मोनिका की पहली सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई – 26 दिसंबर 2014

परोपकार

आज मैं यह ब्लॉग दिल्ली के पास स्थित शहर गुड़गांव से लिख रहा हूँ। आर्टेमिस हॉस्पिटल से अच्छी खबर है: आज मोनिका पर पहली शल्यक्रिया की गई है! उसकी दाहिनी आँख और गरदन पर डॉक्टरों ने अभी-अभी एक महत्वपूर्ण काम सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आजकल इतना बड़ा काम काफी कम समय में पूरा हो जाता है। जब से हमने आपको मोनिका के विषय में बताना शुरू किया है कि उसके इलाज को लेकर हम किस तरह आगे बढ़ेंगे, तभी से हम यही आशा कर रहे थे कि किसी न किसी प्रकार से इसी साल हम उसकी पहली शल्यक्रिया करवा पाएँगे।

और बहुत से उदार मददगारों, मित्रों और अन्य लोगों की सहायता से, जो मोनिका की कहानी से द्रवित हुए, हम यहाँ तक पहुँचे है! उन सबका धन्यवाद, जिन्होंने इस पीड़ा को साझा किया और आर्थिक मदद की!

पिछले शनिवार को ही मोनिका को लेकर मैं यहाँ पहुँच गया था और सारा दिन शल्यक्रिया से पहले होने वाले विभिन्न परीक्षण करवाता रहा: खून और पेशाब की जाँच, एक्स-रे और चेतनाशून्य करने से पहले होने वाले परीक्षण आदि। सब कुछ ठीक-ठाक रहा, सिर्फ चेतनाशून्य करने वाले डॉक्टर ने कुछ परेशानी व्यक्त करते हुए बताया कि क्योंकि मोनिका मुँह नहीं खोल पाती, एक पाइप भीतर डालकर उसके श्वसन को सुनिश्चित किया जाएगा। लेकिन एक बार फिर हमें इस अस्पताल के चुनाव पर संतोष हुआ-उन्होंने हमें धैर्यपूर्वक और मित्रतापूर्ण लहजे में सब कुछ समझाया कि बिना किसी विशेष परेशानी के यह कैसे किया जाएगा।

और इसलिए हम कल ही पहुँच गए थे। हमारे साथ उल्लास में दमकती मोनिका, उसकी माँ और प्रसन्नचित्त अपरा भी थी, जिसे लग रहा था, जैसे वह कहीं छुट्टियाँ मनाने निकली हो, क्योंकि हम लोग अस्पताल के पास ही एक होटल में रुके थे।

मोनिका को भर्ती करा दिया गया और उसे खाना देना बंद कर दिया गया, जिससे वह दूसरे दिन यानी आज सबेरे होने वाली शल्यक्रिया के लिए समुचित रूप से तैयार हो सके। शल्यक्रिया आज आठ बजे शुरू हुई और उसमें लगभग तीन घंटे लगे। मोनिका को होश में आने में काफी समय लगा और स्वाभाविक ही उसकी आँखों और गरदन पर बहुत सारी पट्टियाँ बंधी थीं (बड़ा सा बैंडेज बंधा था), लेकिन वह मुस्कुरा रही थी!

सब कुछ अच्छी तरह से सम्पन्न हो गया। अब उसे पूरी तरह स्वस्थ होने के लिए कुछ समय आराम करने की ज़रूरत है। कुछ दिन वह अस्पताल में ही रहेगी और उसे अपनी आँखों पर कुछ समय पट्टियाँ बांधे रखना होगा और बाद में दो सप्ताह तक आँखों पर शल्यक्रिया के बाद लगाई जाने वाली पट्टी भी लगाए रखनी होगी। लेकिन कुछ हफ्तों में ही वह पुनः अपनी गरदन चलाने में और आँखें बंद करने में समर्थ हो जाएगी! सफल इलाज की ओर पहला कदम रखा जा चुका है!

एक बार पुनः हम उन सभी को धन्यवाद कहना चाहते हैं जिन्होंने अब तक हमारी सहायता की, उन डॉक्टरों और अस्पताल के दूसरे कर्मचारियों का धन्यवाद, जो हमारी सहायता करते रहे और आगे भी करते रहेंगे! यह कितनी खुशी की बात है कि हम सब मिलकर इस पीड़ित बच्ची की सहायता कर सके!

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