जब आप नहीं जानते कि पिताजी क्यों नहीं हैं – हमारे स्कूल के बच्चे – 3 अप्रैल 2015

आज मैं आपका परिचय एक ऐसे लड़के से करवाना चाहता हूँ जो अपनी पहली कक्षा से ही हमारे यहाँ पढ़ रहा है। उसका नाम प्रवीण है और वह 12 साल का है।

प्रवीण वृन्दावन की एक गरीब बस्ती में, अपने बहुत से सहपाठियों के पड़ोस में ही रहता है। अपनी माँ के साथ वह अकेला रहता है-उसकी बहन प्रवीण के दादा के गाँव में बी ए की पढाई कर रही है। उसके पिता का देहांत चार साल पहले हो गया था।

जब हमने प्रवीण की माँ से उसके पति की मृत्यु का कारण जानना चाहा तो उसने सिर्फ इतना कहा, 'वह बीमार पड़ा और मर गया'। उसे क्या बीमारी हुई थी, कोई नहीं जानता। वह किसी अच्छे डॉक्टर के पास गया ही नहीं। उन्होंने सोचा कि वह कुछ दिन में, ऐसे ही ठीक हो जाएगा। यह भी कि अस्पताल जाने पर काफी खर्च आएगा, कि आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ जाएँगी और उनका पारिवारिक जीवन तहस-नहस हो जाएगा।

एक तरह से डॉक्टर के यहाँ न जाने से भी उनका जीवन तहस-नहस हो ही गया लेकिन अब यह जान पाने का कोई ज़रिया नहीं है कि किस बीमारी से उसकी मौत हुई थी। अब माँ अकेली रह गई है। कम से कम ये दो कमरे उनकी अपनी संपत्ति हैं, जिससे किराया अदा करने की परेशानी से वह मुक्त है। उसके अभिभावक उसकी बेटी के कॉलेज की फीस इत्यादि अदा कर देते हैं। जैसा कि मैंने बताया, वह उन्हीं के साथ रहती है और एक तरह से अपनी मदद आप कर पा रही है।

प्रवीण का पिता एक निर्माण-स्थल पर मजदूरी किया करता था और प्रवीण की माँ खेतों पर काम करके किसानों का हाथ बँटाती है और थोडा-बहुत कमा लेती है। स्वाभाविक ही, यह काम साल भर नहीं चलता और इसलिए जब उसके पास खेती का काम नहीं होता, वह एक फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट में काम करती है, जहाँ बहुत से खाद्य पदार्थों का निर्माण होता है। वहाँ वह विभिन्न मसालों को मोर्टार में पीसने का श्रमसाध्य काम करती है। एक किलो मसाला पीसने का उसे दस से बारह रुपए तक मिल जाता है और वह बताती है कि इस काम से वह औसतन 1000 रुपए प्रति माह अर्थात लगभग 15 यू एस डॉलर कमा लेती है।

इसका मतलब, खाने के लिए घर में नमक-रोटी के सिवा कुछ नहीं है। वह खुश है कि प्रवीण हमारे स्कूल में पढ़ रहा है लेकिन इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि यहाँ रोज़ दोपहर को उसे भरपेट भोजन मिल जाता है और उसकी परेशानी का एक कारण कम हो जाता है!

प्रवीण भी खुश है। यहाँ स्कूल में उसके अनेक मित्र बन गए हैं, जिनके साथ खेलते-कूदते और साथ पढ़ते हुए उसने कई साल गुज़ारे हैं। यह बहुत अच्छी बात है कि पढ़ाई में भी वह बहुत अच्छा है।

अगर आप प्रवीण जैसे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को या स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करें। आपकी सहायता का हम स्वागत करते हैं और अग्रिम धन्यवाद व्यक्त करना चाहते हैं।

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