आज शुक्रवार के इस ब्लॉग में मैं आपको मोनिका के हालचाल बताना चाहूँगा।
मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि वह अपनी दूसरी शल्यक्रिया करवा चुकी है और शल्यक्रिया पूरी तरह सफल रही थी। पाँच सप्ताह के अंतराल के पश्चात उसने आज से पुनः स्कूल आना शुरू कर दिया है।
जैसा मैंने पहले बताया, बिना किसी दिक्कत के उसकी शल्यक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई थी। तथ्य यह है कि शल्यक्रिया के चलते हमारी योजना से ज़्यादा काम सम्पन्न हो गया! मोनिका की बाईं आँख की, जिसे वह पूरी तरह खोल नहीं पाती थी, शल्यक्रिया हो गई। दाहिनी बाँह, जिसे वह पूरी तरह ऊपर उठा नहीं पाती थी, वह ठीक की गई और सीने के कुछ हिस्सों पर डॉक्टरों ने दूसरी जगह से त्वचा निकालकर प्रत्यारोपित कर दी। इस तरह उसके शरीर पर तीन बड़ी-बड़ी पट्टियाँ बंधी रहती थीं: सिर को घेरे हुए, आँख पर, छाती पर, बाँह को घेरकर उसे सीधे ऊपर की ओर स्थिर किए हुए और तीसरी, उसकी जांघ पर, जहाँ से डॉक्टरों ने आँख के आसपास, बाँह और छाती पर प्रत्यारोपण हेतु त्वचा निकाली थी।
शल्यक्रिया के बाद कुछ दिन तो हम उसके साथ रहे मगर फिर उसे स्वास्थ्य लाभ हेतु अस्पताल में छोड़कर हम वापस वृंदावन आ गए। एक सप्ताह बाद जब हम पुनः अस्पताल जाने लगे तो रास्ते में मोनिका की नानी और छोटी बहन, वंशिका को भी साथ ले गए। जैसा पहली शल्यक्रिया के दौरान किया था उसी तरह हमने इस बार भी मोनिका को पास स्थित एक गेस्ट हॉउस में स्थानांतरित कर दिया, जिससे हर दूसरे दिन अस्पताल में उसकी पट्टियाँ बदली जा सकें। इस बार मोनिका की नानी और बहन उसके साथ रहीं और माँ वृंदावन वापस आ गई, जिससे अपने काम पर जा सके और पैसों का नुकसान न हो।
उन्होंने वहाँ बड़ा अच्छा वक़्त गुज़ारा, शानदार ए सी में, जैसे छुट्टियाँ बिताने दिल्ली आए हो, जबकि यहाँ वृन्दावन में लू के थपेड़ों से बुरा हाल था। हमारे लिए मोनिका का वृंदावन में न होना ख़ुशी की बात थी क्योंकि इतनी गर्मी सहन करना, विशेष रूप से उसके लिए, बड़ा मुश्किल होता।
तीन महीने बाद हम उसे गेस्ट हॉउस से लेकर घर आ गए- उसके स्वास्थ्य में काफी सुधार हो चुका था और वह बहुत उल्लसित दिखाई दे रही थी! कुछ दिन बाद आश्रम में उसके लिए एक पैकेट आया: एक कसी हुई जैकेट और सिर के सहारे हेतु एक उपकरण- दोनों का मकसद त्वचा को और उसके नए जोड़ को सहारा देना था, जिससे वे बहुत सख्त न हो जाएँ। उसे इन सभी उपकरणों को छह माह तक 24 घंटे पहनकर रहना होगा।
निश्चित ही अभी उसे और हमें लंबा रास्ता तय करना है। निकट भविष्य में ही एक और कठिन और ज़रूरी शल्यक्रिया की जानी बाकी है और इसके अलावा कुछ लेज़र चिकित्साएँ भी होनी हैं। फिर, अगले कुछ साल तक डॉक्टर उस पर प्रतिरोपण की वही शल्यक्रियाएँ पुनः करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि उसका विकसित होता हुआ शरीर प्रतिरोपित त्वचा के साथ सुचारु रूप से कार्य करता रहे।
फिलहाल मोनिका खुश है कि दूसरा महत्वपूर्ण काम सफलतापूर्वक सम्पन्न कर लिया गया है। इस दौरान कितना कुछ हासिल किया गया है! अब वह अपनी दोनों आँखें पूरी तरह बंद कर पा रही है, गरदन ऊपर-नीचे और दाएँ-बाएँ हिला-डुला पा रही है और अपनी बाँह ऊपर उठा पा रही है! चेहरे और ऊपरी शरीर की सूजन गायब हो चुकी है। यह कितनी बड़ी बात है कि आधुनिक चिकित्सा लोगों की भलाई के लिए कितना कुछ कर सकती है।
मोनिका अब वापस स्कूल आने लगी है, जहाँ वह पाँचवी कक्षा में दोबारा पढ़ेगी क्योंकि पिछले साल दुर्घटना के चलते पहली छमाही की उसकी पढ़ाई पूरी तरह छूट गई थी। उसके साथ अब उसकी छोटी बहन भी स्कूल आती है।
सफलता की ओर यह हमारा एक और कदम है! हम उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं, जिन्होंने इस दौरान हमें पूरा-पूरा सहयोग दिया कि हम इस बच्ची और उसके गरीब परिवार की मदद कर सकें- चाहे वह शल्यक्रिया से संबन्धित हो, चाहे लंबे समय तक उसे दिल्ली में रखने का मामला हो या उसकी शिक्षा और भविष्य की चिंताएँ हों! हम जानते हैं कि भविष्य में और आगे बढ़ने में हम मोनिका की सहायता करते रहेंगे- आशा है आप भी अपना सहयोग जारी रखेंगे!
Related posts
सिर्फ रहने के स्थान के बदले में दिन भर मजदूरी करना – हमारे स्कूल के बच्चे – 22 जनवरी 2016
मोनिका अपनी अंतिम बड़ी शल्यक्रिया के लिए तैयार है – 19 जनवरी 2016
जब एक नाई लड़का पैदा करने के चक्कर में पाँच-पाँच बच्चे पैदा कर देता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 15 जनवरी 2016
हर साल घर में पानी घुस जाता है – हमारे स्कूल के बच्चे – 18 दिसंबर 2015
