क्या भारत आंतरिक शांति के लिये सही जगह है? – 20 नवम्बर 2012

चेतना

कुछ समय पूर्व एक महिला के साथ मैंने परामर्श सत्र किया था जो किसी तलाश में भारत
आई थी। यहां उनके इस प्रश्न का दिया गया जवाब है कि कैसे उनके मन में यहां की यात्रा का
विचार आया। वह किस चीज की तलाश कर रही थी? स्वयं की, आंतरिक शांति, अध्यात्म और वह
सब कुछ जो इनके साथ साथ हो। और कहां है वह स्थान जहां अधिकतर लोग इनकी तलाश करेंगे?
भारत, आध्यात्मिकता का देश, योगियों का, दार्शनिकों का, संत और साधुओं का। उन्होंने मुझसे
पूछा क्या मैं यह समझता हूँ कि उन्हें वह सब कुछ प्राप्त हो जायेगा जिसकी उन्हें तलाश है।

निश्चय ही यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उतर आसानी से नहीं दिया जा सकता। अंशतः इसलिये कि यह सब कुछ बहुत हद तक व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि इसके कुछ पहलू सबके लिये सार्थक हैं|

सर्वप्रथम कि भारत जाने के पहले उसके बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर ले। इस भ्रम को लेकर यहां न आयें कि भारत एक आदर्श (परफ़ेक्ट) देश है जहां हर व्यक्ति प्रतिदिन योग करता है, जहां प्रेम के अतिरिक्त दूसरे किसी तरह का व्यवहार लोग नहीं करते और जहां प्रत्येक व्यक्ति स्वयं और दुनिया के साथ शांति में हैं। अगर आप यह विश्वास करते है- और मुझे पता है कि यह एक सामान्य भ्रम है विशेषतः उन लोगों का जो गहरे रुप में अध्यात्मिक दृश्य में संलिप्त है- आपको निराशा होगी। जी हां भारत एक अत्यंत धार्मिक देश है, और अधिकांश लोग, अमीर और गरीब, प्रेमपूर्ण व्यवहार करते हैं इसके बावजूद भी यह एक सामान्य देश है सातवाँ स्वर्ग नहीं। पुस्तकों का अध्ययन करें या समाचार पत्रों का लेख पढ़ें, एक-दो डाक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) देखें, यहां के समाज में भी बहुत सारी समस्यायें है जो आपके शांतिपूर्ण समय के कुछ पलो को बाधित कर सकती हैं।

अगला प्रश्न जैसा मैं समझता हूं, कि आपको आवश्यकता है स्वयं से पूछने की कि वस्तुतः आप अपनी आंतरिक शांति की तलाश कहां कर रहे हैं। कहां आप आध्यात्मिकता की तलाश कर रहे है और आपकी समझ से कहां आपको आंतरिक शांति की प्राप्ति होगी? आप किसी गुरु, किसी धर्म के आचार्य के पास जाकर यह जानना चाहते है कि वह व्यक्ति आपको बताये कि कौन हैं आप? अगर ऐसा मामला है तो मैं आपको कहता हूं आप बहुत सफ़ल नहीं होंगे। इसके विपरीत इस बात का खतरा ज्यादा है कि आपकी तलाश दिग्भ्रमित करने वाले संप्रदाय या ब्रेन वाश करने वाले किसी धर्म तक जाकर समाप्त हो जायेगी।

मैं जानता हूं कि एकमात्र रास्ता है, जिस पर चल कर आप कुछ प्राप्त कर सकते है जो आपकी जरूरत को पूरा कर सकता है, आपकी इच्छा और आपके खालीपन को भर सकता है, वह है कि आप इन्हें बाहर न तलाशे। आपको अपने अंदर पैठना होगा अपनी आंतरिक शांति की प्राप्ति के लिये, मात्र भारत आ जाने से आप स्वयं को नहीं प्राप्त कर सकते आप स्वयं को अपने अंदर ही पायेंगे।

इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं सबको भारत यात्रा करने से हतोत्साहित कर रहा हूं और मैं यह विश्वास नहीं करता कि यहां आकर कोई व्यक्ति स्वयं को नहीं पा सकता और सबको अपने घर में ही रहना चाहिये। बल्कि इसके विपरीत मेरा मानना है कि यह बहुत लाभप्रद होगा कि आप अपने दैनिक दिनचर्या से समय निकालें और तनाव मुक्त होकर स्वयं पर ध्यान केंद्रित करें, अपने अंतर वाणी को सुनें और पता लगाये आखिर आप स्वयं क्या है। थोड़ा योग करें, एकान्तवास करें । आयुर्वेद की सहायता से शरीर को स्वच्छ करना और दूषित तत्वों को शरीर से बाहर निकालना पहले शारीरिक रुप से स्वच्छता प्रदान करता है और तनाव मुक्त करके मानसिक एवं भावनात्मक रुप से भी स्वच्छ करता है। यह सब आपको स्वयं की तलाश में मदद प्रदान करता है। आप कुछ दूरी रखकर दूसरे नजरिये से चीजों को देखते है।

इसलिये कृपया भारत आयें, यात्रा करें, तनाव मुक्त बने और आनंद को प्राप्त करें। लेकिन स्वयं के लिये समय लेकर आयें और अपने अंतर में ध्यान केन्द्रित करे। मेरे विचार से यह सर्वोतम और शायद एकमात्र रास्ता है उन सभी चीजों को पाने का जिनकी आपको तलाश है।

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