एक भैंस के लिए छह सदस्यों के परिवार से ज़्यादा रहने की जगह – हमारे स्कूल के बच्चे – 9 मई 2014

परोपकार

आज मैं आपका परिचय दो सहोदर भाई-बहन, तेजवीर और ज्योति से करवाना चाहता हूँ, जो हमारे चैरिटी स्कूल में दो साल से पढ़ रहे हैं।

ज्योति ग्यारह साल की है और तेजवीर दस का। उनका एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन भी हैं। उनका पिता एक ड्राइवर है और 65 डॉलर यानी लगभग 4000 रुपए मासिक कमाता है। जब हमने पूछा कि इतने रुपयों में उसके परिवार का खर्च पूरा हो पाता है तो उसने कहा: किसी तरह पूरा करना पड़ता है। उनके पास एक भैंस है इसलिए उन्हें बच्चों के लिए दूध और खाना पकाने के लिए मक्खन, घी वगैरह खरीदना नहीं पड़ता। जब भैंस कुछ अतिरिक्त दूध देती है तो वे कुछ लीटर दूध बाज़ार में बेचकर थोड़ी-बहुत अतिरिक्त आमदनी भी कर लेते हैं।

इस तरह भैंस उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है: जब आर्थिक तंगी कुछ ज़्यादा ही तकलीफदेह हो जाती है तब उससे दैनिक खर्च निकलता है और कभी-कभी उससे होने वाली अतिरिक्त आय से दैनिक खर्च के आलावा कुछ दूसरी वस्तुएं भी खरीदी जाती हैं। लेकिन यह भी सच है कि उससे होने वाली आय का बड़ा हिस्सा उसके लिए खली-चारा खरीदने और उसकी देखभाल में खर्च हो जाता है और उससे बढ़कर, इतना बड़ा जानवर घर की बहुत सी जगह भी घेर लेता है।

जबकि छह सदस्यों का यह परिवार एक छोटे से कमरे के घर में ठुंसा रहता है, भैंस उनके घर के सामने के आँगन का पूरा हिस्सा, जो क्षेत्रफल के लिहाज से कमरे से कम से कम दोगुना है, घेर लेती है। भैंस के लिए बाहर धूप में आराम फरमाने की जगह भी है और छाँह में खड़े रहने के लिए शेड भी।

लेकिन परिवार को कोई शिकायत नहीं है-वे जानते हैं कि ज्योति के पिता के पास नियमित काम है, उसे रोज़ काम ढूँढ़ने की कोशिश नहीं करनी पडती और वह हर माह रुपए कमाकर घर लाता है और इसलिए उन्हें खुश रहना चाहिए। इसके आलावा उनके पास घर के रूप में यह पैतृक संपत्ति भी है इसलिए घर के किराए के रूप में उन्हें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता।

उनके पास घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त पैसा होता है मगर उससे अधिक नहीं। पूरे साल उनके कुछ माह अच्छे होते हैं तो कुछ बहुत ख़राब। उनका घर सादा और साधारण मगर साफ़-सुथरा है। उनके परिवार में भूखों मरने वाली गरीबी नहीं है लेकिन कोई भी उनके घर, उनके कपड़े-लत्ते और उनका भोजन देखकर जान सकता है कि उनका घर धन-धान्य से भरपूर नहीं है। वास्तव में वे अपना खर्च थोड़ा-बहुत बढ़ा भी सकते हैं मगर यह डर लगा रहता है कि कहीं परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ गया तो उन्हें बीमारी पर भी खर्च करना पड़ सकता है। उन्हें यह भी शंका रहती है कि उनके पिता का, जो कि उनके परिवार में अकेला कमाने वाला है, काम छूट गया तो क्या होगा। यही कारण है कि वे अपने बच्चों को हमारे चैरिटी स्कूल भेजने को मजबूर हैं, जहां वे मुफ्त शिक्षा प्राप्त करते हैं।

ज्योति और तेजवीर बताते हैं कि उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगता है और वहां उनके बहुत से दोस्त हैं। जबकि ज्योति अच्छी विद्यार्थी है और परीक्षाओं में औसत नंबर लेकर पास होती है, तेजवीर को पिछले साल कक्षा में अद्यतन बने रहने के लिए काफी मेहनत और संघर्ष करना पड़ा। उसकी शिक्षिकाएँ इसका कारण बताते हुए कहती हैं कि वह पढ़ाई के वक़्त बात बहुत करता है और विषय पर ध्यान नहीं देता!

अगर आप उनकी और उनके जैसे दूसरे बच्चों की मदद करना चाहते हैं तो किसी एक विद्यार्थी को प्रायोजित करके या बच्चों के एक दिन के भोजन का खर्च वहन करके ऐसा कर सकते हैं! अगर आप चंदे के रूप में सहयोग करना चाहते हैं तो उसका भी हम सहर्ष स्वागत करते हैं!

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