चा? 15 दिसंबर 2015

मिथ्या

कल मैंने लिखा था कि सोशल मीडिया को आप अपना दूसरा यथार्थ न बनने दें। क्योंकि अंततः वह झूठी दुनिया ही सिद्ध होता है! सोशल मीडिया पर दूसरों की टिप्पणियाँ पढ़ते हुए और तब भी जब आप खुद कुछ लिख रहे हैं या अपनी पढ़ी हुई कोई टिप्पणी साझा कर रहे हैं, इस बात को सदा याद रखें।

आपके लिए यह याद रखना आवश्यक है कि इंटरनेट पर कोई भी कुछ भी लिख सकता है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि सभी लोग झूठ ही लिखते हैं मगर लोगों के लिए किसी भी बात को वास्तविकता से अधिक उजला दिखाना आसान होता है! कुछ शब्दों के हेर-फेर से एक उत्कृष्ट दिन साल का सर्वोत्कृष्ट दिन बन जाता है। कोई फोटो आपके मन में अपने प्रिय साथी के लिए लालसा पैदा कर सकता है कि वह आपको अपनी बाँहों में भर ले क्योंकि उस फोटो में मित्र को वैसा दिखाया गया है-लेकिन फोटो लेने से पहले हुई नोक-झोंक आप नहीं देख सकते…ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं!

यह सिर्फ दोस्त की तस्वीरों से गलत संदेश लेने का मामला ही नहीं है! जी नहीं, आपको वास्तव में यह बात समझनी होगी कि आभासी दुनिया, आभासी दुनिया है और आभासी ही रहेगी। निश्चित ही आप वहाँ शुभकामना संदेश लिखकर भेज सकते हैं और उन्हें खुश करने के लिए फेसबुक पर 'लाइक' क्लिक कर सकते हैं। लेकिन आप माउस क्लिक करके दुनिया को बचा नहीं सकते!

ओह, रुकिए! यहाँ मुझे भेद करना होगा: निश्चित ही बहुत सारे आंदोलन इन्हीं क्लिक्स और व्यूज़ की मदद से परवान चढ़ते हैं। बहुत सारे प्रतिरोध सिर्फ ऑनलाइन चलते हैं, जिनमें हज़ारों लोगों की आभासी भागीदारी होती है। लेकिन बहुत से घोटाले भी यही से उद्भूत होते हैं और मैं उन्हीं की बात कर रहा हूँ।

आप एक लड़की की भयंकर जन्मजात विकृति का चित्र देख सकते हैं, जिसके नीचे आपसे गुजारिश की जाती है कि चित्र को ज़्यादा से ज़्यादा लाइक और शेयर करें क्योंकि कोई अज्ञात और अनजान संगठन लड़की के इलाज के लिए हर लाइक पर पाँच डॉलर और हर शेयर पर 10 डॉलर दान देगा। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि ऐसा होने वाला नहीं है क्योंकि वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं होता। यहाँ तक कि उस लड़की का फोटो भी वास्तविक नहीं होगा या पूर्णतया किसी दूसरे संदर्भ में लिया गया होगा!

न तो आप अफ्रीका के किसी देश की सरकार को किसी अपराधी को खोजने में अतिरिक्त प्रयास करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं और न ही फेसबुक से अपनी नीति बदलने की गुहार करती हुई आपकी टिप्पणी से वे अपनी नीतियाँ बदलेंगे।

अरे हाँ, मैं भूल रहा था: न तो किसी हिन्दू देवता का चित्र साझा करके आपको कोई अतिरिक्त कर्मा पॉइंट्स नहीं मिलने वाले हैं और न ही पाँच मिनट में उस संदेश को अपने दस दोस्तों के साथ साझा न करने पर उस देवता का कोप आप पर बरसने वाला है।

मैं इस तथ्य से पूरी तरह वाकिफ हूँ कि बहुत से ऑनलाइन रहने वाले लोग यह भेद नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए हमारे एक कर्मचारी ने रमोना से पूछा कि क्या वाकई उसने कोकाकोला से 3 मिलियन रुपए जीते हैं, जैसा कि उसे उसके इनबॉक्स में मिला एक स्पैम बता रहा है!

ऐसे संदेशों का इन लोगों तक पहुँचना भी अपने आप में कोई अच्छी बात नहीं है लेकिन आखिर यह वर्ल्ड वाइड वेब के खेल का ही हिस्सा है! आप सिर्फ इतना कर सकते हैं कि सतर्क रहें और ऑनलाइन दुनिया की अपनी जानकारी को सदा अप टू डेट रखें। अपनी सोशल मीडिया साइट्स पर हर वक़्त नज़र रखें और हर ऑनलाइन पढ़ी हुई बात पर भरोसा न करें!

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