मोनिका के बारे में कुछ और जानकारियाँ: अभी भी अस्पताल से उसकी छुट्टी नहीं हो पाई है – 2 जनवरी 2015

परोपकार

आज मैं यह ब्लॉग दिल्ली के पास स्थित गुड़गाँव से लिख रहा हूँ और मोनिका के बारे में कुछ नए समाचार आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।

हमने अमृतसर से घर जाने के लिए ट्रेन पकड़ी मगर अस्पताल में मोनिका से मिलने दिल्ली उतर गए। हालांकि उद्देश्य सिर्फ उससे मिलना नहीं था बल्कि उसे साथ लेकर आना था। शल्यक्रिया के बाद डॉक्टरों ने हमसे कहा था कि वे उसे 31 दिसंबर 2014 को अस्पताल से छुट्टी दे देंगे और अगर वह दो दिन और रुक सके तो बेहतर होगा। तब हमने कहा था कि जब भी वे कहेंगे हम उसे लेने आ सकते हैं लेकिन अगर 2 जनवरी को यह संभव हो सके तो तब हम अमृतसर से वापस लौट रहे होंगे इसलिए यहाँ रुककर आसानी के साथ उसे साथ लेते हुए जा सकते हैं।

लेकिन उसी समय डॉक्टरों ने यह भी कहा था कि मोनिका को अस्पताल से छुट्टी तो मिल जाएगी मगर उसे हर दूसरे दिन आकर अपनी पट्टियाँ बदलवानी पड़ेंगी। तो इस नई जानकारी से हमें अपने इस इरादे में कुछ परिवर्तन करना पड़ा-हम मोनिका को वृन्दावन नहीं ले जा सकते थे! हर दूसरे दिन तीन घंटे की यात्रा करके वृन्दावन से यहाँ आना और उतनी ही यात्रा करके वापस लौटना उसके लिए, जिस पर हाल ही में शल्यक्रिया की गई हो, काफी मुश्किल काम है और आप ऐसा कभी नहीं करते। इसलिए हमारे सामने उसके लिए और उसकी माँ के लिए किसी फ्लॅट या एक कमरे का इंतज़ाम करने का काम सामने आ पड़ा था, जहाँ वे दोनों कम से कम तीन सप्ताह के लिए ठहर सकते।

तो इस तरह, अमृतसर में छुट्टियाँ बिताते हुए भी मैं फोन करके, वहाँ की जानकारियाँ लेते हुए उनके लिए कोई उपयुक्त जगह खोजने की कोशिश कर रहा था। अंत में हमें अस्पताल के पास ही एक होटल मिल गया जो इस समस्या का समुचित उपाय हो सकता था: वे आराम से, ठंड से बचते हुए वहाँ रह सकेंगे और उन्हें भोजन की व्यवस्था के लिए भटकना भी नहीं पड़ेगा क्योंकि आसपास ही कई खाने की जगहें हैं और सबसे प्रमुख बात यह कि अस्पताल वहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है। तो इसलिए हम मोनिका को अस्पताल से हटाकर होटल ले जाने का विचार कर रहे थे।

लेकिन आज जब हम गुड़गाँव पहुँचे तो हमें फिर अपना यह कार्यक्रम बदलना पड़ा: डॉक्टरों ने कहा कि वे मोनिका को अभी एक दिन और रखना चाहेंगे और उसे अस्पताल से कल छुट्टी देंगे। वह अब स्वस्थ, प्रसन्न और ताजादम है-मगर अभी तक वह अपने बिस्तर से उतरी नहीं है और डॉक्टरों का कहना था कि वे कल सबेरे उसकी पट्टियाँ बदलेंगे और उसे खड़ा करके और चलाकर देखेंगे और तभी उसे वहाँ से बिदा करेंगे अर्थात हम उसे कल ही ले जा पाएँगे।

इसलिए हमें अब एक दिन और गुड़गाँव में ही रुकना पड़ रहा है और हम कल दोपहर को मोनिका को अस्पताल से हटाकर होटल लेकर आएँगे। अब अगले सप्ताह मैं पुनः इस विषय में ताज़ा ब्योरा आपके सामने रखूँगा!

नीचे आप मोनिका और अपरा का एक छोटा सा वीडियो देख सकते हैं, जिसमें दोनों आपस में खेल रहे हैं।

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