जब पत्नी के साथ धोखेबाज़ी किसी परिवार को बेघर कर आर्थिक मुसीबतों में फँसा देती है – हमारे स्कूल के बच्चे – 17 अप्रैल 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

आज मैं आपका परिचय हमारे आश्रम के एक भूतपूर्व कर्मचारी और उसकी बेटी से करवाना चाहता हूँ, जो शुरू से ही हमारे स्कूल में पढ़ रही है। वास्तव में इस परिवार के छह में से चार बच्चे हमारे स्कूल में ही पढ़ते थे और हम भी कई वर्षों तक इस परिवार की सहायता करते रहे थे। लड़की का नाम रुचि है और वह 17 साल की है।

उसकी माँ, ममता तब से हमारे घर की साफ-सफाई और माँ के कामों में मदद करती रही है जब हमारे माता-पिता वृन्दावन के अपने पुराने मकान में रह रहे थे। शायद वह 2003 से हमारे आश्रम में काम करने आ गई थी। वह परिवार सहित आश्रम में आकर रहने लगी और दस साल से यहाँ आने वाले हमारे बहुत से मेहमानों को उसका स्मरण होगा कि वह गाना गाते हुए आश्रम की साफ-सफाई किया करती थी। दुर्भाग्य से पिछले कुछ सालों से उसकी तबीयत खराब रहने लगी। उसके पैरों में सूजन हो जाती थी और शरीर के बहुत से हिस्सों में पानी भर जाता था। इसके अलावा उसका वज़न भी काफी बढ़ गया और साँस की तकलीफ भी रहने लगी। उसे और भी कई बीमारियाँ थीं और कुल मिलाकर यह कि उसके लिए आश्रम में काम करना संभव नहीं रह गया था। अंततः उसने काम छोड़ दिया, हालांकि बच्चों की देखभाल और पढ़ाई हमारे आश्रम में जारी रही।

लेकिन ममता से मिल चुके हमारे अधिकांश मेहमान यह नहीं जानते होंगे कि वह छह बच्चों की माँ और पाँच बच्चों की नानी है! उसकी सबसे बड़ी लड़की 25 साल की है और दूसरी 23 साल की। दोनों का विवाह हो चुका है और बच्चे भी हैं। उसके बाद एक 19 साल का लड़का है, जो कई साल हमारे आश्रम में रह चुका है और अब दिल्ली में बिजली का काम सीख रहा है। उसके बाद क्रमशः 14 और 15 साल के राहुल और अमन हैं, जो हमारे स्कूल में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अब उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं।

और 17 साल की रुचि भी किसी से कम नहीं। आपको आश्चर्य होगा कि अपने भाइयों से बड़ी होने के बावजूद वह अब भी 6ठी कक्षा में ही क्यों है, जबकि उसके दोनों भाई 8वीं पास करके निकल चुके हैं। इसका कारण यह है कि शुरू में तीनों ने एक साथ पढ़ाई शुरू की थी मगर बाद में उनके माता-पिता लड़कों को तो स्कूल भेजते रहे मगर लड़की को स्कूल भेजने में कोताही बरतने लगे! इसलिए अक्सर रुचि कक्षा में अनुपस्थित रहने लगी और परीक्षा पास न कर पाने के कारण उसे कई बार एक ही कक्षा में पढ़ाई करनी पड़ी।

लेकिन अब रुचि ने फिर रफ्तार पकड़ ली है और खुद ही पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू कर दिया है, जिसके कारण अब उसके परीक्षा के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं! लेकिन उनके घर में संकट की स्थिति बनी हुई है।

कई सालों तक परिवार की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि पिता जुआ खेलता था। स्वाभाविक ही, वह रोज़ पैसे हारकर घर आता था, सिर्फ अपनी कमाई के पैसे ही नहीं बल्कि पत्नी के भी और इसलिए परिवार के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाता था! लेकिन अब समस्या और दुरूह हो गई थी!

पिता कई वर्षों से हमारे आश्रम के सामने वाले आश्रम में रसोइए का काम किया करता था। लेकिन अब नहीं-क्योंकि कई महिला कर्मचारियों और, यहाँ तक कि आश्रम के ग्राहकों से भी उसके सेक्स सम्बन्ध थे। बच्चों सहित उसकी पत्नी भी, पैसे लेकर नहीं बल्कि गुरु की सेवा के लिए, अक्सर आश्रम आती-जाती रहती थी। स्वाभाविक ही उसे अपने पति के सेक्स संबंधों की भनक लग गई-और उसकी इस धोखेबाज़ी पर वह बिफर उठी और आश्रम में अच्छा-ख़ासा हंगामा बरपा हो गया। उसने उससे आश्रम की नौकरी छोड़ने के लिए कहा और जवाब में पति ने उसकी पिटाई कर दी। अंततः उसके आश्रम मालिकों ने उसे नौकरी से निकाल बाहर किया और पत्नी को भी आश्रम से बाहर का रास्ता दिखाया।

वे आश्रम द्वारा प्रदत्त एक कमरे में रहा करते थे, जिसे, स्वाभाविक ही, उन्हें छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने पास ही दो कमरों का एक घर किराए पर लिया-लेकिन उसका किराया, 4000 रुपए यानी लगभग 65 डॉलर प्रति माह उन्हें अदा करना पड़ता है, जबकि अब परिवार की नियमित आय का कोई जरिया नहीं रह गया है! पिता, जहाँ भी खाना पकाने का कोई काम मिलता है, चला जाता है, जिससे उसे कुछ पैसे मिल जाते हैं। परन्तु वो इतना बेहया है कि कहता है कि वो जहाँ भी जायेगा उसे औरतों की कोई कमी नहीं!

परिवार के लिए यह बहुत मुश्किल समय है और उसके परिवार वाले चाहते होंगे कि वह स्कूल छोड़कर कोई काम पकड़ ले मगर हम चाहते हैं कि रुचि की पढ़ाई न छूटे। हम परिवार के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और जब तक वह पढ़ना चाहे, उसकी पढ़ाई में हर सम्भव मदद करते रहेंगे।

अगर आप रुचि जैसे बच्चों की मदद करना चाहें तो हम आपके आर्थिक सहयोग का स्वागत करेंगे-किसी एक बच्चे या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके भी आप हमारे इस सेवाकार्य में सहभागी बन सकते हैं!