मैं पहले ही आपका परिचय बबीता और सीमा से करवा चुका हूँ, जो अपने परिवार के साथ खेतों में रहने के लिए मजबूर हैं। बबीता का चाचा हमारे स्कूल की तीन अन्य लड़कियों का पिता है: गायत्री, त्रिवेणी और भूदेवी। जल्द ही उनकी चौथी बहन सपना भी उनमें शामिल हो जाएगी और हमारे स्कूल के लोअर के-जी में पढ़ने लगेगी।
गायत्री पंद्रह साल की है और त्रिवेणी, भूदेवी और सपना क्रमशः ग्यारह, नौ और सात साल की हैं। गायत्री पाँचवी कक्षा में और त्रिवेणी और भूदेवी, दोनों, दूसरी कक्षा में पढ़ती हैं। उनके सहोदर एक बहन और एक भाई और हैं, जो क्रमशः पाँच और तीन साल के हैं। पहली नज़र में ही यह लड़के की ख़्वाहिश और उसे पैदा करने के प्रयास में पाँच लड़कियां पैदा करने का सटीक उदाहरण लगता है। ज़्यादातर लोगों के लिए यह बिल्कुल समझ में आने वाली बात नहीं है, विशेष रूप से इसलिए कि वे इतने गरीब हैं कि अपने बच्चों को एक सामान्य स्कूल में भेज पाना भी उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है। लेकिन जब आप उनके परिवार को ज़्यादा करीब से देखते हैं तो एक और पहलू नज़र आता है, जिसके बाद इस मामले को समझना और भी मुश्किल हो जाता है: इन बच्चों का पिता मानसिक रूप से विक्षिप्त है।
गायत्री की माँ ने बताया कि उनका विवाह 21 साल पहले हुआ था। लगभग 18 साल पहले, यानी उनकी बड़ी बेटी, गायत्री के जन्म से दो साल पहले, उसके पति को मिर्गी के दौरे पड़ना शुरू हो गए और सामान्य होने से पहले वह लगभग पागलपन का व्यवहार करने लगता था। पागलपन के दो दौरों के बीच का अंतराल धीरे-धीरे कम से कमतर होने लगा और फिर वह पूरे समय के लिए अजीबोगरीब और सनकी व्यवहार करने लगा। वे लोग उसे डॉक्टर के पास ले गए, आगरा और दिल्ली में इलाज कराया, बहुत सी दवाइयाँ उसे लेनी पड़ीं मगर कोई लाभ नहीं हुआ है-ऐसा लगता था कि वह किसी दूसरी दुनिया में रह रहा है, दिन भर पागलों की तरह इधर-उधर भटकता रहता था और साफ पता चलता था कि उसका विक्षित मस्तिष्क ही उससे ऐसा असामान्य व्यवहार करवाता है।
जो आदमी अब अपनी बैलगाड़ी भी चला नहीं पाता, जो कोई काम नहीं करता, जो कुछ कमाता नहीं है, उस आदमी से उसकी पत्नी के छह बच्चे हैं! अगर पहला बच्चा लड़का होता तो शायद वह एक ही बच्चा पैदा करती।
अब उनकी परवरिश की ज़िम्मेदारी गायत्री के पिता के सात भाइयों पर आ गई है और उनका परिवार अपने खेतों में रहने के लिए मजबूर हैं और अपनी भैंस का दूध बेचकर किसी तरह अपना खर्च चला रहे हैं। कभी-कभी, जब पैदावार अच्छी होती है तो वे थोड़ा-बहुत अनाज और सब्जियाँ बेचकर भी कुछ रुपये कमा लेते हैं। लेकिन क्योंकि खेत उस परिवार की साझा संपत्ति है, इस बात पर सहमति बनना आसान नहीं होता कि किसे कितना रुपया प्राप्त होगा। कुल मिलाकर, उस परिवार की मासिक आमदनी 35 डालर यानी लगभग 2000 रुपए है और इस आमदनी पर आठ लोगों का परिवार गुज़ारा करता है।
फिर भी, ये लड़कियां हमारे स्कूल की सबसे ज़्यादा खुशमिजाज़ विद्यार्थी हैं। वे अपने खेत वाले घर के प्राकृतिक वातावरण में रहती हैं, जहां हर तरफ हरियाली फैली होती है, हालांकि कभी-कभी वहाँ खतरनाक सांप भी निकल आते हैं, जो उनके सुकून में खलल पैदा करते रहते हैं! स्कूल में दोनों छोटी लड़कियां हमेशा अपनी चचेरी बहनों, सीमा और बबीता के साथ साथ दिखाई देती हैं, जबकि गायत्री की कुछ अच्छी सहेलियाँ भी बन गई हैं, जो उसके साथ उसकी कक्षा में पढ़ती हैं।
अगर आप इन बच्चों जैसे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो आप उन बच्चों का भविष्य सँवारने के हमारे काम में हाथ बंटाकर ऐसा कर सकते हैं: किसी एक बच्चे को प्रायोजित कीजिए या बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च वहन कीजिए! हर तरह की मदद अंततः उनके लिए उपयोगी सिद्ध होती है!
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