जब आर्थिक समस्याओं के बावजूद लड़के बेहतर शिक्षा प्राप्त करते हैं – 11 जुलाई 2014

परोपकार

आज मैं आपका परिचय अपने स्कूल की दो लड़कियों से करवाना चाहता हूँ। दस वर्षीय वर्षा पहले से हमारे स्कूल की विद्यार्थी है जबकि सात साल की काजल स्कूल की नई विद्यार्थी है।

वर्षा का पिता मालाएँ और दूसरी पूजा की वस्तुएँ बनाता है जिन्हें वह सड़क के किनारे छोटी सी दूकान लगाकर बेचता है। यह धंधा मुख्य रूप से धार्मिक त्योहारों और धार्मिक छुट्टियों पर निर्भर होता है, जब श्रद्धालु अधिक संख्या में बाहर से वृन्दावन आते हैं। इसके अलावा सही समय पर सही जगह समुचित सामान लेकर उपस्थित रहना भी आवश्यक होता है। हम जानते हैं कि यह धंधा आपको अमीर नहीं बना सकता लेकिन जब हमने उसकी पत्नी से पूछा कि उसका पति कितना कमाता है तो हमें कोई स्पष्ट उत्तर प्राप्त नहीं हुआ: वह बिल्कुल नहीं जानती थी। पैसे से और घर खर्च कैसे चलता है, इस बात से उसे कोइ मतलब नहीं था। वह पूरे समय घर में रहकर बच्चों की देखभाल में ही मगन रहती है।

उनका परिवार एक मकान के एक कमरे में रहता है और मकान में वर्षा के पिता के अलावा उसके तीन भाई अपने-अपने परिवारों को लेकर साथ रहते हैं। यानी, हालांकि घर काफी बड़ा है मगर जब सारे सदस्य घर पर मौजूद होते हैं तब वहाँ काफी भीड़-भाड़ हो जाती है। हर परिवार के पास एक कमरा है और उन सभी का अपना अलग काम-धंधा है। वे खाना भी अलग बनाते-खाते हैं। यह प्रदर्शित करता है कि सम्मिलित परिवारों की भारतीय परंपरा धीरे-धीरे टूट रही है। जब हम वहाँ पहुंचे, दरवाजे पर ही हमें यह प्रीतिकर नज़ारा देखने को मिला जिसमें एक माँ अपने तेरह साल के बच्चे को नहला रही थी।

मज़ेदार बात यह है कि वर्षा ने अभी पिछले साल ही हमारे स्कूल से अपर के जी पास किया है जबकि काजल पास के एक सस्ते निजी स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ रही थी और इस साल से हमारे स्कूल में पढ़ने आ गई, लेकिन हमारे यहाँ उसे पुनः शुरू से ही पढ़ना होगा और उसका दाखिला लोअर के जी में ही हो पाएगा। क्यों? क्योंकि पिछले स्कूल में सालों पढ़ाई करने के बावजूद वह ज़्यादा कुछ सीख नहीं पाई है। सिर्फ दो सालों में ही वर्षा ने इतना कुछ सीख लिया है कि उसके अभिभावकों ने निर्णय लिया और उसकी छोटी बहन को भर्ती कराने के लिए इस साल स्कूल सत्र शुरू होने पर वे सबसे पहले हमारे स्कूल में हाजिर हुए, जिससे उनकी छोटी लड़की को भी हमारे यहाँ जगह मिल गई।

कुछ भी हो वे अमीर नहीं हैं और इसीलिए उनके सबसे बड़े बच्चे को, जोकि उनका एकमात्र लड़का भी है, उन्होंने एक निजी स्कूल में भर्ती कराया है, जहाँ पढ़ाई भी कुछ बेहतर है। दोनों लड़कियाँ भी एक निजी स्कूल में ही पढ़ा करती थीं मगर वह सस्ता स्कूल था क्योंकि परिवार की हैसियत नहीं थी कि उन्हें भी बेहतर निजी स्कूल में पढ़ा सकें। तब भी उन्हें पढ़ाना उनके लिए आर्थिक बोझ ही था और जब उन्होंने हमारे स्कूल के बारे में सुना तो पहले वर्षा को हमारे यहाँ भर्ती करा दिया। अब हमारे स्कूल में दोनों लड़कियाँ अपने भाई से भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर पाएँगी और हमें आशा है कि यह शिक्षा उनके जीवन में सार्थक परिवर्तन ला पाएगी।

अगर आप इन लड़कियों की सहायता हेतु जारी हमारी योजनाओं का हिस्सा बनना चाहते हैं तो आप भी किसी एक बच्चे को या हमारे स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके ऐसा कर सकते हैं!

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