मोनिका की पृष्ठभूमि – पिता, जो परिवार के भरण-पोषण के लिए कुछ नहीं करता! 17 दिसंबर 2014

परोपकार

मोनिका के साथ हुए अपघात के बारे में बताने के बाद और यह बताने के बाद कि क्यों हमने एक निजी अस्पताल को उसके इलाज के लिए चुना, अब मैं आपको उसकी, उसके परिवार की और घर की पृष्ठभूमि के विषय में कुछ बताना चाहता हूँ।

मोनिका की माँ अपढ़ नहीं है। वह 8वीं कक्षा तक पढ़ी है और जिस प्रदेश में साक्षारता दर 50% है वहाँ इतनी शिक्षा कोई कम या छोटी बात नहीं है। उसका और उसकी बहन का विवाह एक साथ, दो भाइयों के साथ कर दिया गया था, जिसका अर्थ था कि वे न सिर्फ बहनें थीं बल्कि आपस में देवरानी-जेठानी भी थीं! सुनने में अच्छा लगता है मगर दुर्भाग्य से आज उनके बीच बातचीत भी बंद है।

मोनिका के पिता के परिवार का कोई भी सदस्य उनके साथ बातचीत तक नहीं करता। माँ बताती है कि सभी एक ही मकान में रहते हैं मगर वे लोग सबसे कटे हुए एकाकी हैं। उसका पिता चार भाइयों में एक भाई है। सबसे बड़े भाई का देहांत हो चुका है और मृत भाई की पत्नी मकान की मालकिन है। मोनिका की दादी और मोनिका का सबसे छोटा चाचा भी अपने परिवार के साथ वहीं रहते हैं। कुल मिलाकर एक कमरा और एक रसोई मोनिका के परिवार का घर है।

क्या कारण है कि कोई भी उनसे किसी तरह का संबंध नहीं रखना चाहता? संभवतः मोनिका के पिता के कारण। वह एक साल भी स्कूल नहीं गया और इस तरह पूरी तरह अपढ़ है। उनके विवाह के तुरंत बाद मोनिका की माँ को पता चला कि वास्तव में उसके पास कोई नियमित काम नहीं है। कुछ समय तक वह यहाँ-वहाँ काम करता था मगर किसी भी काम में वह टिक नहीं पाता था। कुछ समय पहले तक उसके पास एक ठेला था, जिसमें वह सब्जियाँ, फल इत्यादि और कुछ दूसरे सामान रखकर फेरी लगाता था। उसके भाई भी कुछ समय तक उसकी मदद करते रहे लेकिन कभी भी वह कुछ कमा-धमाकार नहीं लाता था या लाता भी था तो बहुत कम। वृन्दावन के मुख्य मंदिर के पास स्थित अपने भाई की दुकान में भी वह कुछ समय तक काम करता रहा मगर निश्चय ही वह अपना काम ठीक तरह से नहीं करता होगा इसलिए उसके भाई ने उसे निकाल बाहर किया।

आप स्वयं उनके घर की आर्थिक स्थिति की कल्पना कर सकते हैं, जहाँ माँ को सोचना पड़ता हो कि किस तरह अपनी तीन-तीन बेटियों का पेट भरा जाए! वे परेशानियाँ, जो आज भी उसके साथ लगी हुई हैं! अपने पति के लिए भावनाएँ, जो उसके दिल में होंगी!

जब कोई भी मदद के लिए सामने नहीं आता, माँ के माता-पिता ही उसके सहायक बनकर साथ खड़े होते हैं। रसोई में आवश्यक बरतन और कपड़े इत्यादि देकर वे अक्सर उसकी मदद करते रहते हैं। एक बार, जब उसके पति के साथ उसका झगड़ा हुआ तो महीनों वह अपने बच्चों को लेकर अपने माता-पिता के यहाँ रहने चली गई थी। उस समय उसके बच्चे स्कूल भी नहीं जाते थे।

जब उसने अपनी दुखद कहानी अपनी सहेलियों को सुनाई तो उन्होंने सलाह दी: तुम्हें खुद नौकरी कर लेनी चाहिए! खुद पैसे कमाओगी तो फिर तुम्हें पैसे के लिए अपने पति का मुँह नहीं देखना पड़ेगा!

जब उसके बड़े बच्चे स्कूल चले जाते थे, उसने थोड़ा सक्रिय होने का मन बनाया। फिर वह अपनी छोटी बच्ची को माँ के पास छोड़कर एक बड़े स्थानीय मन्दिर में सुरक्षा कर्मचारी के रूप में काम करने लगी! आज वही है, जो घर में थोड़ा-बहुत कमाकर लाती है!

लेकिन, स्वाभाविक ही, इससे उनकी सारी समस्याएँ हल नहीं हो सकती थीं! वह बहुत अधिक नहीं कमा पाती- 5000 रुपए यानी लगभग 80 डॉलर्स। लेकिन इतनी आमदनी से कम से कम वह अपने बच्चों का पेट भर सकती थी और साथ ही कुछ अतिआवश्यक वस्तुएँ खरीद सकती थी। इसके अलावा उसका भाई मोनिका के इलाज का सारा खर्च उठा रहा था और उसी ने एम्बुलेंस लाने के लिए पैसे उधार दिए थे। अपघात के बाद, क्योंकि माँ काम पर चली जाती थी, मोनिका अकेली घर में बिस्तर पर पड़ी रहती। ऐसे समय में उसके माता-पिता ने ही टीवी कनेक्शन लेने के लिए पैसे मुहैया कराए, जिससे मोनिका को अधिक अकेलापन महसूस न हो।

और उसका पति? वह सिर्फ समस्याएँ पैदा कर रहा है। किस तरह की समस्याएँ? इस बारे में कल विस्तार से!

इस बीच, बड़ा अच्छा होगा यदि आप यह संदेश दूसरों के साथ साझा करें और मोनिका के बारे में अपने जान-पहचान वालों और यार-दोस्तों को बताएँ और उसके साथ हुई दुर्घटना के बारे में मेरे ब्लॉग और हमारा 'प्रोजेक्ट पेज' साझा करें, जहाँ वे आर्थिक सहायता प्रदान कर सकते हैं! आइए, हम सब मिलकर उसकी मदद करें!

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