आसाराम बापू पर एक नाबालिग लड़की के साथ दुराचार का आरोप – 2 सितंबर 2013

भारतीय मीडिया में दो सप्ताह से एक बड़ी खबर लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसने सारे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा हुआ है। यहाँ तक कि विदेशी मीडिया भी इस ओर आकृष्ट हुआ है और वहाँ भी इस प्रकरण की अच्छी ख़ासी चर्चा है। देश के एक बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक गुरु, आसाराम बापू पर सोलह साल की एक लड़की के साथ यौन दुराचार करने का आरोप लगाया गया है। यह प्रकरण उसी से संबन्धित है।

आसाराम 72 साल का है और उसने जीवन में वह सब प्राप्त किया है जिसका सभी आध्यात्मिक गुरु सपने देखा करते हैं: दुनिया भर में उसके विभिन्न प्रकार के 1400 संगठन और 400 आश्रम हैं। कुल मिलाकर वह 15000 करोड़ रुपए की सम्पत्ति का मालिक है, जोकि 2 बिलियन यूएस डॉलर के बराबर होता है! पूजा पाठ में काम आने वाली सामग्रियों जैसे, इत्र-फुलेल, धूप-अगरबत्तियों और ऐसी ही दूसरी वस्तुओं के निर्माण का उसका बहुत बड़ा व्यापार है जिन्हें दुनिया भर में बेचा जाता है। अगर आप जानने की कोशिश करें तो आपको पता चलेगा कि उसके अनुयायियों की संख्या 4 करोड़ से 60 करोड़ तक हो सकती है जो उस पर पूरा विश्वास करते हैं और उस पर सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार रहते हैं- बावजूद इसके कि आसाराम बापू हमेशा ही किसी न किसी विवाद का हिस्सा बनता रहा है!

एक प्रकरण में दो बच्चे आसाराम के आश्रम से अचानक गायब हो गए और उन बच्चों के माता-पिता ने आसाराम, उसके आश्रम और संस्था पर आरोप लगाया कि सिद्धि प्राप्त करने के लिए उनके बच्चों का उपयोग तांत्रिक कर्मकांड में किया गया जिसमें उनके बच्चो की बली दी गई। वह परिवार अब भी बच्चों के वियोग में दुख में डूबा हुआ है और उसके सामने न्याय की गुहार लगाने के सिवा कोई चारा नहीं रह गया है। वे सीधे आसाराम पर यह आरोप लगा रहे हैं कि उसने बच्चों पर काला जादू किया था और अब अपने लिए इंसाफ का इंतज़ार कर रहे हैं। वैसे भी आसाराम यह दावा करता रहा है कि वह पूजा-पाठ और धार्मिक कर्मकांडों की सहायता से प्रेतबाधा दूर करता है।

इसके अलावा, गैर कानूनी रूप से दूसरों की जमीनें हथियाने के भी उस पर कई इल्ज़ाम हैं। दुनिया भर में स्थित उसके कई आश्रमों के बारे में कहा जाता है कि जिन ज़मीनों पर वे स्थित हैं उनमें से कुछ हिस्से कानूनी रूप से अधिग्रहीत नहीं किए गए हैं।

जबकि उपरोक्त सभी प्रकरणों में उस पर कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया है, ताज़ा प्रकरण में, ऐसा लगता है कि उसे गंभीर संकट का सामना करना होगा।

आश्रम के दो अनुयायियों ने अपने तीन बच्चों को, जिनमें से दो लड़के थे और एक लड़की, जोधपुर, राजस्थान स्थित आश्रम द्वारा संचालित स्कूल में दाखिल किया था और वे तीनों आश्रम के हॉस्टलों में रहते थे। तीन बच्चों की पढ़ाई के लिए उन्होंने 4500 यूएस डॉलर प्रति वर्ष के हिसाब से अदा किए थे और पिछले कई सालों से दान वगैरह देकर भी वे आश्रम की सहायता किया करते थे जिसका मूल्य, बच्चों के पिता के अनुसार, लगभग 30000 यूएस डॉलर होता है। उसने बताया कि उसने आश्रम के लिए जमीने भी खरीदी थीं जिस पर वह उनके लिए एक आश्रम भी बनाया।

एक दिन उन बच्चों के अभिभावकों को सूचना दी गई कि उनकी लड़की की तबीयत खराब है, शायद उसके शरीर पर कोई भूत सवार हो गया है। उन्हें बताया गया कि ऐसे गंभीर मामलों में बापू खुद बीमार का ध्यान रखते हैं और वही इलाज भी करते है, इसलिए बच्ची पर भी कुछ विशेष कर्मकांड करके उसे ठीक कर देंगे।

