बाढ़ प्रवण क्षेत्र में दो कमरों में छः वयस्क और दो बच्चे – हमारे स्कूल के बच्चे- 30 अगस्त 2013

अपने बच्चों के विषय में हर शुक्रवार, नियमित रूप से जारी होने वाली हमारी रिपोर्टें और बच्चों के घरों के वीडियो देखकर हमारी एक स्पोंसर ने ईमेल भेजकर पूछा कि क्या उसके द्वारा प्रायोजित बच्चे के घर से भी हम ऐसा वीडियो बनाकर लाएँगे और उसका भी परिचय करवाएँगे। वह उस लड़के के बारे में, उसके रहन-सहन के बारे में कुछ विस्तार से जानना चाहती थी और साथ ही उसके परिवार से 'मिलना' भी चाहती थी। वैसे भी हमने तय किया था कि हम लोग एक-एक करके सभी बच्चों के पास जाएंगे और उन्हें आपसे मिलवाएँगे, इसलिए हमें मुरारी से मिलने में कोई दिक्कत नहीं थी!

मुरारी 13 साल का है और पाँच साल से हमारे स्कूल में पढ़ रहा है। नर्सरी (pre-school) से शुरू करके अब वह तीसरी कक्षा में है। वह अपने परिवार के साथ रहता है और उसके दो बड़े भाई हैं, जिनकी उम्र 26 और 24 साल है। इस तरह बहुत समय तक, पिछले साल तक, जब उसके सबसे बड़े भाई की पत्नी ने एक शिशु यानी उसके भतीजे को जन्म दिया, वह घर का बेबी-बॉय रहा है। बच्चे के जन्म की घटना से पहले उनके यहाँ एक और सुखद कार्य, दूसरे भाई के विवाह, सम्पन्न हुआ था। इस भाई की पत्नी भी अब उनके साथ ही रहती है, जैसा कि भारत में सामान्य सी बात है। अर्थात, अब उस दो कमरे, एक संडास और थोड़ी सी खुली जगह वाले घर में छह वयस्क, मुरारी और वह छोटा शिशु एक साथ रहते हैं। उसी खुली जगह में हमने उनसे बातचीत की।

मुरारी के पिता के साथ अपनी बातचीत के दौरान ही हमें पता चला कि पहले वह एक बढ़ई था लेकिन बढ़ती उम्र और एक सड़क दुर्घटना के बाद, जैसा कि उसने बताया, उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती और वह लकड़ी के साथ कठोर श्रम कर पाने में असमर्थ है और जब कभी मिल जाता है, छोटा-मोटा फुटकर काम कर लेता है। इस काम से ज़्यादा आमदनी नहीं हो पाती मगर उसके दोनों बड़े लड़के मजदूरी करते हैं और हालांकि इन सबकी कुल आमदनी भी पर्याप्त नहीं होती, परिवार किसी तरह चल रहा है।

अपनी छत पर वे एक और कमरा बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं, जिससे सबसे बड़ा भाई और उसकी पत्नी अलग कमरे में रह सकें। इससे एक और लाभ यह होगा कि बारिश के दिनों में, जैसा कि इस बाढ़ प्रवण इलाके में अक्सर होता है, अगर पानी बढ़कर घर में आने लगे तो वे वहाँ जाकर कुछ दिन रह सकते हैं।

मुरारी का घर संजू, जिससे हम पहले ही आपको मिलवा चुके हैं, के घर से ज़्यादा दूर नहीं है। सन 2010 में, जब वृन्दावन में बहुत बाढ़ आई थी, मुरारी के घर में बाढ़ का पानी घुस गया था और वह बाढ़ उतरने तक आश्रम में रहने आया था। परिवार के दूसरे सभी लोग, चोरों के डर से, कई दिन छत पर डेरा डाले पड़े रहे। उन्हें डर था कि कहीं उनका थोड़ा-बहुत सामान भी चोर उठाकर न ले जाएँ।

जबकि पानी की समस्या वहाँ बनी ही रहती है, मुरारी उस जगह से प्रेम करता है और वहीं रहता है। "मेरे स्कूल के सभी दोस्त वहीं आसपास ही रहते है," वह कहता है। अभिभावक खुश हैं कि वे मुरारी को हमारे स्कूल भेज सके, जिससे उन पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कुछ कम हो सका। उन्हें उम्मीद है कि पढ़कर मुरारी अच्छी आमदनी वाली कोई नौकरी पा लेगा, क्योंकि अभी से वह परिवार के किसी भी सदस्य से ज़्यादा अंग्रेज़ी जानता है। उसके शिक्षक सहमत हैं-मुरारी अच्छा विद्यार्थी है, पढ़ने में तेज़ है और अगर अपने यार-दोस्तों से अपना ध्यान हटाकर एकाग्र होकर पढ़ाई करे तो वह और भी अच्छी तरह से और ज़्यादा जल्दी विषय को पकड़ सकता है, उन्हें आपस में जोड़ सकता है और उन्हें बेहतर ढंग से समझ सकता है।

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