अहंकार – कोई नहीं चाहता मगर सबके पास होता है- 30 सितंबर 2013

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज मैं आपके एक छोटे से दोस्त के बारे में लिखना चाहता हूँ। जी हाँ, उसके बारे में जिसे आप अच्छे से जानते हैं। जो हमेशा आपके साथ रहता है। यह छोटा सा, ज़रा सा है-और आप चाहते भी हैं कि वह वैसा ही रहे-लेकिन वह समय-समय पर इतना विशाल हो जाता है कि न सिर्फ आपको परेशान कर डालता है बल्कि आपका बड़ा नुकसान करने की क्षमता भी रखता है! वह कौन सा दोस्त हैं जिसके बारे में मैं बात कर रहा हूँ? बिल्कुल ठीक, वह आपका अहं है!

अहं एक ऐसी चीज़ है, जो सबके पास होती है। अगर आप किसी शब्दकोश में देखें तो आप उसका वह अर्थ भी देखेंगे जो मैंने एक बार पढ़ा था: "व्यक्ति का स्वाभिमान या स्व-महत्व, अपने बारे में आपकी अपनी धारणा।" इस धरती पर हर व्यक्ति अपने बारे में एक धारणा रखता है, नीची या ऊंची, बहुत ऊंची। कुछ लोगों में स्वाभिमान की कमी होती है, जबकि कुछ दूसरों का अहं बहुत विशाल होता है। आपके लिए वह कैसा भी हो: इस बात से इंकार न करें कि आपका कोई अहं है ही नहीं। उसके बगैर आपका कोई अस्तित्व नहीं हो सकता।

जब भी आप किसी के अहं के बारे में सुनते हैं या जब आपके अहं की याद आपको दिलाई जाती है तो उस बात में अक्सर नकारात्मकता मौजूद होती है। स्वाभाविक ही, इसी समय आप उसे सबसे ज़्यादा नोटिस करते हैं। जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को देखते हैं, जिसका अहं फूलकर गुब्बारा हो चुका है तो उसकी छाती फूली हुई होती है और नाक ऊंची। इससे वह अहंकारी प्रतीत होता है, एक आत्मकेंद्रित, हेकड़ व्यक्ति, जिसके साथ थोड़ी देर बात करना भी मुश्किल होता है। ऐसी हालत में आप अपने आपको भी काफी अलग-सा महसूस करते हैं, यहाँ तक कि आपको यह झूठा एहसास भी हो सकता है कि आपमें कोई आत्मसम्मान बचा ही नहीं है! उस पल, जब आपका अहं, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, आपको किसी परेशानी में डाल देता है, तब सारे विचार ध्वस्त हो जाते हैं और आप सोचते हैं कि आपने क्यों अपने आपको उसके हवाले कर दिया। लेकिन अहं हमेशा नकारात्मक ही नहीं होता!

सच्चाई यह है कि अहं के कारण ही आपका जीवन चल रहा है और इसी के चलते आप अपने सपनों को पूरा करने में जीवन भर जुटे रहते हैं। आपका अहं ही आपके आत्मविश्वास की जड़ है। जीवन में कुछ प्राप्त कर सकने का विचार ही आपके मन में अपने अहं के चलते आता है। आप कुछ पा सकते हैं, इस विचार के बगैर आप कोई भी काम शुरू ही नहीं करेंगे। अगर आपके पास कोई अहं नहीं है तो नौकरी के लिए इंटरव्यू देते हुए, इस डर से कि यह आपके बस का नहीं है, साक्षात्कार में असफल हो जाएंगे या बाद में जो काम सामने आएगा, उसे नहीं कर पाएंगे, आप नौकरी के लिए साक्षात्कार ही क्यों देंगे? अपने अहं को धन्यवाद दीजिए, जिसके कारण आपको एहसास है कि आप कठिन से कठिन काम को अंजाम दे सकते हैं!

लोगों के मन में, खासकर उन लोगों के मन में जिन्हें ‘आध्यात्मिक’ विचारों वाला कहा जाता है, यह धारणा होती है कि अपने अहं को कम करने की कोशिश करते रहना चाहिए और अच्छा तो यह होगा कि उसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। मैं इस धारणा पर यकीन नहीं रखता। यह हो भी नहीं सकता-उसके बगैर आप एक पल नहीं चल सकते, उसके बगैर आपका साहस जाता रहेगा, अपने आप पर भरोसा नहीं रहेगा और आखिर में वह आपकी जान भी ले सकता है क्योंकि आत्मसंदेह की ऐसी दयनीय हालत में आप पहुँच जाएंगे कि उसके बगैर आप अपने लिए खाना भी प्राप्त नहीं कर सकेंगे।

एक सीमा तक अपने अहं का स्वागत कीजिए। उस पर काबू रखिए। जी हाँ, उसे अपने आप पर हावी न होने दीजिए लेकिन, अगर आप आत्मविश्वासी और हिम्मती बने रहना चाहते हैं तो उसे पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश भी मत कीजिए। अहं, आपका यह छोटा-सा मित्र, आपके लिए परम आवश्यक है। उसे दाना डालते रहिए मगर एक सीमा तक ही; ज़्यादा मत खिलाइए।