स्वाभाविक ही, वे चाहते थे कि उनकी बच्ची ठीक हो जाए और उन्हें बापू पर पूरा भरोसा भी था इसलिए वे शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश से यात्रा करके जोधपुर स्थित आश्रम आए, जहां वे अपनी बेटी से मिले। उसके बाद लड़की को एक फ़ार्म हाउस में बने मकान में ले जाया गया जहां किसी दूसरे को प्रवेश करने और बापू की क्रियाओं में व्यवधान उपस्थित करने की इजाज़त नहीं थी। इस दौरान बच्ची के अभिभावक, इस विश्वास में कि गुरु उनकी बच्ची पर अपने उपचारक कर्मकांड करके उसे स्वस्थ कर देंगे, उस मकान के बाहर बैठे रहे और खुद भी मंत्रोच्चार करते रहे।

मीडिया के जरिये जो हम जान पाए उसके अनुसार आश्रम के लोग लड़की को मकान के पीछे स्थित कमरे में ले गए जहाँ, जैसा कि उस लड़की ने बताया, हल्का अंधेरा था और उस बुजुर्ग ने अपने सारे कपड़े उतार दिये। उसके सामने पूरी तरह नंगा खड़ा होकर वह उसके शरीर के साथ खेलने लगा और क्रमशः उसके कपड़े भी उतारने की कोशिश करने लगा।

जब उस किशोरी ने प्रतिवाद किया और शारीरिक प्रतिरोध किया तो उसने उसे धमकाना शुरू कर दिया कि इस बारे में किसी को बताया तो उसके परिवार के सदस्यों की हत्या कर दी जाएगी! स्वाभाविक ही लड़की डर गई और जब वह चीखने ही वाली थी कि उसने उसके मुंह पर हाथ रखकर उसका मुंह बंद कर दिया। अब उसकी आवाज़ बाहर नहीं निकल सकती थी। फिर उसने उससे मुख-मैथुन करने के लिए कहा, जिसे करने से उस किशोरी ने साफ मना कर दिया।

ये वही बाते हैं जिन्हें हम पुलिस और मीडिया रेपोर्टों से जान सकते हैं। फिर वह लड़की रोती हुई अपने माता-पिता के पास आई और उनसे कहा कि उसे तुरंत घर ले चलें। घर पहुँचने के बाद ही उसने अपने अभिभावकों को उसके साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में बताया। पिता इतने नाराज़ हुए कि उन्होंने कहा कि अगर उसने उसे आश्रम में सारी बातें बताई होतीं तो वह एक पत्थर लेकर अपने पूर्व गुरु को वहीँ खत्म कर देता!

अपनी बच्ची की यातनाओं की भयंकर कहानी सुनकर उसके अभिभावकों ने पता किया कि आसाराम अगली बार कहाँ प्रवचन करने वाला है, जिससे वे वहाँ जाकर उससे मिल सकें। वह दिल्ली आने वाला था, जहां लड़की के माता-पिता ने आसाराम से मिलकर अपनी बच्ची के साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में जवाब-तलब करने का प्रयास किया मगर उन्हें आसाराम से मिलने ही नहीं दिया गया। स्वाभाविक ही उनके पास पुलिस में रपट लिखवाने के सिवा कोई चारा नहीं था। उन्होंने पहली फुर्सत में यह काम सम्पन्न किया।

दिल्ली पुलिस ने प्रकरण को जोधपुर स्थानांतरित कर दिया, जहां लड़की और आसाराम के आश्रम के लोगों से लंबी पूछताछ की गई। हर पूछताछ के बाद यही बात सामने आती थी कि लड़की बिलकुल सच बोल रही है, जब कि आश्रम वाले लगातार झूठ बोले जा रहे थे। एक बार तो आसाराम ने घटना के वक़्त आश्रम में उपस्थित न होने तक का दावा किया, जो सफ़ेद झूठ था, क्योंकि उनकी मुलाक़ात के कई गवाह थे। तब उन्हें मजबूरी में स्वीकार करना पड़ा कि वह वहाँ था मगर वे यही रट लगाते रहे कि उसने वैसा कुछ नहीं किया जिसका उस पर इल्ज़ाम लगाया जा रहा है।

आखिर 31 अगस्त, 2013 के दिन आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया और अब उस नाबालिग लड़की के परिवार वाले उम्मीद कर रहे हैं कि उनके साथ न्याय होगा। कल मैं आपको बताऊंगा कि उन्हें न्याय पाने का पूरा भरोसा क्यों नहीं है और आसाराम की गिरफ्तारी में इतनी देर क्यों हुई।

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