ऐसा कौन है जिसे अपेक्षाएं न हों? आनंद में रहने के लिए आशाओं अथवा अपेक्षाओं को न रखना या फिर कम से कम रखना जरुरी है. क्योंकि यदि अपेक्षाएं नहीं होंगी तो आप निराश भी नहीं होंगे!
स्वामी बालेन्दु जीवन के प्रति वास्तविक दृष्टिकोण के विषय में चर्चा करते हैं और उन स्वाभाविक अपेक्षाओं के विषय बात करते हैं जो कि आप अपने परिवार, मित्रों अथवा जीवनसाथी के साथ रखते हैं!
निरीक्षण करें हो सकता है कि आपकी अपेक्षाएं बहुत जादा हों! उन्हें कम करने का प्रयास करें!

