जो भी, जैसा भी काम मिला, कर लिया – हमारे स्कूल के बच्चे – 12 दिसंबर 2014

परोपकार

आज एक बार फिर मैं अपने स्कूल के बच्चों का परिचय आपसे करवाने हेतु अपने ब्लॉग का उपयोग कर रहा हूँ। आज आपको तीन बच्चों से मिलने का मौका मिलेगा: रक्षा, नितिन और अंजलि।

ये तीन भाई-बहन क्रमशः दस, आठ और छह साल के हैं: रक्षा सबसे बड़ी है, नितिन मंझला है और अंजलि सबसे छोटी है। दो साल पहले वे और उनके माता-पिता उनके दादा-दादी के साथ रहने वृन्दावन आए थे। गाँव उन्होंने हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ दिया है क्योंकि खेती से इतनी आमदनी नहीं हो पाती कि सारे परिवार की अनिवार्य आवश्यकताएँ भी पूरी हो सकें!

बच्चों के दादा-दादी काफी पहले से ही वृन्दावन में निवास कर रहे हैं और हेल्पर, सहायक आदि कोई भी काम, जहाँ भी, जैसा भी मिलता है, करते हैं और किसी तरह अपना पेट पाल रहे हैं। अब उनके साथ उनका बेटा भी जुड़ गया है: वैसे तो वह एक जगह सुरक्षा गार्ड है मगर जब भी वहाँ से छुट्टी पाता है, किसी न किसी निर्माण स्थल पर काम पकड़ लेता है। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य काम का प्रस्ताव रखता है तो वह उसे भी सहर्ष स्वीकार कर लेता है। रक्षा की माँ भी अपने स्तर पर सिलाई आदि का काम करके परिवार की आमदनी में अपना अंशदान देती है।

यह भी अच्छा है कि अपने घर का किराया उन्हें नहीं देना पड़ता क्योंकि जिस बड़े से मकान में वे रह रहे हैं, स्वाभाविक ही उसकी देखभाल और सुरक्षा भी करते हैं। जिसका मकान है, उसे अभी उसकी ज़रूरत नहीं है इसलिए वह उनसे किराया नहीं लेता।

इन सबका मिलाजुला नतीजा यह है कि उन्हें बहुत ज़्यादा आर्थिक कष्ट नहीं है और भोजन और कपड़े-लत्तों का जुगाड़ आसानी के साथ हो जाता है-लेकिन किसी सामान्य निजी स्कूल में तीन-तीन बच्चों की फीस देना और महंगी पढ़ाई के दूसरे खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं हो पाता!

इसलिए हमने सभी, तीन बच्चों को अपने स्कूल में दाखिल कर लिया है और दो बड़े बच्चों को लगभग दो साल से और अंजलि को इसी साल की शुरुआत से अपने यहाँ पढ़ा रहे हैं। उन्हें हमारे स्कूल आना पसंद है और उनके बहुत से दोस्त बन गए हैं और सबसे बड़ी बात यह कि वे सभी दिल लगाकर पढ़ाई भी कर रहे हैं! हमारे स्कूल की शिक्षिकाएँ अपने प्रयासों को फलीभूत होता देखकर बहुत खुश होती हैं और अंजलि कि माँ बताती है कि रोज़ सबेरे स्कूल जाते हुए छुटकी बिटिया की खुशी देखते ही बनती है!

यह देखकर संतोष और हर्ष होता है कि हम उनकी मदद के लिए कुछ कर पा रहे हैं। अगर आप भी उन जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो हमारी इस परियोजना का हिस्सा बन सकते हैं! किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करें!

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