मोनिका की दूसरी शल्यक्रिया: उसकी बाईं आँख, दाहिनी बाँह और दाहिनी छाती – 26 मई 2015

शहर:
वृन्दावन
देश:
भारत

कल मैंने आपको बताया था कि हमारा पिछला हफ्ता दिल्ली के पास स्थित गुड़गाँव नामक शहर में गुज़रा, जहाँ हम मोनिका को लेकर अस्पताल गए थे, जहाँ उसकी दूसरी शल्यक्रिया की जानी थी। आज मैं आपको उस शल्यक्रिया के बारे में बताना चाहूँगा और साथ ही यह भी कि अब उसकी हालत कैसी है।

डॉक्टर द्वारा जाँच कर लिए जाने के बाद हमने तय किया कि उसकी शल्यक्रिया जल्द से जल्द करवाई जाए और अगली शल्यक्रिया के लिए हमने पिछले शनिवार, 23 मई का दिन नियत किया। स्वाभाविक ही रमोना और मैं और हमारे साथ अपरा भी पूरे समय मोनिका और उसकी माँ के साथ रहने वाले थे। आश्रम से हम शुक्रवार के दिन चले और दोपहर को मोनिका को अस्पताल में भर्ती करा दिया, रात के भोजन के बाद शल्यक्रिया हो जाने तक उसे कुछ भी खाना-पीना नहीं था।

दो घंटे की शल्यक्रिया के बाद और लगभग इतने समय बाद ही होश आने पर मोनिका को उसके कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। उसके सिर, बाँह और बाँह से होते हुए पूरी छाती पर सफ़ेद पट्टियाँ बंधी थीं। स्वाभाविक ही, उसकी बाईं आँख ढँकी हुई थी और दाहिनी बाँह मजबूत पट्टियों से कसकर बंधी हुई थी, जिसने उसकी बाँह को शरीर से 90 अंश के कोण पर ऊपर उठा रखा था।

लेकिन डॉक्टरों से बात करने पर हमें पता चला कि उन्होंने सिर्फ मोनिका की आँख और बाँह पर ही काम नहीं किया था: उन्हें उसकी दाहिनी छाती के ऊपरी हिस्से में सूजन नज़र आई थी और उन्होंने शल्यक्रिया के दौरान ही निर्णय लिया था कि उस प्रभावित त्वचा को निकालकर, उसे भी जांघ से निकाली जाने वाली त्वचा से प्रतिरोपित कर दें। इस हेतु और बाँह के नीचे किए जाने वाले प्रतिरोपण हेतु उन्होंने पुनः उसकी बाईं जांघ से त्वचा निकाली, जहाँ से पहले भी वे त्वचा निकाल चुके थे। शल्यचिकित्सक ने हमें बताया कि उन्होंने आपस में सलाह मशविरा किया और उसी पैर की त्वचा का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया-दूसरी जांघ को बाद में आवश्यक होने पर इस्तेमाल करने के लिए छोड़ दिया, क्योंकि मोनिका पर भविष्य में भी कई शल्यक्रियाएँ की जानी आवश्यक होंगी।

रविवार के दिन हमें झटका सा लगा जब हमने देखा कि मोनिका के पैरों की पट्टियाँ और साथ ही उसकी पैंट और बिस्तर की चादर रक्त से सने हुए हैं! पट्टियाँ बदलने के बाद हमें बताया गया कि यह एक सामान्य घटना है और कुछ देर में सब कुछ ठीक हो जाएगा। बाद में, सोमवार तक पट्टियों पर खून नज़र नहीं आया।

अभी मोनिका को हफ्ते भर और अस्पताल में रहना होगा। गुरुवार को पहली बार मोनिका की पट्टियाँ बदली जाएँगी और उसके बाद हमें देखना होगा कि उसे कब अस्पताल से छुट्टी मिलती है। निश्चित ही पिछली बार की तरह इस बार भी उसे आसपास के किसी गेस्ट हाउस में कुछ समय के लिए रहना होगा, जिससे डॉक्टर हर दूसरे दिन उसका मुआयना कर सकें। पिछली बार की तरह, जब उसकी गरदन पर शल्यक्रिया की गई थी, इस बार उसे पूरे समय बिस्तर पर लेटे नहीं रहना होगा। संभवतः शुक्रवार से वह उठकर बैठ सकेगी और शायद चल-फिर भी सके।

वह अभी से काफी तंदरुस्त लग रही है और माँ से कभी अपने पैरों की, तो कभी हाथों की, तो कभी गरदन की मालिश करने के लिए कहती रहती है। जब डॉक्टर आए तो उसने पूछा कि क्या अब वह ठोस खाना नहीं खा सकती क्योंकि उसे अब तक मिलने वाले सूप ज़्यादा पसंद नहीं हैं-और लो, उसका अनुरोध मान्य कर लिया गया! तो परिस्थितियों के अनुरूप, मोनिका ठीक-ठाक है, तेज़ी के साथ स्वास्थ्य लाभ कर रही है और उसका मन तरोताजा और उत्फुल्ल है!

मोनिका के बारे में मेरे पिछले ब्लॉग आप यहाँ पढ़ सकते हैं और उसकी मदद के हमारे काम में हाथ बंटा सकते हैं!