सात बच्चे और चार खरगोश – हमारे स्कूल के बच्चे – 8 मई 2015

आज मैं आपका परिचय एक ऐसी बच्ची से करवाना चाहता हूँ, जिसका घर हर वक़्त ज़िन्दगी की हलचल से गुंजायमान रहता है! क्यों? क्योंकि 12 साल की रुखसार अपने छह सहोदरों, माता-पिता और दादा-दादी के साथ वहाँ रहती है-ऊपर से एक खरगोश और उसके तीन बच्चे भी हमेशा उछल-कूद मचाए रहते हैं!

रुखसार का परिवार मुसलमान है और वृन्दावन के उस इलाके में रहता है जहाँ मुस्लिम समुदाय रहता है और नमाज़ पढ़ने के लिए एक मस्जिद भी है। यह घर रुखसार के दादा-दादी का है जो अब निचली मंज़िल पर रहते हैं। यह घर उत्तराधिकार में रुखसार के पिता को मिलेगा और अभी वह अपने परिवार के साथ ऊपरी मन्ज़िल पर रहता है। उनके पास वहाँ एक कमरा, एक हाल, रसोई और, छोटी सी खुली छत पर संडास है। घर काफी बड़ा प्रतीत होता है लेकिन तब तक ही, जब तक आपको पता नहीं होता कि उतनी जगह में कुल नौ प्राणी रहते हैं! स्वाभाविक ही उनमें से कुछ लोग नीचे, अपने दादा के यहाँ रात को सोने जाते हैं! और इन सबके बीच तीन खरगोश के बच्चों और उनकी माँ की धमाचौकड़ी चलती ही रहती है। नरम और गुदगुदे खरगोश के बच्चे पालना और उनकी देखभाल करना लड़कियों को बड़ा प्रिय है!

परिवार में सबसे बड़ा बच्चा 16 साल का लड़का है। उसके बाद 14, 13, 12, 9, 7, और 6 साल की छह लड़कियाँ हैं! इस तरह वह ग्यारह लोगों का विशाल कुनबा है, जिसका पालन-पोषण सिर्फ पिता और सबसे बड़े बेटे की मिली-जुली कमाई से होता है। लड़का वेल्डिंग का काम करता है और पिता हिन्दू देवी-देवताओं के वस्त्र सीता है। दोनों लगभग 80-80 डॉलर यानी 5000-5000 रूपए प्रतिमाह कमाते हैं। लेकिन इतनी आमदनी परिवार के खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त नहीं है, लिहाजा बड़ी लड़कियाँ घुँगरू और पाज़ेब बनाने का काम करती हैं, जिन्हें काफी सस्ती कीमत पर, दो रुपए प्रति पाज़ेब, बेचा जाता है। जब 14 और 13 साल की लड़कियाँ उन्हें बनाती होती हैं, छोटी बच्चियाँ भी अक्सर पास आकर बैठ जाती हैं और काम सीखती हैं। इस तरह छोटे से छोटा सदस्य भी परिवार की आमदनी में कुछ न कुछ हिस्सा बँटाता है!

सबसे बड़ी दो लड़कियाँ स्कूल नहीं जातीं, कभी नहीं गईं। उनके माता-पिता हमें बताते हैं: ‘पढ़ाई में उनका दिमाग नहीं लगता!’। यह भी कि वे स्कूल गई थीं मगर उन्हें वहाँ कुछ समझ में नहीं आता था। जब हम लड़कियों से बात करते हैं तो पाते हैं कि दोनों पूरी तरह सामान्य लड़कियाँ हैं और उनके दिमाग अच्छी तरह काम करते हैं। यह बड़े दुख की बात है कि कारण कुछ भी हो, वे कभी भी स्कूल जाकर पढ़ाई करने का आनंद नहीं ले पाएँगी! उनके परिवार में रुखसार स्कूल जाने वाली पहली लड़की है और हमने परिवार वालों से कहा है कि दूसरी तीन लड़कियों को भी हमारे पास पढ़ने भेजें!

रुखसार के पिता से हमने इस बारे में भी बात की कि किस तरह वे कुछ ज़्यादा पैसे कमा सकते हैं, जैसे अपना खुद का व्यापार शुरू करके-लेकिन उसने बताया कि जो पैसा व्यापार खड़ा करने में लगेगा, उसे लड़कियों के दहेज के लिए बचाना ज़्यादा बेहतर होगा। आखिर उसे सभी छह लड़कियों की शादी करनी है!

हम इस परिवार की हर संभव मदद करने का इरादा रखते हैं और रुखसार की छोटी बहनों को अवश्य पढ़ाना चाहेंगे! खुद रुखसाना पढ़ाई में बहुत अच्छी है। वह शांत लड़की है, स्कूल में चुप-चुप सी रहती है और पढ़ाई में पूरा ध्यान लगाती है। और हमें विश्वास है कि वह स्वयं भी पढ़-लिखकर कोई न कोई रोजगार कर सकेगी और पैसे कमाएगी-लेकिन घुंगरू या पाजेब बनाकर नहीं!

उनकी और ऐसे बहुत से बच्चों की सहायता की हमारी योजना में आप भी सहभागी हो सकते हैं! किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करें!