क्या आसाराम की यह ‘छोटी सी’ गलती क्षमायोग्य है? क्या उसे भुलाया जा सकता है?-5 सितम्बर 2013

मिथ्या

एक लड़की के साथ आसाराम द्वारा कथित रूप से किए गए यौन दुराचार और उसके बाद उसकी गिरफ्तारी के बारे में सिर्फ मीडिया में ही हलचल नहीं है। मैं पिछले तीन दिन से इस बारे में लिखता ही रहा हूँ और उनके नजदीकी व्यक्तियों और कई दूसरे लोगों की प्रतिक्रियाएँ भी प्राप्त हो रही हैं। कुछ प्रतिक्रियाएँ ऐसी भी आई हैं जिन्हें देखकर मुझे शक होता है कि कहीं इनकी दिमागी हालत खराब तो नहीं है!

उदाहरण के लिए ट्विटर पर दी गई प्रसिद्ध गुरु श्रीश्री रविशंकर की प्रतिक्रिया पर गौर करें। उन्होंने कहा: "अगर आप एक जाने-माने व्यक्ति हैं और आपसे कोई गलती हो गई है तो सार्वजनिक रूप से उसे स्वीकार करें। लोगों के दिल इतने बड़े हैं कि आप सोच भी नहीं सकते। वे आपको माफ कर देंगे और सब कुछ भूल जाएंगे।" रुकिए, क्या कहा? मुझे थोडा स्पष्ट करने दीजिए: अगर आप आसाराम हैं और आपने किसी 16 साल की लड़की को, जिसे उसके अभिभावकों ने आपकी देख-रेख में रखा है, यौन रूप से प्रताड़ित किया है तो आपको इतना ही करना है कि किसी स्टेज पर खड़े होकर, माइक्रोफोन पर या वीडियो कैमेरे के सामने कहें, "माफ करें, मुझसे गलती हुई!" और बस, जनता आपको माफ कर देगी और आपकी करतूतों को भूल जाएगी। जी हाँ, और कानून भी आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा!

यही मतलब है न आपका, श्रीश्री? क्या आप वास्तविकता से कोसों दूर निकल गए हैं या आप वाकई समझते हैं कि ऐसे जघन्य अपराधों को माफ कर दिया जाना चाहिए, उन्हें भूल जाना चाहिए, खासकर उनके अपराधों को, जो प्रसिद्ध और लोकप्रिय हैं? क्या यह कोई नया अधिकार है जो सिर्फ धार्मिक, अमीर और यशस्वी गुरुओं को प्रदान किया गया है या यह सड़कछाप, सामान्य अपराधियों को भी उपलब्ध है?

इससे बेहतर रवैया तो आसाराम के पुत्र का रहा जो अपने पिता की तरह ही इस गुरु-उद्यम का एक हिस्सा है। वह दो दिन पहले दिल्ली आया और आसाराम की गिरफ्तारी के विरुद्ध आंदोलन कर रहे अपने समर्थकों और अपने पिता के भक्तों की भीड़ के सामने एक छोटा सा प्रवचन दे डाला। उसने अपने पिता द्वारा किए गए तथाकथित ‘अच्छे’ कामों का बखान करते हुए कहा कि उसके पिता "उतने बुरे नहीं हैं जितना मीडिया उन्हें चित्रित कर रहा है।" उसके कहने का अर्थ यह था कि "यदि कोई व्यक्ति सौ अच्छे काम कर ले तो उसके द्वारा की गई कुछ गलतियों पर गौर करते समय उन अच्छे कार्यों को भी देखा जाना चाहिए!"

स्पष्ट है कि पुत्र स्वीकार कर रहा है कि उसके पिता से कुछ ‘छोटी मोटी’ गलतियाँ हुई हैं। ठीक ही है, बलात्कार तो उसने नहीं किया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार आसाराम लड़की के साथ यौन संबंध बनाने में असमर्थ रहा लेकिन वह उसके सामने नंगा खड़ा हो गया और लड़की के वस्त्र भी उतारने की कोशिश की। इसके अलावा उसने लड़की के जिस्म को बुरी नीयत से छुआ, उसके अंगों को सहलाया, उसे मुख-मैथुन करने के लिए कहा और उसके मना करने पर धमकाया कि अगर उसने अपने परिवार वालों से इस मुलाक़ात के बारे में कुछ भी बताया तो उसकी और उसके परिवार वालों की हत्या कर दी जाएगी।… छोटी-मोटी गलती, और क्या!

पता नहीं क्यों, मेरा मन आसाराम के पुत्र की इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं होता कि उसके द्वारा जीवन में किए गए ‘अच्छे’ काम उसकी इस गलती पर बहुत भारी पड़ते हैं! खासकर जब आप इस बात का भी विचार करते हैं कि इस लड़की के अलावा और भी बहुत सी युवतियाँ और किशोरियाँ हो सकती हैं जिन्हें आसाराम और उसके सहायकों ने आसाराम के साथ ‘व्यक्तिगत मुलाकातों’ के लिए चुना होगा! नारायण साई की तरफ से, जो आरोपी का पुत्र है, ऐसा वक्तव्य आने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए क्योंकि, ऐसा कहा जाता है कि, वह खुद भी अपने आपको कृष्ण और अपनी शिष्याओं को गोपियाँ-कृष्ण की सखियाँ, बताता है! पता नहीं कितनी बच्चियों और औरतों का इन दो आदमियों की असली तस्वीर के साथ साबका पड़ा होगा, जो बेचारी, डर के मारे कुछ नहीं बोल नहीं पाई होंगी और मजबूरी में ऐसी घिनौनी हरकतें करते हुए शर्मसार हुई होंगी?

मैं इस 16 साल की लड़की का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ जिसने बोलने का साहस दिखाया और मजबूती के साथ अपनी बात पर डटी रही। उसके इस कदम से बहुत सी नाबालिग और मासूम लड़कियां और महिलाएं इन बाबाओं के चंगुल में आने से बच गईं!

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