एक छोटी सी करतूत आपका जीवन बदल सकती है- होशोहवास के साथ जिएँ! 11 दिसंबर 2014

मैं अपना एक विचार आपके साथ साझा करना चाहता हूँ। मूलतः विचार यह है: जीवन बहुत कीमती है-और किस तरह पल भर के हमारे काम उसमें तब्दीली ला सकते हैं या उसे पूरी तरह बरबाद कर सकते हैं। इसे हमेशा याद रखें!

जब आप अपनी आयु के मध्य में होते हैं, जब आप अपनी दिनचर्या में मसरूफ़ हो जाते हैं और सिर्फ घटनाओं, कार्यक्रमों, संयोगों और अपने कामकाज में उलझे होते हैं, कई बार आसपास हो रही घटनाओं का विस्तृत फ़लक आपकी नज़रों से ओझल हो जाता है। आप पाँच-पाँच काम एक साथ कर रहे होते हैं और जब आप उनमें उलझे होते हैं तब आप शुरू में ही एक कदम आगे रख चुके होते हैं। आप परेशान हो जाते हैं, आप उत्तेजित होते हैं और जबकि आप काम करते हुए भीतर ही भीतर अपने आप से जूझ रहे होते हैं। अपने आपसे, आसपास उपस्थित लोगों से लड़ते हैं और यह एक काल्पनिक संघर्ष होता है, जो आपको कहीं का नहीं छोड़ता। वह आपके विचारों को भीतर जकड़ लेता है, आपका मस्तिष्क सुप्त होता है और सिर्फ आपके हाथ मशीन की तरह काम कर रहे होते हैं।

आपका जीवन बीतता रहता है और आप बिना कुछ सोचे-विचारे ज़िंदगी जीते रहते हैं। आपको यह भी पता नहीं होता कि आप कर क्या रहे हैं।

आप भूल जाते हैं कि आपकी एक हरकत आपके जीवन को पूरी तरह बदलकर रख सकती है। घर में दिखाई गई लापरवाही का एक पल। एक जलती मोमबत्ती आपके धक्के से लुढ़क जाए, गॅस ठीक से बंद नहीं हुई। भीड़ भरे यातायात में गफलत। गाड़ी चलाते हुए चूक हो जाए। आगे बढ़ाया गया एक कदम गलत पड़ गया क्योंकि आपका ध्यान नहीं था कि आप किस जगह कदम रख रहे हैं।

ये भूलें आपका जीवन समाप्त कर सकती हैं। ये बातें या ये छोटी-छोटी घटनाएँ आपको सम्पूर्ण रूप से बदलकर रख सकती हैं-शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से या भावनात्मक रूप से।

इसे याद रखें और पूरे होशोहवास के साथ ज़िंदगी गुजारें। उस पल पर ध्यान केन्द्रित करें जो अभी बीत रहा है-अपनी आध्यात्मिक यात्रा के अगले कदम के रूप में नहीं। जी नहीं, बल्कि ठीक तरह से, व्यवस्थित रूप से जीने के लिए, जिससे एक लापरवाह पल के लिए बाद में आपको कोई पछतावा न हो।

यह ब्लॉग कल की घटनाओं से प्रेरित है। इस पर मैं अगले सप्ताह विस्तार से लिखूँगा।

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