जहां लड़की की पढाई से लड़के की पढाई ज्यादा ज़रूरी मानी जाती है- हमारे स्कूल के बच्चे! 29 नवंबर 2013

आज फिर शुक्रवार है, आपको अपने स्कूल के किसी बच्चे से परिचित करवाने का दिन। आज तमन्ना की बारी है। तमन्ना ग्यारह साल की है और हमारे स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ती है।

तमन्ना का परिवार वृन्दावन के पास स्थित एक गाँव का रहने वाला है। उसके जीवन में कई बार उसे एक जगह से दूसरी जगह भटकना पड़ा है। उनके गाँव में उनके पास एक खेत है लेकिन उससे होने वाली आमदनी से उनके और और तमन्ना के चाचाओं के परिवार का खर्च पूरा हो पाना मुश्किल था। लिहाजा, तमन्ना के पिता ने रोजगार की खोज में दिल्ली चले जाने का निर्णय किया। एक फैक्ट्री में उसे नौकरी मिल भी गई लेकिन दुर्भाग्य से वह फैक्ट्री बंद हो गई। वे दिल्ली के पास स्थित गुड़गांव चले गए और उसके पिता ने वहाँ नौकरी ढूंढ़ ली। वह फैक्ट्री भी बंद हो गई और वे फिर दिल्ली के किसी उपनगर पहुँच गए और उसका पिता वहाँ नौकरी करने लगा। वह एक गोदाम से माल की निकासी की देखरेख करने का काम करता था। लेकिन बाद में उसे ऐसे काम पर लगा दिया गया, जिसे समझना उसके लिए बहुत मुश्किल था। और, इस तरह वह अपनी नौकरी छोड़कर वृन्दावन आ गया।

इस तरह तीन अलग-अलग स्कूलों में पढाई करने के बाद तमन्ना अंततः हमारे स्कूल में चौथी कक्षा में पढने लगी, जब कि उसका भाई हायर सेकंडरी (उच्चतर माध्यमिक) स्कूल में पढ़ रहा है। अब उनका पिता अपने किराए के घर के पास स्टेशनरी की एक छोटी सी दुकान लगाता है, जिसमें वह कापी, पेंसिल और दूसरा लिखने-पढ़ने का सामान बेचता है।

इस काम में भी बहुत आमदनी नहीं है और वह हमेशा आर्थिक तंगी में रहता है: दुकान का मासिक किराया 500 रुपए है, लड़के के स्कूल की फीस 1100 रुपए प्रतिमाह है और फिर 1500 रुपए अपने कमरे का किराया देना पड़ता है, जिसमें सिर्फ एक कमरा और रसोई भर है! सिर्फ इतना मिलाकर ही यह 50 यू एस डालर के बराबर होता है! कभी कभार ही सौभाग्य से वह इतना कमा पाता है मगर इतने से भी काम नहीं चलता-बिजली, भोजन और दूसरे खर्चे भी होते हैं, जिनके लिए रुपयों की ज़रूरत पड़ती है! अक्सर उन्हें अपने परिवार से मदद की गुहार करनी पड़ती है और तमन्ना के दादा कुछ हफ्तों में आते रहते हैं और खेत से होने वाली आमदनी में से थोड़ा-बहुत उन्हें दे जाते हैं।

जब हमने लड़के की फीस के बारे में सुना तो हम आश्चर्यचकित रह गए: हमारे स्कूल के पास ही स्थित एक महंगे स्कूल में वे अपने लड़के को भेज रहे हैं, जबकि उनके खाने के लाले पड़ रहे हैं! वैसे वे पढ़ाई-लिखाई का महत्व पहचानते हैं और अपने लड़के को अच्छे से अच्छी शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं, लेकिन सिर्फ लड़के को; अपनी लड़की की शिक्षा के प्रति वे उतने जागरूक नहीं है! अगर वह हमारे स्कूल में, जहां मुफ्त शिक्षा दी जाती है, न पढ़ रही होती तो वे भाई की तरह उसे इतने महंगे स्कूल में नहीं भेजते!

तमन्ना की माँ बताती है कि संभव है इस साल स्कूल बंद होने के बाद उन्हें अपने गाँव वापस जाना पड़े और यह लड़के की पढ़ाई के लिए बहुत बुरा होगा। लेकिन तमन्ना यहीं रहना चाहती है। उसके पास सोने के लिए बिस्तर नहीं है और उसे भाई के साथ एक चटाई पर सोना पड़ता है फिर भी वह वृन्दावन में ही खुशी-खुशी रह सकती है।

वह स्कूल जाना पसंद करती है और उसकी कई सहेलियाँ हैं। उसके शिक्षक बताते हैं कि परीक्षा में उसके नंबर दर्शाते हैं कि उसे कौन सा विषय पसंद है: अंग्रेज़ी वह अच्छा पढ़ रही है मगर हिन्दी के साथ उसे समस्या है। अपनी सबसे अच्छी सहेली, तीसरी में पढ़ने वाली, रवीना के साथ वह स्कूल आती है और वापस घर जाती है। वह उसकी बहन जैसी लगती है मगर वह उसके मकान-मालिक की बेटी है। आपसे रवीना का परिचय मैं अगले हफ्ते करवाऊँगा!

मुफ्त शिक्षा और भोजन मुहैया करते हुए हम अपनी क्षमता के अनुसार तमन्ना की मदद कर रहे हैं। हम आशा करते हैं कि वे वृन्दावन में ही रहे आएंगे, जिससे उस लड़की की शिक्षा में एक बार फिर कोई व्यवधान उपस्थित न हो।

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