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आपके हवाई जहाज़ पर एक बच्चा रो रहा है? क्या करना चाहिए और क्या नहीं? 17 नवंबर 2015

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स्वामी बालेंदु एक ऐसी स्थिति के बारे में लिख रहे हैं, जिससे हर हवाई यात्री घबराता है: आपके हवाई जहाज़ पर बहुत से बच्चे भी यात्रा कर रहे हैं और उनमें से कम से कम एक बेतहाशा रो-चीख रहा है! क्या किया जाए?

बच्चे, सिरदर्द हैं या आनंद और हंसी-खुशी के शिक्षक?- 16 सितंबर 2013

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स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो बच्चों को समझ नहीं पाते और उन पर सिर्फ क्रोधित होना जानते हैं।

रुपया, महत्वाकांक्षा और ऐशों-आराम या माँ-बच्चे का प्रेम? – 11 जुलाई 2013

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स्वामी बालेंदु यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे आधुनिक समाज और विकास की आधुनिक समझ अभिभावकों को इस बात के लिए प्रेरित करते हैं कि वे ज़्यादा से ज़्यादा काम करें, ज़्यादा से ज़्यादा कमाएं, और ज़्यादा से ज़्यादा खर्च करें, भले ही अपने बच्चों के साथ रहने के लिए उनके पास समय ही न बचे।

धन का राक्षस माँओं को उनके बच्चों से दूर रखता है – 10 जुलाई 2013

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स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि माँएँ अपने बच्चों को डे-केयर सेंटर में भर्ती कराके खुश नहीं होतीं लेकिन उनके पास ऐसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।

आखिर आप बच्चे पैदा ही क्यों करते हैं? – 9 जुलाई 2013

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स्वामी बालेंदु पश्चिमी अभिभावकों और उनके बच्चों के सामान्य जीवन के बारे में चर्चा कर रहे हैं। ऐसे आम अभिभावक, जिनके लिए अपने तीन या छह माह के बच्चों को अपने से अलग कर देना सामान्य सी बात है।

पूर्णकालिक स्कूल – क्या हम अपने बच्चों को रोबोट बना देना चाहते हैं? – 8 जुलाई 2013

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जब स्वामी बालेंदु ने सुना कि जर्मनी के प्राथमिक स्कूल अब पूर्णकालिक स्कूल हो जाएंगे तो उन्हें दुखद आश्चर्य हुआ। इस विषय में उनके विचार यहाँ पढ़ें।

कैसे संस्कृतियों का भेद गरीबी की परिभाषा बदल देता है – 14 जून 2013

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स्वामी बालेंदु यूनिसेफ द्वारा कराए गए अमीर मुल्कों के गरीब बच्चों के बारे में अध्ययन के अंतिम कुछ बिन्दुओं पर चर्चा कर रहे हैं। कैसे भारत के साथ ऐसी तुलना लगभग असंभव है, पढ़िए।

आवश्यकता और विलासिता – भारत और पश्चिमी देशों के अलग-अलग मानदंड – 13 जून 2013

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स्वामी बालेंदु यूनिसेफ द्वारा कराए गए अमीर मुल्कों के बच्चों के बारे में अध्ययन के कुछ और बिन्दुओं पर चर्चा कर रहे हैं। होमवर्क करने के लिए एक शांत स्थान, नए कपड़े और स्कूल ट्रिप के लिए पैसे-वास्तव में क्या और कितना आवश्यक है?

भारतीय और पश्चिमी बच्चों के खेलों की तुलना – 12 जून 2013

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स्वामी बालेंदु यूनिसेफ द्वारा कराए गए अमीर मुल्कों के बच्चों के बारे में अध्ययन के दो और बिन्दुओं पर चर्चा कर रहे हैं। यहाँ पढ़ें भारतीय बच्चों को प्राप्त खेलों की सुविधाओं से उनकी तुलना।

तीन बार भोजन – क्या यह बच्चों के लिए विलासिता है? – 11 जून 2013

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स्वामी बालेंदु यूनिसेफ द्वारा गरीब बच्चों के विषय में किए गए अध्ययन के पहले पाँच बिन्दुओं पर चर्चा कर रहे हैं। भोजन, किताबें, खेल के साधन और सुविधाएं-विलासिता या आवश्यक अनिवार्यता?

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