नदी के किनारे घर होने पर उठने वाली समस्याएँ – हमारे स्कूल के बच्चे – 4 अप्रैल 2014

परोपकार

हमारे स्कूल में वार्षिक परीक्षाएँ शुरू हो चुकी हैं और जहां बच्चे पढ़ाई में बुरी तरह व्यस्त हैं हम लोग उनके परिवारों से मिलने का अभियान जारी रखे हुए हैं, जिससे मैं ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों से आपको मिलवाना जारी रख सकूँ। इस बार वैशाखी और पल्लवी की बारी है।

वैशाखी बारह साल की है और वृन्दावन में ही पैदा हुई है, उसी साल जब उसके माता-पिता बंगाल से आकर यहाँ बस गए थे। दो साल बाद उसकी छोटी बहन, पल्लवी पैदा हुई। वृन्दावन में दंपति की शुरुआत अच्छी नहीं रही। बहुत से दूसरे लोगों की तरह वे लोग भी बंगाल के बहुत गरीब इलाके से यहाँ आए थे और काम तलाश रहे थे, जिससे कुछ पैसे कमाएं और यहाँ अपने भविष्य की इमारत खड़ी कर सकें। वे बिल्कुल पढे-लिखे नहीं थे इसलिए उन्होंने उस तरफ का रुख किया जिधर उनके इलाके के अधिकांश लोग चल पड़ते हैं: यानी धार्मिक वृन्दावन।

उन्होंने जितना आसान समझा था यह काम उतना आसान नहीं था और इसलिए आज भी वे संघर्ष कर रहे हैं। पति-पत्नी अलग-अलग मंदिरों में कीर्तन करने जाते हैं। दोनों मिलकर लगभग 50 डॉलर यानी 3000 रुपए रोज़ कमाते हैं। इन रुपयों से उन्होंने एक महिला का, जो खुद भी बंगाली ही है, मकान किराए पर लिया है।

यह मकान वृन्दावन की सरहद पर स्थित है, यमुना नदी के तट पर। हर साल बारिश में बाढ़ का पानी उनके घर के दरवाजे तक चला आता है और उनके लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कभी-कभी पानी उनके घर के भीतर भी आ जाता है। घर के सामने एक छोटा सा बगीचा भी है, अलग संडास और पानी का हैंड पंप भी है। आप कल्पना कर सकते हैं कि किस तरह का पानी इस पंप से आता होगा, क्योंकि वह इस प्रदूषित नदी के बहुत किनारे लगा हुआ है। वे वही पानी पीते हैं क्योंकि और कोई चारा भी नहीं है।

उनका घर मुख्य सड़क से काफी दूर है और दोनों बच्चों को काफी पैदल चलकर उस जगह तक आना पड़ता है, जहां हमारी स्कूल-वैन उन्हें लेने आती है। उनके घर के आसपास चारों ओर रेत फैली हुई है और नदी की रेत में पैदल चलना आसान नहीं होता। लेकिन स्कूल के लिए यह मशक्कत उन्हें रोज़ करनी पड़ती है और इसके अलावा सप्ताह में तीन दिन डांस क्लास जाते हुए भी: एक परोपकारी महिला उन्हें मुफ्त नृत्य सिखाती हैं।

वैशाली बहुत खुशमिजाज़ और बातूनी लड़की है। खासकर जब वह अपनी सहेलियों के साथ होती है तो गप्पें हाँकने में वह सबसे आगे होती है। इस कारण कई बार उसकी अपनी कक्षा के लड़कों और दूसरी लड़कियों से छोटी-मोटी लड़ाइयाँ भी होती रहती हैं-लेकिन वे लड़ाइयाँ इतनी गंभीर नहीं होतीं कि आपसी बातचीत से शांतिपूर्वक न सुलझाई जा सकें।

पल्लवी अपनी बहन से बहुत अलग है। वह स्थिरचित्त है बल्कि बहुत शांत सी, चुप्पी सी है और जब उसकी बहन बातचीत में उलझी होती है तो उसकी तरफ मुंह लगाकर देखती भर रहती है।

स्कूल की पढ़ाई में दोनों बहनें बहुत अच्छी नहीं हैं और शिक्षकों ने उन्हें उस कक्षा में रखा है, जहां आवश्यकतानुसार उन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वहाँ वे बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकती हैं, सीख सकती हैं और भविष्य में अपनी शिक्षा के जरिये अपने अभिभावकों की मदद भी कर सकती हैं।

अगर आप चाहें तो किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या हमारे स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन की व्यवस्था करके इन दो लड़कियों जैसे दूसरे बच्चों की मदद कर सकते हैं।

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