जब एक चित्र पूरा सच नहीं दिखा पाता – 30 मई 2013

परोपकार

जब थॉमस और आइरिस पिछली बार यहाँ आए थे, उन्होंने कहा कि हमारे स्कूल के बच्चों के साथ वे कुछ फोटो लेना चाहते हैं। हम लोग उनके साथ मिलकर एक जर्मन चैरिटी संस्था चला रहे हैं और हमें किसी न किसी कारण से चित्रों की ज़रूरत पड़ती ही रहती है। हमने बच्चों के समूह के साथ एक फोटो खिंचाया और फिर एक लड़की से कहा कि हम सब उसके घर आएंगे और उसके घर के कुछ फोटो लेंगे। वह तैयार हो गई। रमोना, पूर्णेन्दु, थॉमस और आइरिस उसके घर गए और वापस आए तो बड़े अनमने से और विचारमग्न दिखाई दिये। रमोना ने उसके घर का जो वर्णन किया उसे मैं आपको विस्तार से बताता हूँ।

वहाँ क्या देखने को मिलेगा इसके बारे में वे बिल्कुल अनजान थे। प्रिया को रमोना स्कूल के कारण जानती है। यहाँ वह यूकेजी, जो प्राथमिक स्कूल से पहले की कक्षा होती है, में पढ़ती है। वह ग्यारह साल की है और स्कूल में आम तौर पर प्रसन्न और मस्त रहती है। सभी जानते थे कि उसका परिवार एक किराए के घर में रहता है और उसकी दो बहनें हैं, लेकिन इसके अलावा कुछ नहीं। जब वे उसकी गली में पहुंचे तो उसके एक पड़ोसी ने बताया कि प्रिया अंदर किसी घर में रहती है। उन्हें आश्चर्य हुआ कि दरवाजा एक नौजवान ने खोला और उन्हें एक साधारण मगर सजी हुई दीवारों वाले और साजोसामान से युक्त कमरे में ले गया और उनसे इंतज़ार करने के लिए कहा। थोड़ी देर बाद प्रिया कमरे में आई, शर्माते हुए सबको नमस्कार किया और अपने साथ आने के लिए कहा। वे सब उसके साथ सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुंचे। कई मंज़िलों वाले उस मकान की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए उन्हें समझ में आया कि वह एक विशाल अपार्टमेंट है और मकान मालिक ने दूसरे परिवारों को कमरे किराए पर चढ़ा रखे हैं। वे तीन मंज़िल चढ़कर ऊपरी छत पर आ गए।

वहाँ और भी तीन कमरे थे और प्रिया उन्हें बीच वाले कमरे में ले गई। संक्षेप में कहना हो तो मैं इतना ही कहूँगा कि वे प्रिया की माँ और बहनों से मिले, फोटो लेने के लिए उनके साथ बैठे, साथ में लाए लोलीपोप बच्चों में बांटे और वापस आ गए। फोटो आप ऊपर देख सकते हैं और उससे अनुमान भर लगा सकते हैं कि कैसे हमारी एक बच्ची वहाँ रहती है। लेकिन सिर्फ इतनी सी बात पर रमोना और उसके साथी अनमने और विचारमग्न नहीं हो गए। यह चित्र प्रिया के परिवार की पूरी वस्तुस्थिति बयान नहीं कर सकता।

चित्र यह नहीं बताता कि लगभग 4 मीटर बाई 3 मीटर का यह कमरा उसमें रहने वाले पाँच प्राणियों की बैठक, रसोई, सोने का कमरा और खेलने की जगह, सब कुछ है। चित्र यह नहीं बताता कि यह कमरा मकान की सबसे ऊपरी छत पर स्थित है जहां सूरज आग उगल रहा होता है और जहां 48 डिग्री सेंटीग्रेड पर हवा शरीर को उबाल सकती है, क्योंकि एक पंखा तक वहाँ नहीं है। चित्र यह नहीं बताता कि प्रिया की छोटी बहन विकलांग और गूंगी है, चल नहीं सकती, बोल नहीं सकती, सुन नहीं सकती। और इस चित्र में आप नहीं देख सकते कि प्रिया की माँ कई जगह काम करती है जिससे वह और उसका पति मिलकर बच्चों के लिए रोटी, वस्त्र और समय-समय पर होने वाली बीमारियों या दीगर खर्चों के लिए पैसों का इंतज़ाम कर सकें। ऊपर से, वहाँ रहने के एवज में प्रिया की माँ को सारे घर की सफाई करनी पड़ती है। आप यहाँ यह भी नहीं देख पाएंगे कि अपने माँ-बाप की अनुपस्थिति में प्रिया की बड़ी बहन, जो खुद अभी 14 साल की बच्ची है, अपनी दोनों बहनों की देखभाल करती है।

फोटो में आपको एक साफ-सुथरा कमरा दिखाई देता है, कमरे में पर्याप्त बर्तन हैं और हर चीज़ करीने से रखी हुई है। लड़कियों के कपड़े बहुत साधारण मगर साफ धुले हुए हैं और उन्होंने कंघी की हुई है। वे साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं। बच्चे हँसते-मुसकुराते और खेलते-कूदते हैं। यह उनका घर है, यह उनका परिवार है, इतना ही वे जानते-समझते हैं। प्रिया की माँ को इतना संतोष है कि प्रिया बिना किसी खर्च के स्कूल जा पा रही है और वहाँ से पेट भर खाना खाकर वापस लौटती है।

कई बार एक चित्र पूरी कहानी बयान नहीं कर पाता और अंगेजी मुहावरे को झुठलाता हुआ ‘1000 शब्दों से ज़्यादा’ कह पाने की बात छोड़िए, उसका बहुत छोटा सा अंश भी नहीं कह पाता।

Leave a Comment