ऊपरी छत पर एक तपते कमरे में छह लोगों का निवास – हमारे स्कूल के बच्चे – 10 अप्रैल 2015

परोपकार

आज आप हमारे स्कूल की दो और लड़कियों का परिचय प्राप्त करेंगे: जानकी और शशि। लड़कियाँ क्रमशः चौदह और ग्यारह साल की हैं और अपनी एक बहन, एक भाई और माता-पिता के साथ एक कमरे वाले किराए के घर में रहते हैं, जो स्कूल के पास ही स्थित है और जहाँ से वे पैदल स्कूल आ-जा सकती हैं।

हम जानकी और शशि के साथ ही उनके घर गए और रास्ते में हमने नोटिस किया कि आजकल अच्छी ख़ासी गर्मी पड़ने लगी है। जब हमने उनके मकान में प्रवेश किया तो थोड़ी राहत मिली मगर राहत क्षणिक ही थी: सामने वाले ढँके और बंद हाल से होकर और एक कोने में स्थित सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर जाना पड़ता है, तब उनका कमरा आता है, जिसके ऊपर सिर्फ धधकता सूरज है। वे हमें अंदर बुलाते हैं और हम छह लोग उस तपते कमरे में ठसकर बैठ जाते हैं। और छह लोगों का यह परिवार इसी एक कमरे में किराए पर रहता है। उनका बेडरूम, बैठक, रसोई और बच्चों के खेलने की जगह, सब कुछ यही है। नीचे हाल में ही एक हैंडपंप है, जहाँ से पानी भरकर लाया जाता है और नहाया-धोया जाता है। और संडास? नहीं है, उसके लिए खेतों की तरफ भागना पड़ता है!

इस कमरे का मासिक किराया 1000 रुपए यानी लगभग 16 यू एस डॉलर है, जोकि शशि के पिता की मासिक कमाई का पाँचवा हिस्सा है। वह वृन्दावन का ही रहने वाला है और साधारण मजदूर (अकुशल श्रमिक) है। पहले वह रिक्शा चलाता था लेकिन अब वृन्दावन के मुख्य मंदिर में द्वारपाल है। शशि का 18 साल का एक बड़ा भाई है, जो पेंटिंग का काम सीख रहा है। वह भी कभी-कभी थोड़ा-बहुत कमाकर ले आता है लेकिन इतना नहीं कि उसका उल्लेख किया जाए।

और जब पाँच साल पहले हमारे स्कूल के एक बच्चे की माँ से उन्हें हमारे स्कूल में अपनी तीन लड़कियों के दाखिले की संभावना का पता चला तो उन्होंने खुशी-खुशी अपने बच्चों को हमारे स्कूल में भर्ती करा दिया। लड़कियाँ हमारे स्कूल में पढ़ने लगीं। जानकी और शशि दोनों पढ़ती रहीं मगर उनकी तेरह साल की बेटी कृष्णा ने दो-चार हफ्ते स्कूल आने के बाद यह कहकर पढ़ाई छोड़ दी कि उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता और वह और आगे पढ़ाई करना नहीं चाहती। वे उसे किसी दूसरे स्कूल में भेजने की कोशिश करते रहे इसलिए हमने भी हमारे यहाँ पढ़ने के लिए कोई ज़ोर नहीं डाला। लेकिन अब हमें पता चला है कि वह किसी भी स्कूल में पढ़ने नहीं जाती! अतः हमने उसे फिर से हमारे स्कूल आने के लिए मना लिया है और अगले साल से वह हमारे यहाँ पढ़ने लगेगी!

दोनों लड़कियाँ खुशमिजाज़ और बातूनी हैं, उनके साथ पढ़ने वाली कई लड़कियाँ उनकी दोस्त बन गई हैं और वे सब स्कूल आकर बहुत खुश होती हैं। दोनों ही पढ़ाई के लिहाज से औसत विद्यार्थी हैं-लेकिन हमारे लिए वे औसत से अधिक ही हैं। हमारे स्कूल के दूसरे सभी बच्चों की तरह उनकी भी एक कहानी है, एक गरीब परिवार है और एक खास पृष्ठभूमि है। उनकी एक अलग शख्सियत है और हम सभी से प्रेम करते हैं, उन्हें आगे बढ़ता, विकास करता, अधिक से अधिक पढ़ता-लिखता देखकर हमें बड़ा आनंद प्राप्त होता है!

अगर आप शशि और जानकी जैसे बच्चों और उनके परिवारों की मदद करना चाहें और किसी एक बच्चे या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित कर सकें तो हम कृतज्ञ होंगे!

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