मोनिका ने डॉक्टरों को बताया कि उसकी पिछली शल्यक्रिया से उसे कितना लाभ हुआ और अब दूसरी शल्यक्रिया की योजना – 25 मई 2015

मैं हाल ही में दिल्ली में एक सप्ताह गुज़ारकर लौटा हूँ। दरअसल, गुड़गाँव में, जहाँ के एक अस्पताल में मोनिका का इलाज चल रहा है। आपको मोनिका याद होगी, जो एक दुर्घटना में बुरी तरह जल गई थी। आप उसके बारे में मेरे ब्लॉग यहाँ पढ़ सकते हैं। पिछले शनिवार के दिन उसकी दूसरी शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई!

मोनिका पर हुई पहली शल्यक्रिया की सफलता के बारे में मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ। उस समय शल्यक्रिया के बाद एक सप्ताह वह अस्पताल में रही थी और फिर एक माह तक पास स्थित एक गेस्ट हाउस में, क्योंकि उसे हर दूसरे दिन पट्टियाँ बदलवाने अस्पताल जाना पड़ता था।

उसके बाद वह वृन्दावन वापस आ गई थी और फिर स्कूल भी आने लगी। वास्तव में समय का यह अचूक सदुपयोग था-एक तरह से वह सर्दियों की छुट्टियों में गई और छुट्टियाँ खत्म होने के कुछ दिन बाद वापस आ गई और इस तरह उसकी स्कूली पढ़ाई ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ!

उसने तेज़ी के साथ स्वास्थ्य लाभ किया है लेकिन अपनी गरदन सीधी रखने के लिए उसे सामने की तरफ एक कॉलर पहनना पड़ता है-और गरदन सीधी रखना परम आवश्यक है क्योंकि अन्यथा शल्यक्रिया द्वारा प्रतिरोपित त्वचा नीचे झूल जाएगी और इतने दिनों की मेहनत और आर्थिक व्यय पर पानी फिर जाएगा। वह अपनी जली हुई त्वचा और चकत्तों पर दिन में कई बार तेल लगाती है और माँ रोजाना उसकी त्वचा की मालिश भी करती है।

इस स्कूली सत्र की अंतिम परीक्षा के बाद हम मोनिका को लेकर पुनः डॉक्टर के पास गए थे। पिछले महीने, दागों में सुधार हो रहा है या नहीं, इसकी दोबारा जाँच के लिए डॉक्टर ने उसे पुनः बुलाया था। डॉक्टर उसे देखकर बहुत खुश हुए और पूछा कि शल्यक्रिया के पहले की और बाद की स्थितियों के बीच उसे क्या अंतर महसूस हो रहा है। उसने बताया कि पहले वह अपनी गरदन हिला-डुला नहीं पाती थी और उसे अपनी ठुड्डी नीचे रखनी पड़ती थी और अब ये दोनों हरकतें वह आसानी के साथ कर पाती है और सिर को भी दोनों तरफ और नीचे-ऊपर चला पाती है। यह बहुत बड़ी कामयाबी है और एक सुखद क्षण।

उसी समय हमने अगली शल्यक्रिया की योजना बना डाली थी। डॉक्टर की सलाह थी कि मई में शल्यक्रिया की जाए और हम इस पर सहमत हो गए क्योंकि तब गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी होंगी और स्कूली पढ़ाई में बिना अधिक व्यवधान के उसकी शल्यक्रिया भी हो जाएगी और वह कुछ दिन स्वास्थ्यलाभ भी कर सकेगी। इसके अलावा, वह साल का सबसे गरम समय होगा और उसे यह समय शानदार एयर कंडीशंड कमरों में व्यतीत करने का मौका भी मिल जाएगा! उनके घर में सिर्फ एक पंखा है और जब बिजली चली जाती है तो स्वाभाविक ही, वह भी काम नहीं करता! और निश्चित ही, विशेष रूप से मोनिका के लिए गर्मी बहुत अधिक तकलीफदेह होती है!

जहाँ त्वचा का प्रत्यारोपण किया गया था, उस जगह की जाँच और दूसरे चकत्तों को देखने के बाद डॉक्टर ने पूछा कि उसे बाईं आँख, मुँह और दाहिनी बाँह की इन तीन चिकित्साओं में से कौन सा काम अधिक आवश्यक लगता है, जिसके सम्पन्न हो जाने पर उसकी सामान्य कार्यक्षमता में अधिक से अधिक इजाफा हो सकेगा। उसने उत्तर दिया कि वह सबसे पहले दाहिनी बाँह की, जिसे फिलहाल वह सिर्फ 90 अंश तक ही उठा पाती है, चिकित्सा चाहती है, जिससे वह उसे पूरी तरह उठाने में सक्षम हो जाए।

किन्तु डॉक्टर का कहना था कि आँख भी बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए वह दोनों की एक साथ, मिली-जुली शल्यक्रिया और चिकित्सा करेंगे: बाईं आँख पर काम किया जाएगा, जिससे वह पलकों को बंद कर सके और साथ ही दाहिनी बाँह को भी मुक्त कर सके।

डॉक्टर ने बताया कि जिस तरह गरदन और कॉलर के साथ किया था, शल्यक्रिया के बाद बाँह को भी एक फ्रेम में कसकर रखा जाएगा, जिससे प्रत्यारोपित त्वचा एक साथ खिंचकर झूल न जाए। और इसलिए मोनिका को इस बार फिर कुछ दिन और अस्पताल में रहना होगा और उसके बाद, पिछली बार की तरह, अस्पताल के आस-पास किसी गेस्ट हाउस में भी, जिससे उसकी नियमित जाँच हो सके और पट्टियाँ बदली जा सकें।

कल मैं आपको इस शल्यक्रिया और अपने सप्ताहांत के बारे और भी बहुत कुछ बताऊँगा।

अगर आप भी मोनिका की मदद करना चाहते हैं या उसके इलाज और स्वास्थ्य लाभ के संबंध में कोई आर्थिक मदद करना चाहते हैं तो आप यहाँ पढ़कर अपनी आर्थिक मदद भिजवा सकते हैं। शुक्रिया!

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