दो लड़कियां और उनकी परेशान माँ: सब कुछ ठीक है, बस पैसा ही नहीं है! हमारे स्कूल के बच्चे-13 सितंबर 2013

आज मैं आपको दो बहनों से मिलवाना चाहता हूँ जो हमारे स्कूल की विद्यार्थी हैं: सात साल की कुमकुम और पाँच साल की राधिका। कुमकुम पिछले तीन साल से हमारे स्कूल में पढ़ रही है और दो प्री-स्कूल परीक्षाएँ (कक्षाएँ) उत्तीर्ण करने के बाद अब पहली कक्षा में है। उसकी छोटी बहन, राधिका, इसी साल से पढ़ने आ रही है और वह हमारी सबसे निचली कक्षा में है, अर्थात एल के जी में।

जब हम उनके घर पहुंचे कुमकुम और राधिका घर में नहीं थीं। वहीं आसपास, वृन्दावन के इस गरीब इलाके की धूल भरी सड़क पर दोनों खेलने में मगन थीं। उनके पड़ोस में अगणित बच्चे हैं और हर कोई एक दूसरे को जानता है इसलिए उनकी माँ को अपनी लड़कियों की चिंता नहीं करनी पड़ती। उन्हें खेलने के लिए साथियों की तलाश में कहीं दूर जाना ही नहीं पड़ता और इसके अलावा, कुछ अप्रत्याशित होने पर पास-पड़ोस के लोग तो हैं ही, उनका ख्याल रखने के लिए। उन्हें वापस लेकर आने के लिए भी उसे नहीं जाना पड़ता। उसने सिर्फ पास खेल रहे बच्चे से उन्हें बुला लाने को कहा।

हमने कुमकुम और राधिका की माँ से कुछ हल्की-फुलकी बातें कीं। उसने बताया कि उन्होंने यह मकान खुद अपने हाथों से बनाया है लेकिन इस इलाके में रहने वाले दूसरे कई लोगों की तरह उन्हें भी सिर्फ कर्ज़ चुकाने के लिए ही नहीं बल्कि दैनंदिन के खर्चे उठाने के लिए भी पैसे की किल्लत रहती है। लड़कियों का पिता एक राजगीर के यहाँ मजदूरी करता है और उसकी मासिक आमदनी कस्बे में उपलब्ध काम पर निर्भर करती है।

उसने हमें बताया कि उसका एक और बच्चा है, तीन साल का लड़का, जिसे उसकी सास हमारे आने से पहले कहीं घुमाने ले गई है। लड़का और उसकी बहनें सामान्य, स्वस्थ बच्चे हैं-उनकी माँ ने हमसे कहा कि सिर्फ इस बात से वह बड़ी परेशान रहती है कि उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं है।

लेकिन जब लड़कियों की शिक्षा की बात निकली तो उसके चेहरे पर मुस्कान खेल गई और उसने हमसे कहा कि कुमकुम इतने कम समय में ही काफी कुछ सीख गई है। वह बड़ी खुश है कि उसकी लड़कियां हमारे स्कूल में मुफ्त शिक्षा पा रही हैं। इससे उनके सिर पर इस चिंता का बोझ नहीं रहता कि अगले साल वे बच्चों की किताबें, वर्दियाँ, कलम, रबर, पेंसिल, शार्पनर आदि आदि खरीद पाएंगे या नहीं!

हमारे लिए एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कुमकुम और राधिका, दोनों को हमारा स्कूल बहुत पसंद है और वे अपना सबसे खुशगवार समय यहीं बिताती हैं। उनके अड़ोस-पड़ोस के बहुत से बच्चे भी हमारे स्कूल में ही पढ़ते हैं इसलिए वैसे भी वहाँ पहले से उनके जान-पहचान के मित्र होते हैं। इसके अलावा, शिक्षक बताते हैं कि दोनों लड़कियां पढ़ाई में भी काफी अच्छी हैं। वे वहाँ पढ़ती हैं, पास होती हैं और मज़े करती हैं। उन्हें और क्या चाहिए?
वे बताती हैं कि उन्हें अपने छोटे भाई के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है और राधिका आगे जोड़ देती है: एक दिन वह भी हमारे साथ स्कूल आएगा!

हाँ राधिका, हम यहाँ उसका स्वागत करने के लिए अभी से तैयार खड़े हैं!

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