गरीब? जी हाँ। दुखी? बिलकुल नहीं! – हमारे स्कूल के बच्चे- 6 सितंबर 2013

परोपकार

आज मैं आपको अपने स्कूल की एक और बहुत सुंदर बच्ची से मिलवाना चाहता हूँ जिसका नाम है प्रिया। पाँच साला यह बच्ची हमारे स्कूल की सबसे कम उम्र की बच्चों में से एक है। एक तरफ उसके पिता बहुत ज़्यादा नहीं कमाते और उन्हें भोजन तक के लिए कई बार अपने रिश्तेदारों पर निर्भर करना पड़ता है और दूसरी तरफ वह लड़की और उसका परिवार बहुत ही हंसमुख और खुश दिखाई पड़ता है। ये लोग बात बात पर हंस पड़ते हैं और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपने जीवन को बड़ी सहजता के साथ स्वीकार करते हैं।

प्रिया के 11 और 8 साल के दो भाई हैं। उसके पिता एक मिठाई की दुकान में काम करते हैं और अपने परिवार के भरण पोषण के लिए बड़ी मुश्किल से पर्याप्त धन कमा पाते हैं। उन्होंने एक परिचित से कर्ज़ लेकर सात साल पहले अपना एक मकान बनवाया था। इस कर्ज़ की किश्तें उन्हें आज भी चुकानी पड़ रही हैं और माह के अंत में उनके पास जो कुछ भी बच पाता है वह सब उस साहूकार की झोली में चला जाता है जिससे देनदारी कुछ कम होती जाए।

खाने-पीने की व्यवस्था हो जाने के बाद दो लड़कों की पढ़ाई उस परिवार के लिए सबसे बड़ा आर्थिक बोझ था। उन बच्चों ने कुछ साल पहले किसी और स्कूल में अपनी पढ़ाई शुरू की थी और उनके अभिभावकों ने प्रिया को भी वहीं भेजने का निर्णय लिया। स्कूल पहुँचते ही उन्हें पता चला कि उनके पास इतना रुपया नहीं है कि वे प्रिया को पढ़ा सकें! फीस, स्कूल की वर्दी, किताबें, सब कुछ मिलाकर बहुत ज़्यादा खर्च था जो उनकी हैसियत से बाहर था।

जब उन्होंने हमारे स्कूल के बारे में सुना तो वे बड़े खुश हुए और प्रिया को जुलाई 2012 में हमारे यहाँ भेजा। उसे हमारे यहाँ पढ़ते हुए अब एक साल हो गया है और अगले साल से वे अपने दोनों लड़कों को भी हमारे यहाँ भेजने का विचार कर रहे हैं। यह उनके परिवार के लिए बहुत बड़ी आर्थिक राहत होगी और वे घर के ऋण की मद में हर माह ज़्यादा रकम अदा कर पाएंगे।

अगर आप उसके मार्क्स देखें तो पाएंगे कि पढ़ाई में प्रिया एक औसत विद्यार्थी है। सभी विषयों में वह ठीक कर रही है और उसके शिक्षक कहते हैं कि उसे गप्प लड़ाने और हंसी ठट्ठा करने में बड़ा मज़ा आता है। अपनी पहली मुलाक़ात में वह थोड़ा शर्मीली लग रही थी लेकिन एक बार खुलने के बाद वह बड़ी बातूनी और प्रसन्नचित्त लड़की लग रही है।

दुनिया भर के दूसरे बच्चों की तरह प्रिया भी खेलना-कूदना और दौड़ना-भागना पसंद करती है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसका परिवार गरीब है। अगर आप इस परिवार जैसे दूसरे परिवारों की मदद करना चाहते हैं तो आप किसी भी बच्चे की शिक्षा अथवा भोजन प्रायोजित कर सकते हैं, और सामाजिक कार्यों में अपना सहयोग प्रदान कर सकते हैं!

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