जब तक कुछ रुपया नहीं हो जाता तब तक यही एक कमरा और दीवारें – हमारे स्कूल के बच्चे-28 फरवरी 2014

आज मैं आपका परिचय एक बेहद सक्रिय, तेज़ और चुस्त लड़के, मोहित से करवाना चाहता हूँ, जो आठ साल का है और हमारे स्कूल में इसी साल से पढ़ने आया है। क्योंकि पहले वह कभी स्कूल नहीं गया इसलिए अभी हमारे स्कूल की लोवर केजी में है-और वहाँ प्रसन्न भी है!

मोहित का पिता साधारण श्रमिक है। उसके पास एक बैलगाड़ी है, जिसे चलाकर वह कुछ रुपए कमा लेता है। उसके पिता ने (मोहित के दादा ने) वृन्दावन में यह मकान खरीदा था, जो उसकी मृत्यु के बाद दो भागों में विभक्त हो गया: एक मोहित के पिता को मिला और एक मोहित के चाचा को।

मोहित के परिवार के पास एक कमरा है, जिसमें मोहित के माता-पिता, मोहित और उसकी तीन साल की बहन रहते हैं। हालांकि उन्होंने एक और कमरा बनाने के उद्देश्य से एक और दीवार खड़ी की है, जिसमें सामान रखने के लिए आले भी निकाल रखे हैं मगर पूरा कमरा बनवाना संभव नहीं हो पाया। आज तक कभी इतने पैसे ही नहीं बच पाए कि यह अतिरिक्त कमरा पूरा हो पाता।

यह आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि मोहित का पिता एक दिन काम पर जाता है और फिर तीन-चार दिन उसे काम खोजना पड़ता है तब जाकर कोई अगला काम मिल पाता है! बात यह है कि मजदूर इतने ज़्यादा हैं कि रोज़ सबको काम मिल पाना लगभग असंभव है। कम से कम मोहित की माँ के अनुसार, जो अपनी आर्थिक समस्याओं का ज़िक्र करते हुए बड़े दुखी स्वर में हमसे परिवार की हालत का बयान कर रही थी।

यह एक तथ्य है कि उनके लिए यह जानना भी दूभर होता है कि अगले माह वे इतना कमा पाएंगे कि मोहित को किसी स्कूल भेज सकें और इसी कारण हमारे स्कूल की जानकारी मिलते ही वे मोहित को लेकर हमारे यहाँ आ गए और अब उन्हें लगता है वे इतना खुश कभी नहीं हुए होंगे।

मोहित एक खुशमिजाज़ लड़का है, जो हरदम मुस्कुराता रहता है और स्वाभाविक ही शरारतें भी बहुत करता है। अभी जिस कक्षा में वह है वहाँ उसका खिलंदड़ा स्वभाव शिक्षिकाओं से पर्याप्त समर्थन और सहयोग पाता है क्योंकि इस निचली कक्षा में बारहखड़ी और गिनती सिखाने के अलावा शिक्षिकाएँ हिन्दी और अंग्रेज़ी कविताएं गाकर सुनाती हैं।

हम आशा करते हैं कि भविष्य में मोहित अपने जीवन का वह लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होगा, जिसके बारे में वह अक्सर हमें बताता रहता है: मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ!

अगर आप मोहित जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को प्रायोजित करके या हमारे स्कूल के बच्चों के एक दिन के भोजन की व्यवस्था करके ऐसा कर सकते हैं।

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