मोनिका का शराबी और हिंसक पिता – क्या इसे नियति समझकर स्वीकार कर लेना चाहिए? 18 दिसंबर 2014

जब हमें मोनिका के साथ हुए हादसे का पता चला, हमने तुरंत निश्चय किया कि हम उसे अस्पताल ले जाएँगे। स्वाभाविक ही पहले हम उसके अभिभावकों से इस विषय में बात करना चाहते थे इसलिए उसकी माँ दूसरे दिन हमारे स्कूल आई। उससे बात करने के बाद उसकी पहचान गुप्त रखते हुए मैंने उस पर एक ब्लॉग भी लिखा था। उसने मुझसे कहा कि उसे कोई परेशानी नहीं है और इस तरह आज यहाँ मैं पूरी कहानी लिख रहा हूँ। कल मैं उसके परिवार की खराब आर्थिक स्थिति के विषय में विस्तार से लिख चुका हूँ– लेकिन सिर्फ पैसा ही समस्या नहीं है!

मोनिका की माँ की सबसे बड़ी समस्या उसका पति है। इतना ही नहीं है कि वह कोई काम नहीं करता। जी नहीं, उसमें और भी बहुत सी बुराइयाँ हैं। शराब पिए बगैर वह एक दिन भी नहीं रह सकता। जब वे लोग स्कूल आए थे तब पत्नी ने हमें यह बताया था और यही बात स्कूल में बेटी ने बताई और जब हम उनके घर गए थे, तब दोनों ने बताई। वह मानने के लिए तैयार ही नहीं हो रहा था मगर जब दोनों अड़ गईं, तब उसे मानना ही पड़ा।

अपने व्यसन के लिए वह कहीं न कहीं से पैसों का जुगाड़ कर ही लेता है। भले ही वह खुद कुछ कमाता-धमाता नहीं है मगर घर में पत्नी के रुपयों की खोज में लगा रहता है और उसके पैसे चुराकर सिगरेट और शराब का अपना शौक पूरा करता है।

जैसे अब भी कोई कसर बाकी हो, शराब के नशे में अपने भाइयों, पड़ोसियों, यहाँ तक कि सड़क चलते अजनबियों तक से लड़ता-झगड़ता रहता है। कहने की आवश्यकता नहीं कि पत्नी और बच्चों से तो लड़ता ही है। ऐसी-ऐसी गालियाँ देता है कि कोई सोच भी नहीं सकता कि कोई पिता अपनी 12 साला बच्ची से कह सकता है। वह देर रात शराब पीकर घर आता है, सबको जगाता है और लड़ाई-झगड़ा शुरू कर देता है-इस बात से उसे कोई मतलब नहीं होता कि उसकी पत्नी को काम पर जाने के लिए सुबह 5 बजे तड़के उठना पड़ता है।

वाद-विवाद से जब बात नही बनती तो वह मार-पीट पर उतर आता है। पत्नी से, बच्चों से। अपनी उस बच्ची के साथ भी मार-पीट करता है, जिसके साथ अभी हाल ही में ऐसी भीषण दुर्घटना घटी है कि उसका पूरा चेहरा, सीना और हाथ जल चुके हैं।

और यहीं आकर वह प्रश्न उपस्थित होता है, जिसे हमने मोनिका की माँ से अस्पताल जाते हुए एक बार फिर पूछा: वह ऐसे ज़ालिम व्यक्ति को छोड़ क्यों नहीं देती? अपने बच्चों को लेकर ऐसे निकृष्ट माहौल से दूर कहीं चली क्यों नहीं जाती?

उसने बताया कि इसी कारण उसने अपनी छोटी बेटी को अपने माता-पिता के पास भेज दिया है: काम पर जाते वक़्त वह उसे अपने पति के पास अकेला छोड़ना नहीं चाहती! जब बच्चे छोटे थे, तब वह कई बार महीनों उन्हें लेकर अपने अभिभावकों के यहाँ रहने चली जाती थी मगर अब स्कूल की छुट्टियाँ बहुत कम होती हैं और उसे काम पर भी जाना पड़ता है, इस वजह से वह ऐसा नहीं कर पाती।

तुम सब कुछ छोड़कर क्यों नहीं कहीं और चली जाती? इस परिवार से, जिसका कोई सदस्य तुमसे बात तक नहीं करता, तम्हें कुछ भी प्राप्त नहीं होता! जब तुम्हारे पास घर के बरतन-भांडे और कपड़े-लत्ते तक खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, तब तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें खरीदकर दिए और तुम खुद कमाकर अपने बच्चों की परवरिश कर रही हो! अगर वहाँ तुम्हारे पास कुछ है तो महज सोने के लिए एक कमरा भर है-और अपनी आमदनी का दसवाँ हिस्सा खर्च करके तुम्हें वह भी किराए पर मिल सकता है!

उसने कहा कि वास्तव में उसने इस बारे में सोचा था और अपने माता-पिता को भी इस बारे में बताया था। लेकिन उनके जवाब से उसकी हिम्मत टूट गई: "बेटी, यह तुम्हारी किस्मत है, तुम अपने भाग्य के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकती।"

इसका अर्थ यह हुआ कि अपने नशेड़ी पति की शराब के लिए पैसे कमाओ और ऊपर से उसके हाथों खुद अपनी और बच्चों की पिटाई बर्दाश्त करो! उसके मुँह से निकले ये शब्द सुनकर हमें कैसा लगा होगा, आप कल्पना कर सकते हैं! इस परिवार की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है-लेकिन उसका अगला हिस्सा मैं आपको कल बताऊँगा!

मोनिका की मदद के काम में हम पूरी एकाग्रता के साथ लगे हुए हैं और निश्चित जानिए कि हमारा और आपकी सहायता का एक रुपया भी उसके पिता के पास नहीं पहुँच पाएगा! हम सभी बिलों का भुगतान खुद ही करेंगे और परिवार की किसी भी तरह की मदद भी सिर्फ उन्हीं के लिए होगी यानी एक-एक रुपया उसी मद में खर्च किया जाएगा, जिस काम के लिए वह नियत किया गया है!

मोनिका की मदद और उसके इलाज के हमारे काम में आप भी मदद कर सकते हैं! आप उसके अपघात के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं और कैसे सहायता करें, यहाँ जान सकते हैं!

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