हमारा विद्यालय – अच्छी स्तरीय मुफ्त शिक्षा, मगर सिर्फ उनके लिए जिन्हें इसकी ज़रूरत है! -18 जुलाई 2012

परोपकार

मैंने पहले ही डायरियों के कई पृष्ठों में हमारे विद्यालय के विषय में लिखा है और इसलिए इस वैबसाइट पर आने वाले सभी पाठक यह तुरंत समझ जाते हैं कि वह बच्चों के बारे में है। जो पाठक यहाँ दिये जाने वाले चित्रों में दिखाए गए बच्चों के बारे में कुछ ज़्यादा जानना चाहता है, जल्द ही जान जाएगा कि हम गरीब बच्चों के लिए एक धर्मार्थ विद्यालय चला रहे हैं। आज मैं इस बारे में थोड़ा सा और लिखना चाहता हूँ, ज़रा विस्तार से भी। खासकर यह उन सबके लिए है जो हमारे बारे में अभी ज़्यादा कुछ नहीं जानते।

विद्यालय के जीर्णोद्धार के विषय में लिखते वक़्त मैंने ज़िक्र किया था कि हमने हर कक्षा में वातानुकूलन करवाया है क्योंकि हम चाहते हैं कि बच्चे भी उसी आरामदेह वातावरण में शिक्षा पाएँ जिसमें हम अपना कार्य करना पसंद करते हैं। और यह सच बात है कि हम अपने विद्यालय को न सिर्फ दूसरे विद्यालयों जैसा बनाना चाहते हैं बल्कि हम चाहते हैं कि ये गरीब बच्चे भी, जो अन्यथा शिक्षा भी प्राप्त न कर पाते, पढ़ने का एक असाधारण अनुभव प्राप्त कर सकें।

हमारे विद्यालय के समकक्ष आसपास के दूसरे विद्यालयों की तुलना में, उनकी योग्यता के अनुसार, हमारे शिक्षकों के वेतन 50 प्रतिशत अधिक हैं। इसके अलावा, हमारे शिक्षक यहाँ दोपहर का भोजन भी प्राप्त करते हैं।

हम विद्यालय में बच्चों की सारी आवश्यकताएँ पूरी करते हैं; अर्थात, सारी किताबें, कापियाँ, पेंसिल, रबर, वर्दियाँ आदि आदि। इसके अलावा वे रोज़ गरमागरम खाना भी प्राप्त करते हैं जो कुछ बच्चों के लिए शायद दिन भर का एकमात्र गर्म भोजन होता होगा। कुछ खास मौकों पर हम उनके स्वास्थ्य की जांच भी कराते हैं और यदि कोई बच्चा बीमार होता है और उसका परिवार हमारी मदद चाहता है तो डॉक्टर के पास भी भेजते हैं। किसी बच्चे को इस पर कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता।

हमारे यहाँ किसी बच्चे की भर्ती उसके परिवार की आर्थिक परिस्थिति पर निर्भर है। हम सिर्फ उन्हीं बच्चों को दाखिला देते हैं जिनके माँ-बाप किसी अच्छे, स्तरीय स्कूल में उनका दाखिला कराने और पढ़ाने का खर्च वहन करने में असमर्थ होते हैं।

हाल ही में अपने बेटे और बेटी का दाखिला हमारे यहाँ कराने हेतु कार में सवार होकर एक परिवार हमारे यहाँ आया। हमने नम्रतापूर्वक उनसे क्षमा मांग ली और उनसे कहा कि वे अपने बच्चों का दाखिला कहीं और करा लें। हमारे यहाँ सीमित जगह है और वह सिर्फ गरीबों के लिए आरक्षित है और हम जानते हैं कि ऐसे परिवार कार में सवारी नहीं कर सकते। यहाँ तक कि वे अपने बच्चों के दाखिले की ऐवज में डोनेशन भी देना चाहते थे। हमने बड़ी नम्रता से कहा कि यह कोई विकल्प नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे यहाँ भर्ती सभी बच्चे बराबर हों।

इस तरह हम अपना विद्यालय बिना किसी सरकारी मदद के सन 2007 से चला रहे हैं। हम यह कैसे कर पाते हैं? बेहद मेहनत-मशक्कत के बल पर, दुनिया भर के शानदार लोगों की मदद से और दुनिया भर के बच्चों से अपने अथाह प्रेम की बदौलत।

खर्च का लगभग 40% हिस्सा हमारे प्रायोजकों के डोनेशंस से पूरा होता है और इस प्रोत्साहन और समर्थन के लिए हम उन सब दोस्तों, प्रायोजकों, और दानदाताओं के तहेदिल से शुक्रगुजार हैं। बचा हुआ 60% खर्च हमारी खुद की कमाई से आता है। मेरा परिवार और मैं बिना कोई भुगतान प्राप्त किए सारा काम करते हैं। हमारी आमदनी का जरिया है, हमारा व्यवसाय जिसे हम आश्रम में, सफर में या ऑनलाइन अपनी वैबसाइट के ज़रिये अंजाम देते हैं।

अगर हम चाहते तो एक और व्यवसाय शुरू कर सकते थे, एक दूसरा ऐसा स्कूल भी खोल सकते थे जहाँ बच्चों से फीस भी ली जाती। लेकिन मेरे लिए शिक्षा कोई व्यापार नहीं है और मैं चाहता हूँ कि ऐसे गरीब बच्चे मेरे विद्यालय में आएँ जिनके माँ-बाप ने भी कभी स्कूल न देखा हो। और हम यह भी चाहते हैं कि वह यथार्थ में एक आदर्श विद्यालय हो।

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