बीमारी से बचने के लिए घर और शहर के साथ नौकरी भी छोड़ दी – हमारे स्कूल के बच्चे – 26 जून 2015

आज मैं आपका परिचय एक ऐसी लड़की से करवाने जा रहा हूँ, जो पहली बार किसी स्कूल का मुँह देखेगी, जब वह 1 जुलाई 2015 को हमारे स्कूल की ओर अपने नन्हें कदम बढ़ाएगी। उसका नाम राधिका है और वह पाँच साल की है।

राधिका के घर की ओर बढ़ते हुए बच्चों की भीड़ हमारे पीछे लग जाती है। उनमें से कुछ पहले ही हमारे स्कूल के विद्यार्थी हैं। स्वाभाविक ही- क्योंकि हम वृन्दावन के कुछ सबसे गरीब इलाकों में से एक से होकर गुज़र रहे हैं, जहाँ हमारे स्कूल के बहुत से बच्चे रहते हैं।

इसी इलाके में राधिका का पिता एक मिठाई की दुकान में काम करता है। राधिका के माता-पिता, दोनों ही मूलतः फ़िरोज़ाबाद के रहने वाले हैं, जो काँच के काम और खासकर चूड़ियों के काम के लिए मशहूर है। राधिका का पिता भी पहले वहीं काम करता था- एक काँच की फैक्ट्री में। लेकिन वहाँ अधिकतर फैक्ट्रियों में काम की परिस्थितियाँ बेहद खतरनाक हैं और काँच की बारीक धूल के चलते, जिसके विरुद्ध कोई सुरक्षा उपाय नहीं होते, ज़्यादातर समय वह काम पर जाने की जगह घर पर बीमार पड़ा होता! घर में बीमार पड़े-पड़े उसे सुबुद्धि प्राप्त हुई कि उसे यह काम छोड़कर कोई दूसरा काम पकड़ना होगा! राधिका के दादा के मकान में सिर्फ एक कमरा था और जैसे-जैसे परिवार बड़ा होता जा रहा था, वहाँ घुटन महसूस होने लगी थी!

और इस तरह वे अपने दो बच्चों को, एक लड़का और एक लड़की को- लेकर वृन्दावन आ गए। उनकी दो और लड़कियाँ हैं, जिनमें राधिका सबसे छोटी है। उसका सबसे बड़ा भाई, जो अब 13 साल का है, एक सस्ते निजी स्कूल में पढ़ता है लेकिन क्रमशः 10 और 7 साल उम्र की पूनम और रेखा निजी स्कूल नहीं जा सकतीं क्योंकि स्कूल की फीस देने के लिए उनके पास पैसे नहीं होते। वे सरकारी स्कूल में पढ़ती हैं, जो घर के पास ही स्थित है। लेकिन अब परिवार आश्वस्त है कि हमारे स्कूल में उनकी सबसे छोटी बेटी अच्छी से अच्छी शिक्षा बिल्कुल मुफ़्त पा सकेगी!

उन्हें सहायता की ज़रूरत है। मिठाई की दुकान में राधिका का पिता सिर्फ 4000 रुपए माहवार कमाता है, जो लगभग 65 यू एस डॉलर होते हैं। पिछले एक साल से वे अपने नए मकान में रह रहे हैं लेकिन उससे पहले उन्हें मकान का किराया भी चुकाना पड़ता था। राधिका के दादा और नाना दोनों ने ज़मीन खरीदने में और उस पर अपना मकान बनवाने में परिवार की मदद की। 40 वर्ग मीटर जगह में उन छह लोगों के रहने के लिए कुल मिलाकर अब दो कमरे और एक रसोई उपलब्ध है।

लेकिन वे खुश हैं और उन्हें विश्वास है कि उनका भविष्य बेहतर होगा!

अगर आप राधिका जैसे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक बच्चे को या बच्चों के एक दिन के भोजन को प्रायोजित करके ऐसा कर सकते हैं। शुक्रिया!

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