दो दिनों से मैं आपको आसाराम के बारे में बता रहा हूँ कि उस पर क्या आरोप लगाया गया है और अब तक वह अपनी गिरफ्तारी से किस तरह बचता रहा। अब जबकि उसने बयान देना शुरू कर दिया है और अपने लिए जमानत की मांग कर रहा है, उसके बारे में और भी कई तरह की जानकारियाँ प्राप्त हो रही हैं जिनसे उसके बारे में एक से एक बढ़कर शर्मनाक, वीभत्स बातें सामने आ रही हैं: आसाराम ने एक ऐसी सुनियोजित और सुसंगठित प्रणाली विकसित कर रखी थी जिसके जरिये वह, इस नाबालिग लड़की की तरह, अक्सर ही अपने उपभोग के लिए महिलाओं की व्यवस्था कर लिया करता था।
इस मामले में आसाराम अकेला व्यक्ति नहीं है जिसे गिरफ्तार किया गया है! उसका एक निकट सहयोगी भी है, जिसका नाम शिवा है। इस व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया है और जैसी कि लगातार नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं, शिवा ने बताया है कि आसाराम लड़कियों से अकेले में मिलने का आदी था। इसी तरह, शिवा के अनुसार, आसाराम अकेले में उस सोलह साल की लड़की से मिला था जो अब उस पर अपने यौन शोषण का आरोप लगा रही है। इतना ही नहीं, इससे यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि शिवा ने अनगिनत लड़कियों और युवतियों को आसाराम के गुप्त कमरे के दरवाजे तक पहुंचाया था, जिसके बाद के काम का जिम्मा आसाराम खुद उठाता था!
आसाराम और शिवा के अलावा पुलिस ने शिल्पी नामक एक और महिला को, जो उस हॉस्टल की वार्डन थी जहां वह किशोरी रहा करती थी, भी सम्मन भेजा है। वह हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा और उनकी देखभाल की जिम्मेदार थी और उसे इस प्रकरण के बारे में कुछ और बातें मालूम होनी चाहिए। बल्कि उम्मीद की जा सकती है कि इस पूरे मामले में उठ रहे बहुत से प्रश्नों के जवाब उसके पास हो सकते हैं। दुर्भाग्य से उसने पुलिस के नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है। विपरीत इसके, वह फरार हो गई है और पुलिस को उसका कोई पता नहीं है। पुलिस ने उसकी धर-पकड़ के लिए खोजी दस्ते की नियुक्ति की है। मामला बड़ा रोमांचक होता जा रहा है? कुछ कुछ!!
स्वाभाविक ही मीडिया सब कुछ देख रहा था और उसने अपनी तरफ से खोज की। कहा जाता है कि कभी वह आसाराम के बहुत निकट थी और इसी के चलते उसे वार्डन बनाया गया था। क्या अक्सर लड़कियों को आसाराम के पास वही भिजवाया करती थी? क्या वह हमेशा अपने ‘कर्मकांड’ से उनका इलाज कर दिया करता था?
जैसा कि लड़की का परिवार साफ-साफ कहता आ रहा है, यह एक बहुत सुव्यवस्थित अपराध था: किसी भी कारण से हो, लड़की एक बार बेहोश हो चुकी थी। वह तुरंत ही होश में आ गई लेकिन उसके अभिभावकों को बताया गया कि कोई भूत उसके पीछे लग गया है, कि वह बीमार पड़ गई है और यह भी कि उन्होंने आसाराम के किसी मंत्र द्वारा उसका उपचार करने की कोशिश भी की थी मगर उसे पूरी तरह स्वस्थ करने के लिए गुरु को स्वयं ही उस पर कोई कर्मकांड करना होगा!
शिवा ने स्वीकार किया है कि यह भूत वाली कहानी पीड़िता के अभिभावकों को बताई गई थी। इससे यह स्पष्ट है कि यह कोई अचानक उत्तेजना में किया गया अपराध नहीं था बल्कि सुनियोजित ढंग से अच्छा खासा जाल बिछा कर किया गया अपराध था! वही उस लड़की को कमरे तक लेकर आया था, जैसा कि पहले भी वह कई बार कर चुका था-लेकिन जिसने इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत की थी, हॉस्टल की वह वार्डन, फरार है।
स्वाभाविक ही, मेरे मन में कई प्रश्न उपस्थित हो रहे हैं। क्या उसके विभिन्न केन्द्रों में हॉस्टलों की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई है? बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के पवित्र कार्य की आड़ में कहीं उसने युवा लड़कियों की फौज तो इकट्ठा नहीं कर रखी है जिससे जब मर्ज़ी हो किसी लड़की का चुनाव अपने लिए कर सके; नाबालिग लड़कियों के साथ व्यभिचार की इच्छा रखने वाले अपने बीमार दिमाग की तृप्ति के लिए? ऐसी लड़कियां जिनके अभिभावक पूरी तरह उस पर भरोसा करते हैं, जिससे वे शिकायत लेकर कहीं जा भी ना सकें, अपने ऊपर हुए इन हादसों का कहीं ज़िक्र भी न कर सकें? लड़कियां जो शिकायत करने की बात तो छोड़िए, उसे ईश्वर की तरह पूजती हैं, जिसके चलते वह स्वतन्त्रता पूर्वक उनके साथ कुछ भी कर सके? लड़कियां, जो धमकाने पर डर जाएँ और उसका मुक़ाबला करना भी चाहें तो न कर सकें?
हम इस प्रकरण में हो रहे नित नये आयामों पर नज़र रखे हुए हैं और इंतज़ार कर रहे हैं कि कब सच्चाई सामने आती है-भले ही यह कार्य हमें कितना भी अरुचिकर क्यों न प्रतीत हो!
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