परिवार के ग्यारह सदस्यों बीच कमाने वाले सिर्फ दो – हमारे स्कूल के बच्चे – 2 अक्टूबर 2015

आज मैं आपका परिचय एक लड़के और उसके परिवार के साथ करवाना चाहता हूँ। उसका नाम घनश्याम है। वह छह साल का है और परिवार के तीन बच्चों में सबसे बड़ा है।

घनश्याम का पिता मजदूर है और उसे रोज़ किसी न किसी ठेकेदार के पास काम ढूँढ़ने उनके निर्माण स्थलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी-कभी दूकानों से निर्माण-स्थलों तक सामान ढोने का काम ही मिल पाता है तो वही करना पड़ता है। लेकिन फिर भी काम उसे रोज़ नहीं मिल पाता और इसलिए उसके परिवार को पता ही नहीं है कि कुल मिलाकर हर माह वह कितना कमा लेता है।

लेकिन खाने वाले मुँह कम नहीं हैं! परिवार के सिर्फ दो सदस्य, घनश्याम का पिता और उसका दादा, रोज़ पैसे कमाकर लाते हैं। घनश्याम की दादी के सात बच्चे थे: दो लड़के और पाँच लड़कियाँ। लड़कियों में तीन की शादियाँ हो चुकी हैं इसलिए उनके साथ नहीं रहतीं मगर बाकी की दो बहनें अभी उनके साथ ही रहती हैं। उनका एक लड़का एक दुर्घटना में कालकलवित हो गया और उसकी पत्नी भी एक बीमारी का शिकार हो गई। उनके दो बच्चे भी उन्हीं के साथ रहते हैं। और फिर घनश्याम के माता-पिता और उनके तीन बच्चे तो हैं ही। सभी को खाने के लिए भोजन चाहिए, कपड़े लत्ते और अन्य आवश्यक वस्तुएँ चाहिए और इसके अलावा, परिवार में दवा-दारू और तीज-त्योहार के दूसरे खर्चे तो लगे ही रहते हैं।

इसीलिए परिवार हमारे पास आया और अपने सबसे बड़े बच्चे को हमारे स्कूल में दाखिल करा दिया। घनश्याम पहले एक निजी स्कूल में पढ़ता था लेकिन उसकी पढ़ाई का नियमित खर्च उन पर बहुत बड़ा बोझ बन गया था। आखिर जब उन्हें हमारे स्कूल के बारे में पता चला तो उन्होंने सोचा, एक बार चलकर किस्मत आजमाई जाए और उसे हमारे यहाँ दाखिला मिल गया!

आप कल्पना कर सकते हैं कि वे किस तरह सुकून से भर गए होंगे कि अब घनश्याम हमारे स्कूल में पूरी तरह मुफ्त पढ़ाई कर सकता है। और घनश्याम भी बहुत खुश है-वह मन लगाकर पढ़ाई करता है, बहुत से दोस्त बना लिए हैं। है भी वह बहुत प्यारा, खुशमिजाज़ लड़का!

घनश्याम जैसे बच्चों की आप भी मदद कर सकते हैं! किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके!

Related posts

रोशनी और कृष्णकांत

सिर्फ रहने के स्थान के बदले में दिन भर मजदूरी करना – हमारे स्कूल के बच्चे – 22 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों का परिचय अपने स्कूल के दो बच्चों से करवा रहे हैं। उनकी माँ एक विशाल घर ...
मोनिका

मोनिका अपनी अंतिम बड़ी शल्यक्रिया के लिए तैयार है – 19 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु निकट भविष्य में होने वाली मोनिका की तीसरी शल्यक्रिया के बारे में लिख रहे हैं। मोनिका उनके स्कूल ...
Mohini with her father

जब एक नाई लड़का पैदा करने के चक्कर में पाँच-पाँच बच्चे पैदा कर देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 15 जनवरी 2016

स्वामी बालेंदु एक नाई की बेटी, मोहिनी का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं, जो उनके चैरिटी स्कूल में ...
हर साल घर में पानी घुस जाता है

हर साल घर में पानी घुस जाता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 18 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो सबसे गरीब परिवार से आने वाले बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। हर साल ...
नाई, जिसके पास स्कूल की फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं

नाई, जिसके पास स्कूल की फीस भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं – हमारे स्कूल के बच्चे – 11 दिसंबर-2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के दो बच्चों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं। उनका पिता नाई है और ...

टायर मरम्मत के काम से इतनी कमाई नहीं होती कि स्कूल की फीस भरी जा सके – हमारे स्कूल के बच्चे – 4 दिसंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने चैरिटी स्कूल की दो लड़कियों का परिचय अपने पाठकों से करवा रहे हैं, जिनके नाम सुनीता और ...

सिर्फ आधा माह काम करके परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल होता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 27 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल की एक लड़की का परिचय अपने पाठकों से करवाते हुए उसके परिवार की व्यथा-कथा लिख रहे ...

जब पिता बनने की ज़िम्मेदारी सिर पर पड़ी तभी पैसे कमाना शुरू किया – हमारे स्कूल के बच्चे – 20 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने पाठकों से अपने स्कूल के एक लड़के का परिचय करवा रहे हैं, जिसका परिवार बिना बिजली के ...

चाय बेचकर स्कूल का खर्च नहीं उठाया जाता – हमारे स्कूल के बच्चे – 13 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु पाठकों से अपने स्कूल के तीन बच्चों का परिचय करवा रहे हैं। उनका पिता एक चाय की गुमटी ...

अपने बच्चों के घर दोबारा जाने पर हमें सकारात्मक विकास दिखाई देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 6 नवंबर 2015

स्वामी बालेंदु अपने स्कूल के एक बच्चे का परिचय करवा रहे हैं, जिसके सहोदर भाई-बहनों के बारे में वे पहले ...

Leave a Reply